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महिलाओं ने चलनी से किया अपने चांद का दीदार
Updated Mon, 09 Oct 2017 12:30 AM IST
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करवाचौथ पर पूजन करती व्रती महिलाएं।
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जौनपुर। करवाचौथ पर बड़ी संख्या में सुहागिन महिलाओं ने रविवार को निराजल व्रत धारण किया। पूजन अर्चन के बाद करवाचौथ की कथा सुनी और शिव, पार्वती, गणेश की पूजा करने के साथ ही चंद्रमा का अर्घ्य दिया। इस दौरान व्रती महिलाओं ने अखंड सौभाग्य और पति के दीर्घायु की कामना की। भोर में ही स्नान कर व्रत का संकल्प ले लिया था। शाम को महिलाओं ने शिव मंदिरों में जाकर दर्शन पूजन किया। रात में पूजन के बाद चंद्रमा को अर्घ्य दिया और चलनी से पति का दीदार किया।
पंडित मुरारी श्याम का कहना है कि करवाचौथ नारी के त्याग और समर्पण का पर्व है। भारतीय नारी के शीतला, सहजता, त्याग महानता को व्यक्त करने वाला पर्व है। पं. टीपी त्रिपाठी का कहना है कि दिनभर स्वयं भूखी प्यासी रहकर रात में जब वर मांगने का अवसर होता है तो अपने पति देव की सुखमय, मंगलमय और दीर्घायु की याचना करना यह नारी के त्याग व समर्पण भाव को व्यक्त करता है। उन्होंने कहा कि कई वर्षों बाद ऐसा संयोग बना है जिसमें पूजन से महिलाओं की मनोकामनाएं पूरी होंगी। उन्होंने बताया कि करवाचौथ व्रत को वाली महिलाओं ने शिव-पार्वती, गणेश और चंद्रमा का पूजन किया। शाम को महिलाओं ने पूजा के बाद तांबे या मिट्टी के करवे में उड़द की दाल, चावल, सुहाग की सामग्री दान किया। सास का पांव छूकर सुहाग की सामग्री उन्हें भेंट की। डा. शैलेष कुमार मोदनवाल का कहना है कि अखंड सौभाग्य के लिए सुहागिन महिलाओं ने व्रत धारण किया और सुख समृद्धि व पति के लंबी उम्र की कामना की।
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पंडित मुरारी श्याम का कहना है कि करवाचौथ नारी के त्याग और समर्पण का पर्व है। भारतीय नारी के शीतला, सहजता, त्याग महानता को व्यक्त करने वाला पर्व है। पं. टीपी त्रिपाठी का कहना है कि दिनभर स्वयं भूखी प्यासी रहकर रात में जब वर मांगने का अवसर होता है तो अपने पति देव की सुखमय, मंगलमय और दीर्घायु की याचना करना यह नारी के त्याग व समर्पण भाव को व्यक्त करता है। उन्होंने कहा कि कई वर्षों बाद ऐसा संयोग बना है जिसमें पूजन से महिलाओं की मनोकामनाएं पूरी होंगी। उन्होंने बताया कि करवाचौथ व्रत को वाली महिलाओं ने शिव-पार्वती, गणेश और चंद्रमा का पूजन किया। शाम को महिलाओं ने पूजा के बाद तांबे या मिट्टी के करवे में उड़द की दाल, चावल, सुहाग की सामग्री दान किया। सास का पांव छूकर सुहाग की सामग्री उन्हें भेंट की। डा. शैलेष कुमार मोदनवाल का कहना है कि अखंड सौभाग्य के लिए सुहागिन महिलाओं ने व्रत धारण किया और सुख समृद्धि व पति के लंबी उम्र की कामना की।
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