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जीएसटी में विसंगतियों के खिलाफ व्यापारियों का प्रदर्शन
Updated Wed, 04 Jul 2018 12:44 AM IST
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जौनपुर। जनपद की सीमा में व्यापारियों को ई-वे बिल से मुक्त करने समेत जीएसटी में व्याप्त कई अन्य विसंगतियों को दूर करने की मांग को लेकर आंदोलित व्यापारियों ने मंगलवार को कलेक्ट्रेट में प्रदर्शन किया। अपनी मांग से संबंधित मुख्यमंत्री को संबोधित छह सूत्री पत्रक जिलाधिकारी को सौंपा।
जिला उद्योग व्यापार प्रतिनिधिमंडल के जिलाध्यक्ष इंद्रभान सिंह इंदू, प्रांतीय मंत्री शकील अहमद और जिला मंत्री आरिफ हबीब की अगुवाई में मंगलवार को बड़ी संख्या में व्यापारी कलेक्ट्रेट पहुंचे। जहां प्रदर्शन कर अपनी आवाज बुलंद की। मुख्यमंत्री को भेजे गए पत्रक में व्यापार मंडल की ओर से कहा गया है कि हर जिलों में बड़ी कंपनियों के डिस्ट्रीब्यूटर अपने सेल्स वाहनों से उत्पादों को नगर और गांव की दुकानों पर बेचने जाते हैं। दुकान पर माल बिकने के बाद वहीं पर बिल काटा जाता है। सेल्स वाहन में 50 हजार से अधिक का माल होता है। इस नाते जनपद की सीमा को ई-वे बिल से मुक्त किया जाना चाहिए। गुजरात, राजस्थान और मध्य प्रदेश सरकार ने इसे मुक्त भी कर दिया है। इसके अलावा, हाईकोर्ट का आदेश है कि ई-वे बिल की फिजिकल कापी न होने पर भी जीएसटी अधिकारी द्वारा माल जब्त नहीं किया जा सकता। इस आदेश का कड़ाई से पालन होना चाहिए। व्यापारियों ने कहा कि जीएसटी में समाधान योजना के लिए एक करोड़ से बढ़ाकर डेढ़ करोड़ रुपये किए जाने की घोषणा की गई थी लेकिन उसका सरकुलर जारी नहीं किया गया। सरकार को तत्काल सरकुलर जारी कराने के लिए आदेश देना चाहिए। ई-वे बिल का पार्ट बी भरने की जिम्मेदारी ट्रांसपोर्टर पर होनी चाहिए लेकिन यहां व्यापारियों पर यह जिम्मेदारी थोपी जा रही है। इसके अलावा, धारा 138 (7) जो निलंबित है उसे बहाल किए जाने की मांग की है। व्यापारियों की पूंजी न फंसे, इसके लिए रिफंड की व्यवस्था भी हर महीने होनी चाहिए। इस मौके पर अरुण शुक्ल, नगर अध्यक्ष घनश्याम साहू, संजय श्रीवास्तव, उमेश गुप्त, आलोक रंजन, जयकृष्ण साहू, राकेश मौर्य समेत जिले के सभी विकास खंडों और तहसील मुख्यालयों, प्रमुख बाजारों से व्यापारी शामिल थे।
जिला उद्योग व्यापार प्रतिनिधिमंडल के जिलाध्यक्ष इंद्रभान सिंह इंदू, प्रांतीय मंत्री शकील अहमद और जिला मंत्री आरिफ हबीब की अगुवाई में मंगलवार को बड़ी संख्या में व्यापारी कलेक्ट्रेट पहुंचे। जहां प्रदर्शन कर अपनी आवाज बुलंद की। मुख्यमंत्री को भेजे गए पत्रक में व्यापार मंडल की ओर से कहा गया है कि हर जिलों में बड़ी कंपनियों के डिस्ट्रीब्यूटर अपने सेल्स वाहनों से उत्पादों को नगर और गांव की दुकानों पर बेचने जाते हैं। दुकान पर माल बिकने के बाद वहीं पर बिल काटा जाता है। सेल्स वाहन में 50 हजार से अधिक का माल होता है। इस नाते जनपद की सीमा को ई-वे बिल से मुक्त किया जाना चाहिए। गुजरात, राजस्थान और मध्य प्रदेश सरकार ने इसे मुक्त भी कर दिया है। इसके अलावा, हाईकोर्ट का आदेश है कि ई-वे बिल की फिजिकल कापी न होने पर भी जीएसटी अधिकारी द्वारा माल जब्त नहीं किया जा सकता। इस आदेश का कड़ाई से पालन होना चाहिए। व्यापारियों ने कहा कि जीएसटी में समाधान योजना के लिए एक करोड़ से बढ़ाकर डेढ़ करोड़ रुपये किए जाने की घोषणा की गई थी लेकिन उसका सरकुलर जारी नहीं किया गया। सरकार को तत्काल सरकुलर जारी कराने के लिए आदेश देना चाहिए। ई-वे बिल का पार्ट बी भरने की जिम्मेदारी ट्रांसपोर्टर पर होनी चाहिए लेकिन यहां व्यापारियों पर यह जिम्मेदारी थोपी जा रही है। इसके अलावा, धारा 138 (7) जो निलंबित है उसे बहाल किए जाने की मांग की है। व्यापारियों की पूंजी न फंसे, इसके लिए रिफंड की व्यवस्था भी हर महीने होनी चाहिए। इस मौके पर अरुण शुक्ल, नगर अध्यक्ष घनश्याम साहू, संजय श्रीवास्तव, उमेश गुप्त, आलोक रंजन, जयकृष्ण साहू, राकेश मौर्य समेत जिले के सभी विकास खंडों और तहसील मुख्यालयों, प्रमुख बाजारों से व्यापारी शामिल थे।
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