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बारिश बनी धान की फसल के संजीवनी,किसानों के खिले चहरे
Updated Sat, 16 Sep 2017 12:47 AM IST
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जौनपुर। शुक्रवार को हुई झमाझम बारिश धान की फसल के लिए संजीवनी का काम किया। फसल सुखने की चिंता सता रही किसानों के चेहरे भी खिले उठे। लोगों को उमस भरी गर्मी से भी राहत मिली। लेकिन बारिश नगर पालिका की पोल भी खोल दी।
किसान लो बोल्टेज आने व नहरों में पानी नहीं आने से धान सहित अन्य फसलों की सिंचाई नहीं कर पा रहे थे। फसलें सिंचाई के अभाव में सूख रही थी। जिसको लेकर किसान के माथे पर चिंता की लकीरें खिच गई थी। वहीं उमस भरी गर्मी से भी परेशान थे। लेकिन शुक्रवार को पूर्वाह्न 11 बजे से लेकर लगभग एक बजे तक झमाझम बारिश हुई। बारिश होने के बाद तो मानों किसानों को मुह मांगी मुराद मिल गई। सूख रही धान सहित अन्य फसलों के लिए भी बारिश बरदान साबित हुई। लोगों को उमस भरी गर्मी से राहत मिली। वहीं बारिश से शहरवासियों को दिक्कत का सामना करना पड़ा। नालियां जाम होने के कारण बारिश का पानी मोहल्लों में ही जमा हो रहा था। जिससे मोहल्लेवासियों को परेशानी का सामना करना पड़ा। सड़कों की पटरियों खोदकर व नालियों को तोड़ कर छोड़ देने के कारण बारिश का पानी सड़कों पर भर गया था। जिससे आवागमन करने में लोगों को दिक्कत हुई। वहीं सड़कों पर बने गड्ढ़ो में पानी भरने के कारण लोग गिरकर चुटहिल होने की संभावना बनी हुई थी। इस दौरान लोग वाहनों को संभलकर चला रहे थे।
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किसान लो बोल्टेज आने व नहरों में पानी नहीं आने से धान सहित अन्य फसलों की सिंचाई नहीं कर पा रहे थे। फसलें सिंचाई के अभाव में सूख रही थी। जिसको लेकर किसान के माथे पर चिंता की लकीरें खिच गई थी। वहीं उमस भरी गर्मी से भी परेशान थे। लेकिन शुक्रवार को पूर्वाह्न 11 बजे से लेकर लगभग एक बजे तक झमाझम बारिश हुई। बारिश होने के बाद तो मानों किसानों को मुह मांगी मुराद मिल गई। सूख रही धान सहित अन्य फसलों के लिए भी बारिश बरदान साबित हुई। लोगों को उमस भरी गर्मी से राहत मिली। वहीं बारिश से शहरवासियों को दिक्कत का सामना करना पड़ा। नालियां जाम होने के कारण बारिश का पानी मोहल्लों में ही जमा हो रहा था। जिससे मोहल्लेवासियों को परेशानी का सामना करना पड़ा। सड़कों की पटरियों खोदकर व नालियों को तोड़ कर छोड़ देने के कारण बारिश का पानी सड़कों पर भर गया था। जिससे आवागमन करने में लोगों को दिक्कत हुई। वहीं सड़कों पर बने गड्ढ़ो में पानी भरने के कारण लोग गिरकर चुटहिल होने की संभावना बनी हुई थी। इस दौरान लोग वाहनों को संभलकर चला रहे थे।
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