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जीनोम फाउण्डेशन करता है डीएनए आधारित निदान
Updated Tue, 12 Dec 2017 12:53 AM IST
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सिकरारा। कलवारी गाँव में डॉ. लालजी सिंह ने वर्ष 2004 में जीनोम फाउंडेशन प्रयोगशाला की स्थापना की। इस प्रयोगशाला में डीएनए सिक्वेंसिंग के अलावा मधुमेह, न्यूरो डीजेनरेशन, एल्जाइमर पार्किन्सन जैसी बीमारियों के निदान की स्वास्थ्य सम्बन्धी परीक्षण सुविधाएं उपलब्ध हैं।जिले व आसपास के मधुमेह पीड़ित, किडनी फेल्योर हृदयाघात ब्रेन स्ट्रोक सम्बन्धी 22 हजार लोगों के रक्त सेंपल लेकर जांच की जा रही है। आगे आधुनिक आण्विक नैदानिक केंद्र की भी स्थापना की योजना है। इस फाउंडेशन के माध्यम से भविष्य में दो परियोजनाओं पर कार्य किया जाएगा। इसमें कुपोषण जनित रोगों का अध्ययन तथा मधुमेह रोगियों पर शोध और अध्ययन शामिल है। कई परिवारों में पीढ़ी दर पीढ़ी विकलांग बच्चे पैदा हो रहे हैं जिसे सुदूर ग्रामीण अंचलों में दैवी आपदा समझकर उनके हाल पर छोड़ दिया जाता है। इस प्रयोगशाला में इस समस्या पर भी अध्ययन होगा। देश के एक अरब लोगों से न्यूनतम एक रूपये का सहयोग लेकर आम नागरिकों को प्रयोगशाला का सदस्य बनाया जा रहा है। इस दिशा में काफी काम हो चुका है। प्रयोगशाला में एक जूनियर साइंटिस्ट, तीन डीबीटी पैथालॉजिस्ट कार्यरत हैं। जिनका वेतन हैदराबाद स्थित मुख्य केंद्र से दिया जाता है। कलवारी में स्थापित केंद्र देश का पहला ग्रामीण केंद्र है जो सीधे सेटलाइट से मुख्य केंद्र से जुड़ा है। समय-समय पर विशेषज्ञ चिकित्सकों की सेवाएं भी ली जाती हैं। एक 100 बेड के अस्पताल की योजना भी बनाई गई थी जिस पर काम होना है।
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