{"_id":"5ab4006d4f1c1b91778b6e49","slug":"15217462838-jaunpur-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"लोहिया आवास की हुई जांच","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
लोहिया आवास की हुई जांच
Updated Fri, 23 Mar 2018 12:43 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
क्षेत्र के समग्र ग्राम खजुरन में लोहिया आवास की जांच करने गुरुवार को जिला गन्ना अधिकारी हुदा सिद्दीकी पहुंचे और उन्होंने बयान दर्ज किया। जांच से लोहिया आवास के अपात्रों में खलबली मच गई है। वर्ष 2014-15 में तत्कालीन ग्राम पंचायत अधिकारी संतोष कुमार दुबे ने बगल के गाँव पहितियापुर निवासीे विजय गुप्ता तथा खजुरन गाँव निवासी अविवाहित धर्मू पुत्र कब्बर को अपात्र होने के बावजूद भी प्रधान के प्रभाव में लोहिया आवास दे दिया था। धर्मू के पिता कब्बर पुत्र खुरभुर तथा धर्मू की भाभी रूबीना पत्नी अर्जुन को वर्ष 2014-15 में इंदिरा आवास दिया जा चुका है।
उक्त गाँव निवासी सिनाकत अली ने जिलाधिकारी अरविंद मलप्पा बंगारी को बुधवार को प्रार्थना पत्र सौंपकर न्याय की गुहार लगाई थी। पीड़ित ने जिलाधिकारी को दिए गए प्रार्थना पत्र में न्यान न मिलने की दशा में आत्महत्या की भी धमकी दिया था। जिसको देखते हुए जिलाधिकारी ने इस प्रकरण को गंभीरता से लिया। और तत्काल गन्ना अधिकारी हुदा सिद्दीकी को जांच कर रिपोर्ट सौंपने का निर्देश दिया। पीड़ित का आरोप है कि हमारा गांव 2015-16 में समग्र गांव चयनित हुआ था। जहां गाँव के प्रधान व तत्कालीन सेक्रेटरी की मिलीभगत से विजय गुप्त व कब्बर को अपात्र होने के बावजूद भी आवास दे दिया गया। जिसे प्रधान अपने जमीन में बनवाकर स्वत: उपयोग कर रहे हैं।
विज्ञापन
उक्त गाँव निवासी सिनाकत अली ने जिलाधिकारी अरविंद मलप्पा बंगारी को बुधवार को प्रार्थना पत्र सौंपकर न्याय की गुहार लगाई थी। पीड़ित ने जिलाधिकारी को दिए गए प्रार्थना पत्र में न्यान न मिलने की दशा में आत्महत्या की भी धमकी दिया था। जिसको देखते हुए जिलाधिकारी ने इस प्रकरण को गंभीरता से लिया। और तत्काल गन्ना अधिकारी हुदा सिद्दीकी को जांच कर रिपोर्ट सौंपने का निर्देश दिया। पीड़ित का आरोप है कि हमारा गांव 2015-16 में समग्र गांव चयनित हुआ था। जहां गाँव के प्रधान व तत्कालीन सेक्रेटरी की मिलीभगत से विजय गुप्त व कब्बर को अपात्र होने के बावजूद भी आवास दे दिया गया। जिसे प्रधान अपने जमीन में बनवाकर स्वत: उपयोग कर रहे हैं।
विज्ञापन