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परमात्मा तो होते हैं भाव के भूखे
Updated Wed, 31 Jan 2018 12:52 AM IST
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बदलापुर/ घनश्यामपुर। स्वामी समर तीर्थ महराज ने कहा कि भगवान भाव का भूखा होता है। जहां भाव है वहीं भक्ति है। यह बातें क्षेत्र के जनौर गांव में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा के पांचवें दिन कथा के दौरान कही। उन्होंने कहा कि पृथ्वी पर अवतरित मानव जाति स्वंय को भले ही समृद्धिशाली समझता हो परन्तु स्थित यह है कि यहां सभी गरीब हैं। फर्क इतना है कि कुछ मन्दिर के अन्दर मांगते है तो कुछ मन्दिर के बाहर। भगवान अपने भक्तों का सदैव ध्यान देता है। मानव का जन्म बड़े भाग्य से मिलता है। सत्कर्म कर के इसका सदुपयोग करना चाहिए। मानव द्वारा किया गया कर्म ही उसके साथ जाता है। कर्म के मुताबिक ही उसे फल मिलता है। मानव को गृहस्थ आश्रम में भी रह कर सत्कर्म यानी दया , धर्म , पूजा ,पाठ , दान सहित सदैव परहित करना ही ईश्वर के प्रति सच्ची श्रद्धा है। सत्कर्म करने से ही मानव को मोक्ष की प्राप्ति मिलती है। इस मौके पर लालसाहब यादव , राजबहादुर यादव , लक्ष्मीशंकर यादव , उमाशंकर यादव , ओमप्रकाश यादव आदि लोग मौजूद थे।
प्रत्येक बहन के पास हो कन्हैया जैसा भाई
डोभी। कथा वाचक पंडित रामाश्रय शुक्ल ने भगवान श्रीकृष्ण द्वारा संबंध निर्वाह की असीम क्षमता के साथ भक्त और भगवान के बीच बनने वाले रिश्ते पर विस्तार से प्रकाश डाला। द्वौपदी चीर हरण के समय श्रीकृष्ण ने बहन और भाई के पवित्र रिश्ते की डोर को टूटने नहीं दिया। द्वौपदी की करुण पुकार सुन कृष्ण अपने वाहन गरुड़ को भी छोड़ दिया। पल भर में हस्तिनापुर पहुँच कर बहन की लाज बचा ली। क्षेत्र के हरिहरपुर स्थित बेलनाथ शिव मंदिर प्रांगण पर आयोजित सात दिवसीय श्रीमद भागवत कथा में प्रवचन कर रहे थे। उन्होंने कहा कि भक्त के आगे भगवान हार जाते है। अपनी इस हार में भगवान को अति प्रसन्नता होती है। कलयुग में त्रिविध तापों से मुक्ति का मात्र एक ही साधन है श्रीमद्भागवत कथा। कथा के तीसरे दिन कि शुरुवात श्रीमद्भागवत पूजन एवं दीप प्रज्वलन के साथ कथा वाचक पंडित रामाश्रय शुक्ल को माल्यार्पण के साथ हुआ। इस अवसर पर रमेश कुमार दुबे, जयति पाण्डेय, जितेंद्र पाण्डेय, अशोक पाण्डेय,अनिल पाण्डेय, प्रधान शिव बालक यादव ,राजेन्द्र सिंह मौजूद थे।
पत्नी के आग्रह पर श्रीकृष्ण के पास पहुंच गए सुदामा
बरईपार। क्षेत्र के कटका गांव में चल रहे सात दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा ज्ञान यज्ञ के छठे दिन स्वामी नारायण वाचस्पति महाराज ने कृष्ण और सुदामा मित्रता का वर्णन किया। उन्होंने कहा कि सुदामा एक गरीब ब्राह्मण थे लेकिन भगवान कृष्ण का अनन्य मित्र और भक्त थे। पत्नी ने सुदामा को उनके मित्र की याद दिलाई जो द्वारका के राजा थे। सुदामा ने कहा श्रीकृष्ण पराक्रमी राजा हैं, मैं गरीब ब्राह्मण। कैसे उनके पास जाकर सहायता मांग सकता हूं। पत्नी ने कहा कि मित्रता में भेद नहीं होता वह सहायता करेंगे। सुदामा श्रीकृष्ण के पास जाने तो पत्नी पड़ोसियों से चावल मांगकर ले आई तथा सुदामा को वे चावल अपने मित्र को भेंट करने के लिए दे दिए। भगवान ने उन्हीं चावलों को खाकर सुदामा को राजा बना दिया। आयोजक श्री प्रकाश मिश्र ने लोगों का आभार व्यक्त किया। इस अवसर पर जय प्रकाश मिश्र, मार्कण्डेय पांडेय, पप्पू पांडेय, मुंन्ना विश्वकर्मा अंकुर मिश्र आदि मौजूद रहे।
प्रत्येक बहन के पास हो कन्हैया जैसा भाई
डोभी। कथा वाचक पंडित रामाश्रय शुक्ल ने भगवान श्रीकृष्ण द्वारा संबंध निर्वाह की असीम क्षमता के साथ भक्त और भगवान के बीच बनने वाले रिश्ते पर विस्तार से प्रकाश डाला। द्वौपदी चीर हरण के समय श्रीकृष्ण ने बहन और भाई के पवित्र रिश्ते की डोर को टूटने नहीं दिया। द्वौपदी की करुण पुकार सुन कृष्ण अपने वाहन गरुड़ को भी छोड़ दिया। पल भर में हस्तिनापुर पहुँच कर बहन की लाज बचा ली। क्षेत्र के हरिहरपुर स्थित बेलनाथ शिव मंदिर प्रांगण पर आयोजित सात दिवसीय श्रीमद भागवत कथा में प्रवचन कर रहे थे। उन्होंने कहा कि भक्त के आगे भगवान हार जाते है। अपनी इस हार में भगवान को अति प्रसन्नता होती है। कलयुग में त्रिविध तापों से मुक्ति का मात्र एक ही साधन है श्रीमद्भागवत कथा। कथा के तीसरे दिन कि शुरुवात श्रीमद्भागवत पूजन एवं दीप प्रज्वलन के साथ कथा वाचक पंडित रामाश्रय शुक्ल को माल्यार्पण के साथ हुआ। इस अवसर पर रमेश कुमार दुबे, जयति पाण्डेय, जितेंद्र पाण्डेय, अशोक पाण्डेय,अनिल पाण्डेय, प्रधान शिव बालक यादव ,राजेन्द्र सिंह मौजूद थे।
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पत्नी के आग्रह पर श्रीकृष्ण के पास पहुंच गए सुदामा
बरईपार। क्षेत्र के कटका गांव में चल रहे सात दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा ज्ञान यज्ञ के छठे दिन स्वामी नारायण वाचस्पति महाराज ने कृष्ण और सुदामा मित्रता का वर्णन किया। उन्होंने कहा कि सुदामा एक गरीब ब्राह्मण थे लेकिन भगवान कृष्ण का अनन्य मित्र और भक्त थे। पत्नी ने सुदामा को उनके मित्र की याद दिलाई जो द्वारका के राजा थे। सुदामा ने कहा श्रीकृष्ण पराक्रमी राजा हैं, मैं गरीब ब्राह्मण। कैसे उनके पास जाकर सहायता मांग सकता हूं। पत्नी ने कहा कि मित्रता में भेद नहीं होता वह सहायता करेंगे। सुदामा श्रीकृष्ण के पास जाने तो पत्नी पड़ोसियों से चावल मांगकर ले आई तथा सुदामा को वे चावल अपने मित्र को भेंट करने के लिए दे दिए। भगवान ने उन्हीं चावलों को खाकर सुदामा को राजा बना दिया। आयोजक श्री प्रकाश मिश्र ने लोगों का आभार व्यक्त किया। इस अवसर पर जय प्रकाश मिश्र, मार्कण्डेय पांडेय, पप्पू पांडेय, मुंन्ना विश्वकर्मा अंकुर मिश्र आदि मौजूद रहे।
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