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मानवाधिकार हनन रोकने हेतु मानव सोच बदलना जरुरी
Updated Sun, 10 Dec 2017 11:44 PM IST
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मानवाधिकार दिवस पर शहर में निकाली गई रैली
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जौनपुर। मानवाधिकार का हनन तभी रुकेगा जब मानव सोच में बदलाव आए। मानव के बीच परस्पर किया जाने वाला नकारात्मक व्यवहार ही मानवाधिकार हनन को बढ़ावा देता है। ये बातें जन विकास संस्थान के निदेशक राजमणि ने रविवार को जन विकास संस्थान नौपेड़वा और आक्सफाम इंडिया लखनऊ की ओर से अंतर्राष्ट्रीय मानवाधिकार दिवस पर वाजिदपुर से गांधी तिराहा तक निकाली गई जन जागरूकता रैली तथा मानव श्रृंखला कार्यक्रम में कहीं।
उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में निर्धनता, बालश्रम, बाल अपराध, बाल विवाह, भ्रूण हत्या, दहेज अपराध, मानव तस्करी आदि अनगिनत ऐसे मुद्दे हैं जिनसे यह साबित होता है कि 10 दिसंबर 1948 को घोषित सार्वभौमिक घोषणापत्र आज तक जमीनी स्तर पर लागू नहीं हो पाया है। सामाजिक कार्यकर्ता कंचन ने कहा कि भारत सहित अधिकांश देशों में प्राय: महिलाओं के मानवाधिकार हनन के मामले प्रमुखता से सामने आते हैं। भारत में लिंग भेद इतना जबरदस्त है कि सरकार को बेटी बचाओ अभियान चलना पड़ रहा है। महिलाओं के साथ घेरेलू हिंसा की घटनाएं बढ़ रही हैं। इसे रोकने के लिए सिर्फ कानून ही काफी नहीं है। इसके लिए समाज व सरकार के साथ पीड़ित को भी स्वयं के अंदर आत्म विश्वास के बढ़ाकर नेतृत्व की भूमिका में आना होगा। इस अवसर पर निसार अहमद, महाजन अली, शिवप्रकाश, किरन दूबे, प्रियंका यादव व अमृतलाल आदि उपस्थित रहे।
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उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में निर्धनता, बालश्रम, बाल अपराध, बाल विवाह, भ्रूण हत्या, दहेज अपराध, मानव तस्करी आदि अनगिनत ऐसे मुद्दे हैं जिनसे यह साबित होता है कि 10 दिसंबर 1948 को घोषित सार्वभौमिक घोषणापत्र आज तक जमीनी स्तर पर लागू नहीं हो पाया है। सामाजिक कार्यकर्ता कंचन ने कहा कि भारत सहित अधिकांश देशों में प्राय: महिलाओं के मानवाधिकार हनन के मामले प्रमुखता से सामने आते हैं। भारत में लिंग भेद इतना जबरदस्त है कि सरकार को बेटी बचाओ अभियान चलना पड़ रहा है। महिलाओं के साथ घेरेलू हिंसा की घटनाएं बढ़ रही हैं। इसे रोकने के लिए सिर्फ कानून ही काफी नहीं है। इसके लिए समाज व सरकार के साथ पीड़ित को भी स्वयं के अंदर आत्म विश्वास के बढ़ाकर नेतृत्व की भूमिका में आना होगा। इस अवसर पर निसार अहमद, महाजन अली, शिवप्रकाश, किरन दूबे, प्रियंका यादव व अमृतलाल आदि उपस्थित रहे।
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