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मानक को दर किनार कर धड़ल्ले से चल रहे स्कूल वाहन
Updated Thu, 10 May 2018 12:48 AM IST
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जौनपुर। नौनिहाल रोजाना शिक्षा लेने के लिए जोखिम भरा सफर तय करते हैं। तमाम खटारा वाहन स्कूलों में बच्चों लाने ले जाने का काम कर रही हैं। यहां तक कि तमाम स्कूली बसें भी फिटनेस के मानकों को पूरा नहीं करती हैं। उस पर क्षमता से अधिक बच्चों को बैठाया जाता है। तमाम बच्चे खड़े होकर स्कूल जाते हैं।
जिले में कुल 632 स्कूल वाहन संचालित हैं, जिसमें 358 बसें व मिनी बसें और 274 छोटे चार पहिया वाहन हैं। पिछले दिनों परिवहन विभाग ने स्कूली बसों की जांच का अभियान चलाया। मानक पूरा नहीं करने वाले 118 वाहनों को नोटिस जारी कर मानक पूरा करने के लिए कहा। इसके अलावा 128 वाहनों को तो उनके मालिक जांच कराने ले ही नहीं आए। इसके अलावा तकरीबन 200 वाहनों को स्कूल चालकों ने संबद्ध कर रखा है, जिनकी जिम्मेदारी विद्यालय नहीं लेते हैं। इनमें तमाम वहन खटारा हैं। उनकी कभी कोई फिटनेस जांच भी नहीं होती है। सड़क सुरक्षा सप्ताह के तहत अभियान चलाकर स्कूली वाहनों की चेकिंग की गई। इस दौरान कुल 494 स्कूल वाहनों की जांच की गई, जिसमें से 38 वाहनों का चालान किया गया और 118 वाहनों को नोटिस जारी कर मानक पूरा करने को कहा गया।
बसों में अग्निशमन यंत्र, दो आपात द्वार, फर्स्ट एड बाक्स, स्पीड कंट्रोल यंत्र, सेफ्टी बेल्ट, बैग रखने की जगह, फुट बोर्ड, फुट स्टेप, सायरन, खिड़की पर जाली लगी होनी चाहिए। इसके अलावा यदि छात्राएं बस में आती-जाती हों तो महिला परिचालक भी जरूरी है। इन नियमों की खुलेआम धज्जियां उड़ाई जाती हैं। किसी भी बस में महिला परिचालक नहीं हैं। इसके बावजूद परिवहन विभाग को ज्यादा खामियां नजर नहीं आती हैं।
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क्या है मानक-
- सीट से ज्यादा बच्चों को नहीं बैठाना चाहिए। ।
- सायरन, खिड़की पर जाली आदि की सुविधा भी होनी चाहिए।
- अगर बच्चियां बैठीं हैं तो महिला परिचालक होना आवश्यक है।
- चालक के पास बच्चों के नाम और उनके अभिभावकों का नंबर होना चाहिए।
- बस 15 वर्ष से अधिक पुरानी नहीं होनी चाहिए।
- बस का रंग सुनहला पीला हो और उस पर नीली लाइन हो।
118 स्कूली वाहनों को नोटिस दिया गया है। उनको मानक पूरा करने को कहा गया है। दोबारा जांच में कमी पाए जाने पर कार्रवाई की जाएगी। समय-समय अभियान चलाकर ऐसे वाहनों की जांच की जा रही है।-सौरभ कुमार, एआरटीओ
जिले में कुल 632 स्कूल वाहन संचालित हैं, जिसमें 358 बसें व मिनी बसें और 274 छोटे चार पहिया वाहन हैं। पिछले दिनों परिवहन विभाग ने स्कूली बसों की जांच का अभियान चलाया। मानक पूरा नहीं करने वाले 118 वाहनों को नोटिस जारी कर मानक पूरा करने के लिए कहा। इसके अलावा 128 वाहनों को तो उनके मालिक जांच कराने ले ही नहीं आए। इसके अलावा तकरीबन 200 वाहनों को स्कूल चालकों ने संबद्ध कर रखा है, जिनकी जिम्मेदारी विद्यालय नहीं लेते हैं। इनमें तमाम वहन खटारा हैं। उनकी कभी कोई फिटनेस जांच भी नहीं होती है। सड़क सुरक्षा सप्ताह के तहत अभियान चलाकर स्कूली वाहनों की चेकिंग की गई। इस दौरान कुल 494 स्कूल वाहनों की जांच की गई, जिसमें से 38 वाहनों का चालान किया गया और 118 वाहनों को नोटिस जारी कर मानक पूरा करने को कहा गया।
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बसों में अग्निशमन यंत्र, दो आपात द्वार, फर्स्ट एड बाक्स, स्पीड कंट्रोल यंत्र, सेफ्टी बेल्ट, बैग रखने की जगह, फुट बोर्ड, फुट स्टेप, सायरन, खिड़की पर जाली लगी होनी चाहिए। इसके अलावा यदि छात्राएं बस में आती-जाती हों तो महिला परिचालक भी जरूरी है। इन नियमों की खुलेआम धज्जियां उड़ाई जाती हैं। किसी भी बस में महिला परिचालक नहीं हैं। इसके बावजूद परिवहन विभाग को ज्यादा खामियां नजर नहीं आती हैं।
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क्या है मानक-
- सीट से ज्यादा बच्चों को नहीं बैठाना चाहिए। ।
- सायरन, खिड़की पर जाली आदि की सुविधा भी होनी चाहिए।
- अगर बच्चियां बैठीं हैं तो महिला परिचालक होना आवश्यक है।
- चालक के पास बच्चों के नाम और उनके अभिभावकों का नंबर होना चाहिए।
- बस 15 वर्ष से अधिक पुरानी नहीं होनी चाहिए।
- बस का रंग सुनहला पीला हो और उस पर नीली लाइन हो।
118 स्कूली वाहनों को नोटिस दिया गया है। उनको मानक पूरा करने को कहा गया है। दोबारा जांच में कमी पाए जाने पर कार्रवाई की जाएगी। समय-समय अभियान चलाकर ऐसे वाहनों की जांच की जा रही है।-सौरभ कुमार, एआरटीओ