{"_id":"5b1acdf84f1c1bf16e8b6f38","slug":"15284833235-jaunpur-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"प्रदूषण के चलते कम हो गई जमैथा के खरबूजे की मिठास","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
प्रदूषण के चलते कम हो गई जमैथा के खरबूजे की मिठास
Updated Sat, 09 Jun 2018 12:12 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
सिरकोनी। गोमती नदी के किनारे बसे जमैथा गांव में खरबूजे के उत्पाद के कारण जिलेमें ही नहीं बल्कि पूर्वांचल में भी अपनी एक अलग पहचान बना लिया है। खरबूजे से ही जमैथा की पहचान की जाती है। लेकिन तेजी से बढ़ रहे प्रदूषण के कारण खरबूजे के उत्पादन और उसकी मिठास पर ग्रहण लग गया है। अब न तो खरबूजे में पहले वाली मिठास रह गई है और न ही किसानों में इसके उत्पादन के प्रति कोई विशेष लगाव रह गया है। पहले किसान जहांइसकी खेती एक बीघे में करके 4 से 5 कुंतल उत्पादन कर लेते थे। आज वह उत्पादन घटकर आधा हो गया है। इतना ही नहीं लागत भी पहले की अपेक्षा बढ़ गई है। खरबूजे की बुआई के पहले एक कुंतल नीम की खली, 15 किलो डाई, एक किलो खरबूजे का बीज प्रति बीघाके हिसाब से डाला जाता है। पहले मई में खरबूजे का फल निकलने लगता था। अब किसान बुवाई ही अप्रैल में शुरू करते हैं। उत्पादन जून तक होता है। किसान हृदयनारायण ने बताया कि पहले खेत खाली छोड़े जाते थे। उसमें गोबर की खाद, जैविक खादका अधिक प्रयोग किया जाता था। अब न तो खेत ही खाली छोड़े जा रहे हैं और न हीजैविक खादों पर ध्यान दिया जा रहा है। इससे किसानों की आमदनी घटकर 25 से 30 हजार प्रति बीघा आ गई है। पहले 200 एकड़ से अधिक क्षेत्रफल मेंखरबूजे की खेती होती थी। अब घट कर आधे से भी कम क्षेत्रफल में खेती हो रही है। खरबूजा जिले में ही नहीं बल्कि पूरे पूर्वांचल में निर्यात किया जाता है। किसान हृदयराम, मीता देवी, पन्नालाल, लक्ष्मीनारायण ,थानेदार आदि किसानों ने बताया किप्रदूषण के चलते खरबूजे की खेती पर बहुत बुरा असर पड़ रहा है । अब पहले जैसाउत्पादन भी नहीं होता है। पहले एक पेड़ में जहां 25 से 30 फल लगते थे वही अब इसकी संख्याआधी से भी कम हो गई है। हालांकि किसान उत्पादन बढ़ाने के लिए हाइब्रिड बीज केसाथ-साथ जैविक खादों पर भी जोर दे रहे हैं। मृदा परीक्षण भी करवा रहे हैं।
विज्ञापन