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नहीं हो पाया कोटे की दुकान का चयन
Updated Tue, 10 Apr 2018 12:32 AM IST
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बक्शा। मखदूमपुर गांव में विवाद के कारण कोटे की दुकान का चयन नहीं हो सका। न्यायालय के आदेश पर दोनों पक्षों में तनातनी का माहौल रहा। फर्जी लोगों को बैठक में बुलाने की बात पर हंगामा खड़ा हो गया।
गांव के कोटेदार अब्दुल समद का निधन हो चुका है। नए कोटेदार के चयन के लिए न्यायालय के आदेश पर ग्राम सभा की खुली बैठक बुलाई गई थी। दोनों पक्षों से सैकड़ों लोग पहुंचे था। चुनाव अधिकारी एडीओ पंचायत रामकृष्ण यादव, एडीओ कोआपरेटिव अजय कुमार, बीओ दिलीप कुमार, ग्राम पंचायत अधिकारी विनोद सिंह, राजेंद्र उपाध्याय की देखरेख में चुनाव शुरू हुआ। अब्दुल समद की पत्नी आसमा बेगम एवं दूसरे दावेदार फिरोजखान के समर्थकों को अलग-अलग स्थानों पर लाइन लगाकर बैठाया गया। पुलिस पहले फिरोज के समर्थकों की आईडी की चेकिंग शुरू की। इस दौरान दूसरे पक्ष ने विरोध करते हुए चुनाव से बाहर हो गए। दोनों पक्षों ने एक दूसरे पर फर्जी आईडी का आरोप भी लगाया। पुलिस का कहना है कि फर्जी आई वालों को निकाला जा रहा था परंतु एक पक्ष चुनाव कराने को तैयार नहीं हुआ। उधर सिकरारा के डमरुआ ग्रामसभा की खुली बैठक में ग्रामीणों ने सर्वसम्मति से उषा देवी पत्नी रतनचंद को कोटेदार चुना गया।
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गांव के कोटेदार अब्दुल समद का निधन हो चुका है। नए कोटेदार के चयन के लिए न्यायालय के आदेश पर ग्राम सभा की खुली बैठक बुलाई गई थी। दोनों पक्षों से सैकड़ों लोग पहुंचे था। चुनाव अधिकारी एडीओ पंचायत रामकृष्ण यादव, एडीओ कोआपरेटिव अजय कुमार, बीओ दिलीप कुमार, ग्राम पंचायत अधिकारी विनोद सिंह, राजेंद्र उपाध्याय की देखरेख में चुनाव शुरू हुआ। अब्दुल समद की पत्नी आसमा बेगम एवं दूसरे दावेदार फिरोजखान के समर्थकों को अलग-अलग स्थानों पर लाइन लगाकर बैठाया गया। पुलिस पहले फिरोज के समर्थकों की आईडी की चेकिंग शुरू की। इस दौरान दूसरे पक्ष ने विरोध करते हुए चुनाव से बाहर हो गए। दोनों पक्षों ने एक दूसरे पर फर्जी आईडी का आरोप भी लगाया। पुलिस का कहना है कि फर्जी आई वालों को निकाला जा रहा था परंतु एक पक्ष चुनाव कराने को तैयार नहीं हुआ। उधर सिकरारा के डमरुआ ग्रामसभा की खुली बैठक में ग्रामीणों ने सर्वसम्मति से उषा देवी पत्नी रतनचंद को कोटेदार चुना गया।
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