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जून के बाद बुवाई से घट जाता है 10 फीसदी उत्पादन

Sat, 30 Jun 2018 12:14 AM IST
Updated Sat, 30 Jun 2018 12:14 AM IST
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जून के बाद बुवाई से घट जाता है 10 फीसदी उत्पादन
जौनपुर। मानसून के बादल उमड़-घुमड़ रहे हैं लेकिन बरस नहीं रहे हैं। इससे मक्का के किसान मायूस है। कम वर्षा के चलते मक्का की खेती के महज 22.5 प्रतिशत रकबे में ही बुवाई हो पाई है। ऐसा ही हाल मूंग, ज्वार और तिल की खेती का भी है। इन फसलों की खेती उन इलाकों में होती है, जहां सिंचाई के साधन नहीं है। ऐसे में किसान बादलों पर ही टकटकी लगाए रखते हैं। जून में बुवाई नहीं होने पर उपज में 10-15 फीसदी तक की कमी का अंदेशा रहता है।
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जिले में दो लाख 29 हजार हेक्टेयर में खरीफ की फसलों की बुवाई होती है। इसमें एक चौथाई रकबे में मक्का, तिल, ज्वार, बाजरा, मूंग, उड़द आदि की खेती होती है। कृषि विभाग के अधिकारियों के मुताबिक इन फसलों की बुवाई किसानों को तीस जून तक कर लेनी चाहिए। इसके बाद बुवाई होने पर फसलों में बीमारी लगने और उत्पादन कम होने का अंदेशा होता है। इस साल 47130 हेक्टेयर में मक्का, 3012 हेक्टेयर में ज्वार, 4947 हेक्टेयर में बाजरा, 5678 हेक्टेयर में उड़द, नौ हेक्टेयर में मूंग और 575 हेक्टेयर मेंतिल की खेती करने का लक्ष्य है। जिले में 25 जून को बारिश हुई थी। मछलीशहर, मुंगराबादशाहपुर में अच्छी बारिश हुई, जिससे वहां जुताई और बुवाई हो सकी। पर बक्शा सहित तमाम इलाकों में बारिश हुई ही नहीं। मानसून की बेरुखी से 28 जून तक जिले में सिर्फ 22.4 फीसदी तय रकबे में ही खरीब की की बुवाई हो सकी थी। मक्का 10583 हेक्टेयर, ज्वार 245 हेक्टेयर, उड़द 441 हेक्टेयर और तिल की बुवाई 15 हेक्टेयर में हुई है। वर्ष 2016 में मानसून मेहरबान था। जिले में 30 जून तक 46.33 मिमी बारिश हुई थी लिहाजा 49763 हेक्टेयर में मक्का, 2511 हेक्टेयर में ज्वार, 4724 हेक्टेयर में उड़द, 18 हेक्टेयर में मूंग और 127 हेक्टेयर में तिल बो दिया गया था। वर्ष 2017 में 30 जून तक महज 17.03 मिमी वर्षा हुई जबकि इस साल 14 मिमी पानी बरसा।
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बक्शा के प्रगतिशील किसान मेहीलाल मौर्य कहते हैं कि समय से मक्का बोने पर गुड़ाई करने में आसानी होती है, इससे पौधे तेजी से पनपते हैं। उपज अच्छी होती है। करंजाकला के किसान राजदेव यादव कहते हैं कि आषाढ़ी खेती करके खाली होने पर किसान धान में पूरा समय लगा पाता है। बारिश में देर होने पर न ज्वार, मक्का हो पाएगा और न ही धान पर समय देना संभव होगा।
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जून महीने में अभी तक बारिश औसत से कम हुई है जिससे अभीतक खरीफ की फसलों की बुवाई दस फीसदी तक हुई है। खास तौर से मक्का, ज्वार, मूंग आदि की फसलों की बुवाई का सही समय 30 जून तक होता है। देर से बोई गई फसल का उत्पादन प्रभावित होता है।
जय प्रकाश
कृषि उप निदेशक जौनपुर।

मक्का, ज्वार, मूंग, तिल जैसी खरीफ की फसलों की बुवाई का असली समय जून का आखिरी सप्ताह होता है। इन फसलों की बुवाई किसान जुलाई में भी करते हैं लेकिन 30 जून तक बोई गई फसलों की तुलना में जुलाई में बोई गई फसल के उत्पादन में तकरीबन 10 से 15 फीसदी कमी आ जाती है।

डा. संदीप कुमार
फसल सुरक्षा वैज्ञानिक कृषि विज्ञान केंद्र


इन इलाकों में होती है मक्का की अधिक खेती
जौनपुर। मक्का की खेती के लिहाज से जिले में बक्शा, बदलापुर, खुटहन, करंजाकला, शाहगंज, मुफ्तीगंज, जलालपुर आदि इलाके की मिट्टी अधिक उपजाऊ है। सिंचाई के लिए जिले में नहरों का भी जाल है लेकिन अधिकतर नहरें भी अभी तक सूखी पड़ी हैं। इसके अलावा महराजगंज, सुजानगंज, मछलीशहर, मुंगराबादशाहपुर, मडिय़ाहूं इलाकों में जहां नहरों का जाल है वहां धान की अधिक खेती होती है।
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