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जश्ने ग़ौसुलवरा में मनकबत व पेश किए नातिया कलाम
Updated Tue, 09 Jan 2018 01:33 AM IST
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खेतासराय। नगर के मदरसा अहलेसुन्नत एजाजुल उलूम के तलबा की जानिब से बीती रात जश्ने ग़ौसुलवरा की महफ़िल सजाई गई। महफ़िल में शायरों ने मनकबत व नातिया कलाम के नजऱाने पेश किए। वही उलमा ने ग़ौसुल आजम के हयाते पाक और उनकी तालीम पर रोशनी डाली । महफ़िल का आगाज कारी इमरान साहिब ने तिलावत कुरान पाक से किया। जलसे को खिताब करते हुए मौलाना मुजहिदुल हक़ ने कहा कि आज के दौर में ग़ौसे पाक की तालिम बेहद अहम है। तलबा को चाहिए कि उनकी तालीमात की रोशनी में अपनी जिंदगी बसर करे।
मौलाना हक़ ने कहा कि शरीयत की पाबंदी के बग़ैर कोई शख्स अल्लाह का वली नहीं हो सकता। ग़ौसे पाक पैदाइशी वली के साथ आले रसूल भी थे। जबलपुर से आए मौलाना डा. रूहूल अमीन ने कहा कि इस्लाम कि शरियत 1400 साल पुरानी है। हमारे रसूल मोहम्मद साहिब ने अपनी उम्मत को सच्चाई और ने की का रास्ता दिखाया। रसूल अकरम के पर्दा फरमाने के बाद ग़ौसुल आजम अब्दुल कादिर जिलानी ने उनके रूहानी फ़ैज से इल्म और इंसानियत का डंका बजाया। डा. अमीन ने कहा कि आज का विज्ञान जिस फायदे को बता रहा है वो हमारे रसूल और सहाबा की सुन्नत में 1400 साल पहले से मौजूद है। महफिल में मौलाना मंजऱ दिनरपुरी, सद्दाम प्रतापगढी, मौलाना हामिद रजा जौनपुरी ने हजूर ग़ौसुल आजम की शान में मनकबत के नजऱाने पेश किए। जलसे की सदारत कारी जलालुद्दीन बरकाती व संचालन हाफिज आलमगीर ने की ।
इस मौके पर मुख्य रूप से मदरसे के नाजिम सय्यद ताहिर हाफिज शफ़ीक़ कारी मेराज मौलाना इंतेख़ाब सुहैल बरकाती हाफिज अजमल सरफराज आदि मौजूद रहे।
मौलाना हक़ ने कहा कि शरीयत की पाबंदी के बग़ैर कोई शख्स अल्लाह का वली नहीं हो सकता। ग़ौसे पाक पैदाइशी वली के साथ आले रसूल भी थे। जबलपुर से आए मौलाना डा. रूहूल अमीन ने कहा कि इस्लाम कि शरियत 1400 साल पुरानी है। हमारे रसूल मोहम्मद साहिब ने अपनी उम्मत को सच्चाई और ने की का रास्ता दिखाया। रसूल अकरम के पर्दा फरमाने के बाद ग़ौसुल आजम अब्दुल कादिर जिलानी ने उनके रूहानी फ़ैज से इल्म और इंसानियत का डंका बजाया। डा. अमीन ने कहा कि आज का विज्ञान जिस फायदे को बता रहा है वो हमारे रसूल और सहाबा की सुन्नत में 1400 साल पहले से मौजूद है। महफिल में मौलाना मंजऱ दिनरपुरी, सद्दाम प्रतापगढी, मौलाना हामिद रजा जौनपुरी ने हजूर ग़ौसुल आजम की शान में मनकबत के नजऱाने पेश किए। जलसे की सदारत कारी जलालुद्दीन बरकाती व संचालन हाफिज आलमगीर ने की ।
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इस मौके पर मुख्य रूप से मदरसे के नाजिम सय्यद ताहिर हाफिज शफ़ीक़ कारी मेराज मौलाना इंतेख़ाब सुहैल बरकाती हाफिज अजमल सरफराज आदि मौजूद रहे।