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कथा सुनकर भक्ति में लीन हो गई रुक्मिणी
Updated Mon, 03 Jul 2017 12:27 AM IST
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कथा सुनकर भक्ति में लीन हो गई रुक्मिणी
बरसठी। सरसरा गांव में श्री नारायण पांडेय के निवास पर चल रहे सात दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा के अंतिम दिन व्यास कपिलमुनि ने रुक्मिणी और भगवान श्रीकृष्ण के विवाह की कथा का वर्णन किया। उन्होंने बताया कि राजाभिष्मक की पुत्री रुक्मिणी को भगवान नारद ने भागवत कथा सुनाई तो रुक्मिणी को भगवान श्री कृष्ण से प्रेम हो गया। उसी समय उन्होंने श्रीकृष्ण से विवाह करने की प्रतिज्ञा कर ली। मन ही मन उन्हें अपना पति मान लिया। लेकिन रुक्मिणी के भाई रुक्मबाहु व अन्य ने अपने बहन की शादी शिशुपाल से निश्चित कर दिया। जब यह बात रुक्मिणी को पता चला तो उन्होंने अपने ब्राह्मण द्वारा श्रीकृष्ण को पत्र लिखकर भेजा। उन्होंने भगवान को पत्र में लिखा कि आपकी कथा सुनकर मुझे आपसे प्रेम हो गया है। आपसे ही विवाह करना चाहती हूं। लेकिन मेरे भाई मेरी शादी अन्यत्र करना चाहते है। मैं आपको मन से पति मान लिया है। अब शादी करुंगी तो आपसे ही, नही तो अपने प्राण त्याग दूंगी। पत्र पढ़ श्रीकृष्ण तुरन्त चल दिए और वहां पहुंचकर रुक्मिणी को अपने साथ रथ पर बैठाए रुक्मिणी ने रथ को अपने हाथ में लिया और श्री कृष्ण से कहा कि आप सैनिकों का संहार कर मेरी रक्षा करे। श्रीकृष्ण रुक्मिणी के साथ द्वारिका पहुंच कर उनसे शादी की। विवाह के बाद रुक्मिणी श्रीकृष्ण की झांकी भी सजाई गई थी। जिसे उपस्थित भक्तो ने दर्शन किया। इसके बाद व्यास ने सुदामा चरित्र का भी वर्णन भी विस्तार से किया। कथा में अजय पांडेय, ब्रह्मदेव तिवारी शिवकुमार पांडेय, विनोद तिवारी, केपी मिश्रा, विजय मिश्रा, पप्पू ,संतोष कुमार, पंकज, विवेक कुमार सहित सैकड़ों लोग मौजूद रहे।
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बरसठी। सरसरा गांव में श्री नारायण पांडेय के निवास पर चल रहे सात दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा के अंतिम दिन व्यास कपिलमुनि ने रुक्मिणी और भगवान श्रीकृष्ण के विवाह की कथा का वर्णन किया। उन्होंने बताया कि राजाभिष्मक की पुत्री रुक्मिणी को भगवान नारद ने भागवत कथा सुनाई तो रुक्मिणी को भगवान श्री कृष्ण से प्रेम हो गया। उसी समय उन्होंने श्रीकृष्ण से विवाह करने की प्रतिज्ञा कर ली। मन ही मन उन्हें अपना पति मान लिया। लेकिन रुक्मिणी के भाई रुक्मबाहु व अन्य ने अपने बहन की शादी शिशुपाल से निश्चित कर दिया। जब यह बात रुक्मिणी को पता चला तो उन्होंने अपने ब्राह्मण द्वारा श्रीकृष्ण को पत्र लिखकर भेजा। उन्होंने भगवान को पत्र में लिखा कि आपकी कथा सुनकर मुझे आपसे प्रेम हो गया है। आपसे ही विवाह करना चाहती हूं। लेकिन मेरे भाई मेरी शादी अन्यत्र करना चाहते है। मैं आपको मन से पति मान लिया है। अब शादी करुंगी तो आपसे ही, नही तो अपने प्राण त्याग दूंगी। पत्र पढ़ श्रीकृष्ण तुरन्त चल दिए और वहां पहुंचकर रुक्मिणी को अपने साथ रथ पर बैठाए रुक्मिणी ने रथ को अपने हाथ में लिया और श्री कृष्ण से कहा कि आप सैनिकों का संहार कर मेरी रक्षा करे। श्रीकृष्ण रुक्मिणी के साथ द्वारिका पहुंच कर उनसे शादी की। विवाह के बाद रुक्मिणी श्रीकृष्ण की झांकी भी सजाई गई थी। जिसे उपस्थित भक्तो ने दर्शन किया। इसके बाद व्यास ने सुदामा चरित्र का भी वर्णन भी विस्तार से किया। कथा में अजय पांडेय, ब्रह्मदेव तिवारी शिवकुमार पांडेय, विनोद तिवारी, केपी मिश्रा, विजय मिश्रा, पप्पू ,संतोष कुमार, पंकज, विवेक कुमार सहित सैकड़ों लोग मौजूद रहे।