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मरीजों का रेफर सेंटर बनकर रह गया है सीएचसी
Updated Sat, 26 Aug 2017 12:47 AM IST
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जौनपुर। मछलीशहर प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र मरीजों का रेफर सेंटर बनकर रह गया है। यहां कहने को तो आधुनिक तकनीक से युक्त मशीनें हैं। लेकिन उन पर धूल जमा हो गया है। यहां मरीजों के भर्ती होते ही उन्हें कभी बेड का अभाव तो कभी स्थिति चिंताजनक बताकर रेफर कर दिया जाता है।
मछलीशहर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में करोड़ों रुपये खर्च करके भवन एवं जांच के लिए मशीनों की व्यवस्था सरकार द्वारा की गई हैं। तहसील स्तर पर ही सभी तरह के इलाज की सुविधा उपलब्ध कराने के उद्देश्य से आधुनिक तकनीक से युक्त मशीनें स्थापित किया है। लेकिन डाक्टर के अभाव में हजारों की लागत से आयी मशीन धूल फांक रही है। साथ ही महिला चिकित्सक, सर्जन ,रेडियोलॉजिस्ट, एनेस्थीसिया, दंत चिकित्सक ,नेत्र चिकित्सक, और बाल रोग विशेषज्ञ के अभाव में इलाज के लिए लोगों को भटकना पड़ रहा है। अस्पताल में टीकाकरण, प्रसव कराने के अलावा घायल और गंभीर बीमारी से ग्रसित व्यक्ति को रेफर करने की सुविधा उपलब्ध है। रेडियोलॉजिस्ट भी नही है। टेक्नीशियन से ही एक्सरे का कार्य करवाया जाता है। दांत के मरीजों का इलाज करने हेतु हजारों रुपये की लागत से मशीन खरीदी गई किंतु दंत चिकित्सक ही नहीं है।
आपरेशन थियेटर में आवश्यक उपकरण तो है मगर सर्जन तैनाती होने के बाद से ही मेडिकल पर है। विभागीय सूत्रों की माने तो वे नौकरी छोड़ने का मन बना चुके है। इधर 20 वर्षों की जद्दोजहद के बाद तैनात महिला चिकित्सक को यहां से हटाकर जिला मुख्यालय पर तैनात कर दिया गया अब पुन: बीमारी से जूझ रही महिलाओं के इलाज को लेकर लोग परेशान है। अस्पताल में बालरोग विशेषज्ञ की भी तैनाती नही है। कुल मिलाकर करोड़ों रुपये खर्च करके स्थापित सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में डाक्टरों की तैनाती न हो पाने के कारण यहां इलाज की खानापूर्ति ही होती है । केवल महिलाओं को प्रसव, बच्चों और गर्भवती महिलाओं का टीकाकरण का कार्य ही होता है । घायल मरीज या गंभीर रोग से ग्रसित मरीज को रेफर कर दिया जाता है।
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मछलीशहर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में करोड़ों रुपये खर्च करके भवन एवं जांच के लिए मशीनों की व्यवस्था सरकार द्वारा की गई हैं। तहसील स्तर पर ही सभी तरह के इलाज की सुविधा उपलब्ध कराने के उद्देश्य से आधुनिक तकनीक से युक्त मशीनें स्थापित किया है। लेकिन डाक्टर के अभाव में हजारों की लागत से आयी मशीन धूल फांक रही है। साथ ही महिला चिकित्सक, सर्जन ,रेडियोलॉजिस्ट, एनेस्थीसिया, दंत चिकित्सक ,नेत्र चिकित्सक, और बाल रोग विशेषज्ञ के अभाव में इलाज के लिए लोगों को भटकना पड़ रहा है। अस्पताल में टीकाकरण, प्रसव कराने के अलावा घायल और गंभीर बीमारी से ग्रसित व्यक्ति को रेफर करने की सुविधा उपलब्ध है। रेडियोलॉजिस्ट भी नही है। टेक्नीशियन से ही एक्सरे का कार्य करवाया जाता है। दांत के मरीजों का इलाज करने हेतु हजारों रुपये की लागत से मशीन खरीदी गई किंतु दंत चिकित्सक ही नहीं है।
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आपरेशन थियेटर में आवश्यक उपकरण तो है मगर सर्जन तैनाती होने के बाद से ही मेडिकल पर है। विभागीय सूत्रों की माने तो वे नौकरी छोड़ने का मन बना चुके है। इधर 20 वर्षों की जद्दोजहद के बाद तैनात महिला चिकित्सक को यहां से हटाकर जिला मुख्यालय पर तैनात कर दिया गया अब पुन: बीमारी से जूझ रही महिलाओं के इलाज को लेकर लोग परेशान है। अस्पताल में बालरोग विशेषज्ञ की भी तैनाती नही है। कुल मिलाकर करोड़ों रुपये खर्च करके स्थापित सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में डाक्टरों की तैनाती न हो पाने के कारण यहां इलाज की खानापूर्ति ही होती है । केवल महिलाओं को प्रसव, बच्चों और गर्भवती महिलाओं का टीकाकरण का कार्य ही होता है । घायल मरीज या गंभीर रोग से ग्रसित मरीज को रेफर कर दिया जाता है।
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