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आयी जहरा की सदां, या हुसैन अलविदा
Updated Wed, 29 Nov 2017 12:13 AM IST
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जौनपुर में आयोजित मजलिस में शामिल लोग
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जौनपुर। नगर में इमामे हसन अस्करी की शहादत के मौके पर अय्यामे अजा के आखिरी दिन मंगलवार को मजलिसों के बाद शबीहे ताबूत, अलम, जुलजनाह व ऊंटों पर रखी अमारियों का जुलूस निकाला गया।
इस मौके पर मोहल्ला ख्वाजा दोस्त पोस्तीखाना में इमामबाड़ा गुलाम अब्बास पर मजलिस हुई। मजलिस के बाद अंजुमन मजलूमिया के नेतृत्व में जुलूस निकाला गया। जुलूस अपने कदीमी रास्तों से होता हुआ इनाम अली खां के आवास के पास पहुंचा जहां पर तकरीर हुई। इसके बाद अलम, तुर्बत व जुलजनाह बरामद हुआ। जुलूस आगे कदीम रास्तों से होता हुआ सिपाह पहुंचा जहां डा. कमर अब्बास ने तकरीर कर इमामे हसन असकरी के शहादत पर प्रकाश डाला। इस मौके पर डा. हाजी सैय्यद कमर अब्बास ने कहा कि इस्लाम अमन व शांति का मजहब है। इस मजहब के रहबर को रहमतुल लिल आलमीन कहा जाता है क्योंकि वह पूरे आलम के लिए रहमत बनकर दुनियां में तशरीफ लाए। इसलिए उनके मानने वालों की यह नैतिक जिम्मेदारी बनती है कि वे एक दूसरे के लिए जहमत न बने और अमन कायम रखें। तकरीर के बाद शबीहे जुलजनाह और ताजिया, अलम बरामद हुआ। नगर की तमाम अंजुमनों ने नौहा व मातम किया। जुलूस अपने कदीमी रास्ते से होते हुए सिपाह स्थित नबी साहब के रौजे पर पहुंचकर समाप्त हुआ। इसी क्रम में सिपाह मोहल्ला में इमामबाड़ा से भी जुलूसे आमारी निकाला गया। जिसमें अंजुमनों ने नौहा मातम कर करबला के शहीदों को खिराजे अकीदत पेश की। जुलूस अपने कदीम रास्ते से होते हुए नबी साहब इमाम बारगाह पहुंचा जहां ताजिया को सुपुर्दे खाक किया गया।
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इस मौके पर मोहल्ला ख्वाजा दोस्त पोस्तीखाना में इमामबाड़ा गुलाम अब्बास पर मजलिस हुई। मजलिस के बाद अंजुमन मजलूमिया के नेतृत्व में जुलूस निकाला गया। जुलूस अपने कदीमी रास्तों से होता हुआ इनाम अली खां के आवास के पास पहुंचा जहां पर तकरीर हुई। इसके बाद अलम, तुर्बत व जुलजनाह बरामद हुआ। जुलूस आगे कदीम रास्तों से होता हुआ सिपाह पहुंचा जहां डा. कमर अब्बास ने तकरीर कर इमामे हसन असकरी के शहादत पर प्रकाश डाला। इस मौके पर डा. हाजी सैय्यद कमर अब्बास ने कहा कि इस्लाम अमन व शांति का मजहब है। इस मजहब के रहबर को रहमतुल लिल आलमीन कहा जाता है क्योंकि वह पूरे आलम के लिए रहमत बनकर दुनियां में तशरीफ लाए। इसलिए उनके मानने वालों की यह नैतिक जिम्मेदारी बनती है कि वे एक दूसरे के लिए जहमत न बने और अमन कायम रखें। तकरीर के बाद शबीहे जुलजनाह और ताजिया, अलम बरामद हुआ। नगर की तमाम अंजुमनों ने नौहा व मातम किया। जुलूस अपने कदीमी रास्ते से होते हुए सिपाह स्थित नबी साहब के रौजे पर पहुंचकर समाप्त हुआ। इसी क्रम में सिपाह मोहल्ला में इमामबाड़ा से भी जुलूसे आमारी निकाला गया। जिसमें अंजुमनों ने नौहा मातम कर करबला के शहीदों को खिराजे अकीदत पेश की। जुलूस अपने कदीम रास्ते से होते हुए नबी साहब इमाम बारगाह पहुंचा जहां ताजिया को सुपुर्दे खाक किया गया।
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