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ग्राम पंचायत के खाते में जाती है धनराशि
Updated Mon, 04 Sep 2017 12:15 AM IST
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जौनपुर। स्वच्छ भारत ग्रामीण मिशन के तहत गांवों को खुले में शौचमुक्त (ओडीएफ) बनाने में शौचालय निर्माण के लिए लाभार्थियों को धनराशि नहीं दिया जाना बाधक सिद्ध हो रहा है। शौचालय निर्माण के लिए अभी अपेक्षित बजट नहीं आया है। इसकी धनराशि प्रधान और सचिव के खाते में भेजने के कारण जो धन आया उसे ग्राम प्रधान व सचिवों ने अपने चहेतों को उपलब्ध करा दिया। अभी तक 8268 लाभार्थियों को धनराशि मिली है जबकि 8832 लोग शौचालय की प्रोत्साहन राशि के लिए प्रधान, सेक्रेटरी व विभाग का चक्कर काट रहे हैं। स्थिति यह है कि जिले में 17 हजार शौचालय बनाए गए हैं। यही वजह है कि 437 गांवों को ओडीएफ बनाने का लक्ष्य है लेकिन अभी तक महज 75 गांव ही ओडीएफ हो पाए हैं।
स्वच्छ भारत ग्रामीण मिशन के तहत सरकार का उद्देश्य घर-घर शौचालय बनवाकर गांव को खुले में शौच मुक्त बनाना है। इसके तहत शौचालय बनवाने वाले लोगों को प्रोत्साहन धनराशि दी जा रही है। यह धनराशि सीधे लाभार्थी को न देकर धनराशि ग्राम प्रधान व सचिव के संयुक्त खाते में दी जाती है। ग्राम प्रधान व सचिव ही यह धनराशि को लाभार्थी देते हैं। गांवोें से शिकायत मिल रही है कि कुछ गांवों के ग्राम प्रधान व सचिव अपने चहेते लाभार्थी को प्राथमिकता के आधार पर धनराशि दे देते हैं। जिनके संबंध इनसे नहीं हैं, उन लाभार्थियों को धनराशि के लिए भटकना पड़ रहा है। उधर, विभागीय स्तर पर गांवों में युवकों की टीम बनाई गई है। इस टीम को सीटी व टार्च दिया गया है। टीम के युवक खुले में शौच करने से लोगों को रोकते हैं और उन्हें शौचालय बनवाने के लिए जागरूक करते हैं। इसके एवज में उनको पारिश्रमिक भी दिया जाता है। दूसरी तरफ बजट की कमी के चलते सभी लाभार्थियों को शौचालय के लिए प्रोत्साहन राशि नहीं दी जा सकी है। चालू वित्तीय वर्ष में कुल एक लाख शौचालय बनवाने का लक्ष्य है लेकिन 17 हजार शौचालय बन पाए हैं। इन बने शौचालयों में से मात्र 8268 लाभार्थियों को ही प्रोत्साहन राशि मिली है। सरकार प्रति शौचालय 12 हजार रुपये देती है। डीपीआरओ रामआशीष चौधरी ने कहा कि ग्राम प्रधान व सचिव के संयुक्त खाते में शौचालय की धनराशि भेजी जाती है। वे शौचालय बनवाने वालों को धनराशि देेते हैं। धनराशि देने में गड़बड़ी का कोई मामला सामने नहीं आया है। अगर ऐसा मामला आया तो संबंधित के विरुद्ध कार्रवाई की जाएगी।
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स्वच्छ भारत ग्रामीण मिशन के तहत सरकार का उद्देश्य घर-घर शौचालय बनवाकर गांव को खुले में शौच मुक्त बनाना है। इसके तहत शौचालय बनवाने वाले लोगों को प्रोत्साहन धनराशि दी जा रही है। यह धनराशि सीधे लाभार्थी को न देकर धनराशि ग्राम प्रधान व सचिव के संयुक्त खाते में दी जाती है। ग्राम प्रधान व सचिव ही यह धनराशि को लाभार्थी देते हैं। गांवोें से शिकायत मिल रही है कि कुछ गांवों के ग्राम प्रधान व सचिव अपने चहेते लाभार्थी को प्राथमिकता के आधार पर धनराशि दे देते हैं। जिनके संबंध इनसे नहीं हैं, उन लाभार्थियों को धनराशि के लिए भटकना पड़ रहा है। उधर, विभागीय स्तर पर गांवों में युवकों की टीम बनाई गई है। इस टीम को सीटी व टार्च दिया गया है। टीम के युवक खुले में शौच करने से लोगों को रोकते हैं और उन्हें शौचालय बनवाने के लिए जागरूक करते हैं। इसके एवज में उनको पारिश्रमिक भी दिया जाता है। दूसरी तरफ बजट की कमी के चलते सभी लाभार्थियों को शौचालय के लिए प्रोत्साहन राशि नहीं दी जा सकी है। चालू वित्तीय वर्ष में कुल एक लाख शौचालय बनवाने का लक्ष्य है लेकिन 17 हजार शौचालय बन पाए हैं। इन बने शौचालयों में से मात्र 8268 लाभार्थियों को ही प्रोत्साहन राशि मिली है। सरकार प्रति शौचालय 12 हजार रुपये देती है। डीपीआरओ रामआशीष चौधरी ने कहा कि ग्राम प्रधान व सचिव के संयुक्त खाते में शौचालय की धनराशि भेजी जाती है। वे शौचालय बनवाने वालों को धनराशि देेते हैं। धनराशि देने में गड़बड़ी का कोई मामला सामने नहीं आया है। अगर ऐसा मामला आया तो संबंधित के विरुद्ध कार्रवाई की जाएगी।
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