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मौलाना महमुदुल हसन खां सुपुर्दे खाक
Updated Tue, 03 Apr 2018 12:35 AM IST
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जौनपुर। शिया धर्मगुरु मौलाना महमुदुल हसन खां को सुल्तानपुर में उनके पैतृक कब्रिस्तान में सैकड़ों लोगों के मौजूदगी में सुपुर्देखाक किया गया। जनाजा की नमाज मौलाना हमीदुल हसन तकवी लखनऊ ने पढ़ाई। मजलिस मौलाना कमीरूल हसन रिजवी बनारस ने पढ़ी।
लखनऊ, जौनपुर, सुल्तानपुर, इलाहाबाद, आजमगढ़ फैजाबाद, अम्बेडकर नगर, रायबरेली तथा अन्य जिलों के उल्मा उनकी अन्तिम यात्रा में शामिल हुए। जमियां नासिरिया पहुंचकर उन्हें खिराजे अकीदत पेश किया। शिया जामा मस्जिद मार्केट शेख नूरूल हसन मेमोरियल प्रतिष्ठान तथा कई शिक्षा संस्थान शोक में बंद रहे। शिया जामा मस्जिद नवाब बाग का पुनर्निर्माण शिया कालेज जौनपुर के विकास एवं नासिरिया अरबी कालेज को पुनर्जीवित करने के लिए किए गए उनके प्रयासो को कभी नहीं भुलाया जा सकेगा। अजादारी काउंसिल के प्रवक्ता सैयद असलम नकवी ने कहा कि मौलाना महमुदुल हसन खां फिकहे जाफरी के बड़े ज्ञाता थे। हदीस के जानकार थे। पिहानी हरदोई और जौनपुर में मदरसों का विस्तार किया और बहुत सी गैर इस्लामी रस्मों को जो निकाह का हिस्सा बन गई थीं, उन्हें खत्म कराया।
लखनऊ, जौनपुर, सुल्तानपुर, इलाहाबाद, आजमगढ़ फैजाबाद, अम्बेडकर नगर, रायबरेली तथा अन्य जिलों के उल्मा उनकी अन्तिम यात्रा में शामिल हुए। जमियां नासिरिया पहुंचकर उन्हें खिराजे अकीदत पेश किया। शिया जामा मस्जिद मार्केट शेख नूरूल हसन मेमोरियल प्रतिष्ठान तथा कई शिक्षा संस्थान शोक में बंद रहे। शिया जामा मस्जिद नवाब बाग का पुनर्निर्माण शिया कालेज जौनपुर के विकास एवं नासिरिया अरबी कालेज को पुनर्जीवित करने के लिए किए गए उनके प्रयासो को कभी नहीं भुलाया जा सकेगा। अजादारी काउंसिल के प्रवक्ता सैयद असलम नकवी ने कहा कि मौलाना महमुदुल हसन खां फिकहे जाफरी के बड़े ज्ञाता थे। हदीस के जानकार थे। पिहानी हरदोई और जौनपुर में मदरसों का विस्तार किया और बहुत सी गैर इस्लामी रस्मों को जो निकाह का हिस्सा बन गई थीं, उन्हें खत्म कराया।
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