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Jaunpur News: अमृत सरोवरों पर 15 करोड़ खर्च, कागजों पर लबालब पानी, मौके पर मिलीं दरारें

Mon, 23 Jun 2025 11:59 PM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Mon, 23 Jun 2025 11:59 PM IST
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15 crores spent on Amrit Sarovars, water overflowing on paper, cracks found on the spot
केराकत। अमृत सरोवर योजना तहसील के डोभी, केराकत, जलालपुर व मुफ्तीगंज ब्लाॅक में दम तोड़ती नजर आ रही है। चार ब्लॉकों को अमृत सरोवरों के लिए 15 करोड़ से अधिक का बजट जारी किया गया, लेकिन जमीनी स्तर पर स्थिति बेहद निराशाजनक है। पड़ताल में सामने आया है कि कागजों पर सभी तालाबों में लबालब पानी दिखाया गया जबकि हकीकत में अधिकतर सरोवरों में सूखने के कारण दरारें पड़ रही हैं। वहीं अधूरे सरोवरों को भी फाइलों में पूरा दिखा दिया गया है।
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डोभी विकासखंड के अवहदपुर गांव में 35 लाख रुपये की लागत से अमृत सरोवर तालाब का निर्माण कराया गया था । तालाब पूरी तरह सूखा है। ग्रामीणों ने इसे सरकार का मजाक बताते हुए आरोप लगाया कि यह योजना धन के बंदरबाँट का जरिया बनकर रह गई है। कोइलारी, पनिहर, भीमपुर, ब्राह्मणपुर जैसे गांवों में भी अमृत सरोवरों की स्थिति दयनीय है। डोभी ब्लॉक के लगभग 20 सरोवरों में से सिर्फ 1-2 आंशिक रूप से उपयोगी हैं। अब तक इस योजना पर करीब 3.05 करोड़ रुपये खर्च हो चुके हैं।
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मुफ़्तीगंज विकासखंड में भी अमृत सरोवर योजना का हाल निराशाजनक है। यहां योजना के तहत 40 तालाबों के निर्माण के लिए करीब 3-4 करोड़ रुपये की राशि जारी की गई। पड़ताल में सामने आया कि 34 तालाब कागजों पर बनकर तैयार दिखाए गए, जबकि वास्तविक रूप से चार-पांच को छोड़ सभी अधूरे, सूखे या अनुपयोगी हैं। 6 तालाब आज भी आबादी विवाद के कारण अधर में हैं। मुफ्तीगंज ब्लाॅक के मुरकी, एकौनी, बगथरी, उमरी जैसे गांवों में बने तालाबों की स्थिति बस एक खाली गड्ढे जैसी है न सीढ़ियां बनीं, न घाट, न पौधारोपण, और न ही सोलर लाइट जैसी मूलभूत सुविधाएं।
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केराकत ब्लॉक में 30 तालाबों के निर्माण के लिए करीब 3 करोड़ रुपये खर्च हो चुके हैं। इनमें से 23 तालाबों को फाइलों में पूरा दिखाया गया है, जबकि पड़ताल में जमीनी हकीकत कुछ और ही निकली। सेनापुर, पूरनपुर, तरियारी, शिवरामपुर, डेहरी सहित अन्य गांवों में तालाबों की स्थिति अधूरी और सूखी पाई गई। कई गांवों के ग्राम प्रधानों ने जिम्मेदारी अधिकारियों पर डाली और बताया कि बजट तो आया, लेकिन काम अधूरा, पानी नहीं, और सौंदर्यीकरण का नामोनिशान नहीं। डेहरी गांव के प्रधान ने बताया कि तालाब में पानी न होने की मुख्य वजह बीते आठ महीनों से ट्रांसफॉर्मर का जलना है, जिससे पंपिंग ही नहीं हो पाई।
जलालपुर विकासखंड में भी हालात कुछ बेहतर नहीं हैं। यहां 32 तालाबों के निर्माण के लिए लगभग 3 करोड़ रुपये की धनराशि खर्च की गई है, लेकिन अब भी 10 तालाब अधूरे हैं और काम जारी है। लगभग सभी तालाब सूखे हैं। कोई घाट नहीं, कोई पौधारोपण नहीं, और सामुदायिक उपयोग शून्य।
नागिरकों ने उठाए सवाल-ग्रामीणों डोभी के अवहनपुर निवासी मनोज कुमार, पनियर के संतोष सिंह, डेहरी के इकबाल, एकौनी के संजय यादव में नाराज़गी और गुस्सा साफ है। उन्होंने बजट पारदर्शिता, निर्माण की गुणवत्ता और निगरानी प्रणाली पर सवाल उठाए हैं। इस योजना की वास्तविकता एक बार फिर यह सोचने पर मजबूर कर रही है कि क्या सरकार की योजनाएं धरातल तक पहुंच रही हैं, या फिर वे कागज़ों और कमीशनखोरी के दलदल में दम तोड़ रही हैं।

जितने भी अमृत सरोवर तालाब हैं इसमें जिम्मेदारों को निर्देशित किया गया है। जल स्रोत में नहर व शासकीय ट्यूबेल की मदद लेकर पानी भरें। किसी को लगता है कि अमृत सरोवर के धन का बंदरबांट हुआ है तो लिखित शिकायत प्रार्थनापत्र दें। इसकी जांच कर आवश्यक कार्रवाई की जाएगी। - सुशील कुमार त्रिपाठी, डीसी मनरेगा।
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