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मानव जीवन के लिए रामकथा अमृत समान
Updated Fri, 23 Jun 2017 01:19 AM IST
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सतहरिया। कथा वाचिका चातिका वैदेहि ने कहा कि राम कथा कोई साधारण कथा नहीं जिसे सुनने के लिए कैलाश पर्वत को छोड़ कर भगवान भोले नाथ माता सती के संग धराधाम पर चले आए थे। उन्होंने कहा मानव जीवन के लिए रामकथा अमृत समान है। वह बहोरिकपुर गांव भक्तों को श्रीराम कथा का रसपान करा रही थीं।
उन्होंने कहा कि जो प्राणी कथा को भक्ति भाव, आस्था, विश्वास तथा भगवान के प्रति समर्पित होकर सुनता है वह मोक्ष प्राप्त करने योग्य हो जाता है। बड़े भाग्यशाली है वे लोग जिन्हें श्री राम कथा सुनने का सुनहला अवसर मिलता है। उन्होंने कहा मानस कथा संशय पर आधारित है। त्रित्रकट को छोड़कर तीर्थीं के राजा प्रयाग में जब भरतद्वाज महराज से संशय से भरे सवाल ऋषियों ने पूछा तो वे आश्चर्य चकित हो गये। राम जब परम पिता परात्मा तथा सामर्थ्यवान थे। तो वे रावण का वध कर चल जाते है। माता सीता की खोज में उन्हे आंसू अनावश्यक में क्यों बहाना पड़ा। और उन्हे एक लम्बे समय तक त्रेतायुग में लीला दिखाने की क्या आवश्यकता पड़ी। वही जब शंकर भोले नाथ मां पार्वती के साथ कथा श्रवण के उपरान्त लौट रहे थे तो उन्होंने देखा प्रभु श्रीराम जंगल में मां सीता की खोज में लताओं व पेड़ पौघों से लिपट कर रो रहे थे। तो उन्होंने ने उन्हें सच्चिानंद कहकर प्रणाम किया।
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उन्होंने कहा कि जो प्राणी कथा को भक्ति भाव, आस्था, विश्वास तथा भगवान के प्रति समर्पित होकर सुनता है वह मोक्ष प्राप्त करने योग्य हो जाता है। बड़े भाग्यशाली है वे लोग जिन्हें श्री राम कथा सुनने का सुनहला अवसर मिलता है। उन्होंने कहा मानस कथा संशय पर आधारित है। त्रित्रकट को छोड़कर तीर्थीं के राजा प्रयाग में जब भरतद्वाज महराज से संशय से भरे सवाल ऋषियों ने पूछा तो वे आश्चर्य चकित हो गये। राम जब परम पिता परात्मा तथा सामर्थ्यवान थे। तो वे रावण का वध कर चल जाते है। माता सीता की खोज में उन्हे आंसू अनावश्यक में क्यों बहाना पड़ा। और उन्हे एक लम्बे समय तक त्रेतायुग में लीला दिखाने की क्या आवश्यकता पड़ी। वही जब शंकर भोले नाथ मां पार्वती के साथ कथा श्रवण के उपरान्त लौट रहे थे तो उन्होंने देखा प्रभु श्रीराम जंगल में मां सीता की खोज में लताओं व पेड़ पौघों से लिपट कर रो रहे थे। तो उन्होंने ने उन्हें सच्चिानंद कहकर प्रणाम किया।
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