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शौचालय का गढ्डा खोदकर भूल गए जिम्मेदार
Updated Tue, 19 Jun 2018 12:12 AM IST
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मीरगंज। अधिकारियों की मनमानी के चलते सार्वजनिक धन का दुरुपयोग किया जा रहा है। बगैर जमीन के ही सांसद निधि से सार्वजनिक शौचालय का काम शुरू करा दिया गया। बिना जमीन का मालिकाना तय किए ही दो स्थानों पर इसके लिए नींव तक खोद दी गई और जब जमीन के मालिकों ने विरोध किया तो काम बंद कर दिया गया। अब तीन महीने से राजस्व विभाग जमीन खोज रहा है।
मीरगंज में डाकघर बैंक रेलवे स्टेशन प्राईवेट वस अड्डा दो महाविद्यालय दो इंटरकालेज व व्यापारिक प्रतिष्ठान होने के कारण यहां हमेशा भीड़ भाड़ बनी रहती है। लोगों को शौचालय नहीं होने से परेशानी होती है। इसको देखते हुए सार्वजनिक शौचालय बनाया जाना था, जिसका संचालन और निर्माण सुलभ इंटरनेशनल के जरिए कराया जा रहा है। इसके लिए मछलीशहर के सांसद रामचरित्र निषाद ने अपनी निधि से 14 लाख रुपये जारी किए थे। बाजार में पहले से बने एक शौचालय की जमीन पर काम शुरू कर दिया गया। काम शुरू करने से पहले राजस्व विभाग ने यह सुनिश्चित ही नहीं किया कि जमीन सरकारी है या निजी। इसका विरोध शुरू हुआ तो वहां काम बंद कर दिया गया। जरौना स्टेशन के समीप नींव खोदी गई तो लोगों ने विरोध कर दिया। पता चला यहां भी सरकारी जमीन नहीं थी। सांसद प्रतिनिधि राजेश सिह का कहना है कि राजस्व विभाग से जमीन उपलब्ध कराने को कहा गया है। हालांकि वह यह नहीं बता पाए कि बिना जमीन सुनिश्चित हुए काम कैसे शुरू हो गया। उपजिलाधिकारी जगदंबा प्रसाद सिह का कहना है की जमीन उपलब्ध कराने के लिए कानूनगो को निर्देश दिया गया है। मगर तीन महीने हो गए अब तक कानूनगो ने इस दिशा में कुछ नहीं किया, इस पर वह ज्यादा कुछ कहने को तैयार नहीं हैं।
बदलापुर/ घनश्यामपुर। स्वच्छ भारत मिशन की सफलता में जिम्मेदार ही रोड़ा बन गए हैं। हकारपुर गांव की आबादी 500 से अधिक है। कई लोगों के घरों पर शौचालय निर्माण के लिए नगर पंचायत गड्ढा खोदवा कर छोड़ दिया है। काशीनाथ गुप्ता, खेलाड़ी खरवार, राजन सिंह, जगदीश सेठ, उदयभान गुप्ता के साथ ही पुरानीबाजार के नन्हें कहार , भोलानाथ , बाबू मियां आदि का कहना है कि शौचालय निर्माण की बात कहकर उनके घरों के सामने गड्ढा खोदवा गया था लेकिन निर्माण नहीं कराया गया। उनमें जलभराव से मच्छरों की संख्या बढ़ गई है।
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मीरगंज में डाकघर बैंक रेलवे स्टेशन प्राईवेट वस अड्डा दो महाविद्यालय दो इंटरकालेज व व्यापारिक प्रतिष्ठान होने के कारण यहां हमेशा भीड़ भाड़ बनी रहती है। लोगों को शौचालय नहीं होने से परेशानी होती है। इसको देखते हुए सार्वजनिक शौचालय बनाया जाना था, जिसका संचालन और निर्माण सुलभ इंटरनेशनल के जरिए कराया जा रहा है। इसके लिए मछलीशहर के सांसद रामचरित्र निषाद ने अपनी निधि से 14 लाख रुपये जारी किए थे। बाजार में पहले से बने एक शौचालय की जमीन पर काम शुरू कर दिया गया। काम शुरू करने से पहले राजस्व विभाग ने यह सुनिश्चित ही नहीं किया कि जमीन सरकारी है या निजी। इसका विरोध शुरू हुआ तो वहां काम बंद कर दिया गया। जरौना स्टेशन के समीप नींव खोदी गई तो लोगों ने विरोध कर दिया। पता चला यहां भी सरकारी जमीन नहीं थी। सांसद प्रतिनिधि राजेश सिह का कहना है कि राजस्व विभाग से जमीन उपलब्ध कराने को कहा गया है। हालांकि वह यह नहीं बता पाए कि बिना जमीन सुनिश्चित हुए काम कैसे शुरू हो गया। उपजिलाधिकारी जगदंबा प्रसाद सिह का कहना है की जमीन उपलब्ध कराने के लिए कानूनगो को निर्देश दिया गया है। मगर तीन महीने हो गए अब तक कानूनगो ने इस दिशा में कुछ नहीं किया, इस पर वह ज्यादा कुछ कहने को तैयार नहीं हैं।
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बदलापुर/ घनश्यामपुर। स्वच्छ भारत मिशन की सफलता में जिम्मेदार ही रोड़ा बन गए हैं। हकारपुर गांव की आबादी 500 से अधिक है। कई लोगों के घरों पर शौचालय निर्माण के लिए नगर पंचायत गड्ढा खोदवा कर छोड़ दिया है। काशीनाथ गुप्ता, खेलाड़ी खरवार, राजन सिंह, जगदीश सेठ, उदयभान गुप्ता के साथ ही पुरानीबाजार के नन्हें कहार , भोलानाथ , बाबू मियां आदि का कहना है कि शौचालय निर्माण की बात कहकर उनके घरों के सामने गड्ढा खोदवा गया था लेकिन निर्माण नहीं कराया गया। उनमें जलभराव से मच्छरों की संख्या बढ़ गई है।
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