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पति को पांच वर्ष का सश्रम कारावास
Updated Sat, 02 Sep 2017 12:32 AM IST
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जौनपुर। पवारा थाना क्षेत्र के हिम्मतपुर गांव में तीन वर्ष पूर्व दहेज की मांग न पूरी होने पर पत्नी को आत्महत्या के लिए मजबूर करने के मामले में आरोपी पति को अदालत ने दोषी करार दिया है। शुक्रवार को फास्ट ट्रैक कोर्ट प्रथम के जज बलराज सिंह ने खुले न्यायालय में पति को पांच वर्ष का सश्रम कारावास और छह हजार रुपये अर्थ दंड की सजा सुनाई।
अभियोजन के अनुसार इलाहाबाद जिले के होलागढ़ थाना क्षेत्र के देवराज का पूरा गांव निवासी धीरेंद्र बहादुर सिंह ने पवारा थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई थी कि उनकी बहन रूबी सिंह की शादी 5 मई 2007 को पवारा थाना क्षेत्र के हिम्मतपुर गांव निवासी आशीष सिंह पुत्र शमशेर बहादुर के साथ हुई थी। अपनी हैसियत के मुताबिक दान दहेज दिया था। लड़की विदा होकर ससुराल गई तो उसके पति आशीष सिंह व सास सुमित्रा सिंह दहेज में दो लाख रुपये की मांग को लेकर उसे प्रताड़ित करने लगे। बहन को मारने पीटने लगे। मांग पूरी ना होने पर 31 मई 2014 की सुबह सात बजे उसे मारकर फांसी पर लटका दिया गया। पुलिस ने मामले की विवेचना पूरी करके आरोपपत्र कोर्ट में दाखिल किया। अभियोजन पक्ष से जिला शासकीय अधिवक्ता राकेश कुमार यादव व एसएमयूके हसन सिद्दीकी ने कुल छह गवाह कोर्ट में परीक्षित कराए। न्यायाधीश ने दोनों पक्षों की बहस एवं तर्कों को सुनने एवं पत्रावली पर उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर पति आशीष सिंह को दोषी करार देते हुए सजा सुनाई। आरोपी सास को संदेह का लाभ देते हुए बरी कर दिया गया।
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अभियोजन के अनुसार इलाहाबाद जिले के होलागढ़ थाना क्षेत्र के देवराज का पूरा गांव निवासी धीरेंद्र बहादुर सिंह ने पवारा थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई थी कि उनकी बहन रूबी सिंह की शादी 5 मई 2007 को पवारा थाना क्षेत्र के हिम्मतपुर गांव निवासी आशीष सिंह पुत्र शमशेर बहादुर के साथ हुई थी। अपनी हैसियत के मुताबिक दान दहेज दिया था। लड़की विदा होकर ससुराल गई तो उसके पति आशीष सिंह व सास सुमित्रा सिंह दहेज में दो लाख रुपये की मांग को लेकर उसे प्रताड़ित करने लगे। बहन को मारने पीटने लगे। मांग पूरी ना होने पर 31 मई 2014 की सुबह सात बजे उसे मारकर फांसी पर लटका दिया गया। पुलिस ने मामले की विवेचना पूरी करके आरोपपत्र कोर्ट में दाखिल किया। अभियोजन पक्ष से जिला शासकीय अधिवक्ता राकेश कुमार यादव व एसएमयूके हसन सिद्दीकी ने कुल छह गवाह कोर्ट में परीक्षित कराए। न्यायाधीश ने दोनों पक्षों की बहस एवं तर्कों को सुनने एवं पत्रावली पर उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर पति आशीष सिंह को दोषी करार देते हुए सजा सुनाई। आरोपी सास को संदेह का लाभ देते हुए बरी कर दिया गया।
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