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चैत चुपके से सुन, टपक रहा महुआ है...
Updated Tue, 02 Jan 2018 12:57 AM IST
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जौनपुर। कोशिश संस्था की ओर से सोमवार को टीडी कालेज परिसर में आयोजित कवि सम्मेलन में कवियों ने नए साल पर रस की बारिश की। अपनी रचनाओं से लोगों की खूब वाहवाही और तालियां बटोरीं।
कार्यक्रम का शुभारंभ प्रबंधक अशोक कुमार सिंह व प्राचार्य डा.विनोद कुमार सिंह ने मां सरस्वती की प्रतिमा पर मार्ल्यापण व दी प्रज्ज्वलित कर किया। डा.शिव त्रिपाठी ने सरस्वती वंदना कर सम्मेलन का आगाज किया। कुंवर सिंह ने ‘नित्य पूजा भजन द्वारा होता रहे, फिर भी तन-मन शिवाला हुआ नहीं’ सुनाकर वातावरण को आध्यात्मिक किया तो जनार्दन अस्थाना ने ‘चैत चुपके से सुन, टपक रहा महुआ है चुपके से चुन’ सुनाकर रसवर्षा की। जमुना प्रसाद उपाध्याय ने ‘पोस्टर में सबसे आगे आप की तस्वीर है’ सुनाकर राजनीत के मुखौटे को तार-तार किया। गीता श्रीवास्तव ने ‘आने जाने लगी जिंदगी मेरे घर, जब से तुम मेरे घर आने जाने लगे’ गजल पर खूब तालियां बजी। वाहिद अली वाहिद ने ‘अच्छे दिन का यह मतलब है, चेहरे पर मुस्कान रहे’ शेर सुनाकर खूब वाहवाही बटोरी। गिरीश ने ‘मेरी कोशिश है कि बुझते चराग जल जाए’ शेर खूब पसंद ािकया गया। गीतकार डा. अशोक कुमार सिंह ने ‘खुशबू आए तो किस तरह आए चंदन की गाछ यहां कौन लगाएं’ गीत सुनाकर सामाजिक ताने बाने को आईना दिखाया। अंत में प्रेम जौनपुरी, गीता श्रीवास्तव व आसिफ को दुष्यंत कुमार सम्मान, प्रखर को काका हाथरसी सम्मान, गिरीश कुमार, अशोक मिश्र, सुरेंद्र यादव को उत्कृष्ठ सहकर्मी सम्मान, डा. अरुण कुमार सिंह, डा. एमपी सिंह, डा. डीआर सिंह को आजीवन उपलब्धि सम्मान प्रदान किया गया है। संचालन प्रोफेसर अनूप बशिष्ठ व संयोजन प्रोफेसर आरएन तिवारी ने किया।
कार्यक्रम का शुभारंभ प्रबंधक अशोक कुमार सिंह व प्राचार्य डा.विनोद कुमार सिंह ने मां सरस्वती की प्रतिमा पर मार्ल्यापण व दी प्रज्ज्वलित कर किया। डा.शिव त्रिपाठी ने सरस्वती वंदना कर सम्मेलन का आगाज किया। कुंवर सिंह ने ‘नित्य पूजा भजन द्वारा होता रहे, फिर भी तन-मन शिवाला हुआ नहीं’ सुनाकर वातावरण को आध्यात्मिक किया तो जनार्दन अस्थाना ने ‘चैत चुपके से सुन, टपक रहा महुआ है चुपके से चुन’ सुनाकर रसवर्षा की। जमुना प्रसाद उपाध्याय ने ‘पोस्टर में सबसे आगे आप की तस्वीर है’ सुनाकर राजनीत के मुखौटे को तार-तार किया। गीता श्रीवास्तव ने ‘आने जाने लगी जिंदगी मेरे घर, जब से तुम मेरे घर आने जाने लगे’ गजल पर खूब तालियां बजी। वाहिद अली वाहिद ने ‘अच्छे दिन का यह मतलब है, चेहरे पर मुस्कान रहे’ शेर सुनाकर खूब वाहवाही बटोरी। गिरीश ने ‘मेरी कोशिश है कि बुझते चराग जल जाए’ शेर खूब पसंद ािकया गया। गीतकार डा. अशोक कुमार सिंह ने ‘खुशबू आए तो किस तरह आए चंदन की गाछ यहां कौन लगाएं’ गीत सुनाकर सामाजिक ताने बाने को आईना दिखाया। अंत में प्रेम जौनपुरी, गीता श्रीवास्तव व आसिफ को दुष्यंत कुमार सम्मान, प्रखर को काका हाथरसी सम्मान, गिरीश कुमार, अशोक मिश्र, सुरेंद्र यादव को उत्कृष्ठ सहकर्मी सम्मान, डा. अरुण कुमार सिंह, डा. एमपी सिंह, डा. डीआर सिंह को आजीवन उपलब्धि सम्मान प्रदान किया गया है। संचालन प्रोफेसर अनूप बशिष्ठ व संयोजन प्रोफेसर आरएन तिवारी ने किया।
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