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प्रदूषित जल लोगों को पिला रही नगरपालिका
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जौनपुर। नगर पालिका नागरिकों को दूषित जल पिला रहीं है। पाइप पेयजल की शुरुआत 1935 में की गई थी। तब की बिछाई गई अधिकांश पाइपलाइन जर्जर हो चुकी हैं। पाइपों के जर्जर होने की वजह से पानी दूषित हो जा रहा है।
शहर में दो एमएलडी जल शोधन संयंत्र लगा है। इसके अलावा 29 नलकूप लगाए गए हैं। इसी साधन से लोगों के घरों में पानी की सप्लाई की जा रही है। करीब 83 साल पहले बिछाई गई पाइपलाइन जर्जर हो गई है और जगह-जगह से टूट गई है। पेयजल पाइपलाइन अधिकतर स्थानों पर नालियों के रास्ते ही बिछाई गई है। ऐसे में जर्जर पाइप सहारे गंदा पानी में भी लोगों के घरों तक पहुंच रहा है।
जौनपुर नगर पालिका क्षेत्र में करीब तीन लाख से अधिक की आबादी है। सात हजार घरों में पेयजल आपूर्ति के लिए बिछाई गई पाइपलाइन का कनेक्शन है। इन घरों में नगरपालिका द्वारा पेयजल के नाम प्रदूषित पानी की सप्लाई की जा रही है। आए दिन लोग नगर पालिका प्रशासन इस बात की शिकायत करते रहते हैं कि उनके घर में गंदा पानी आ रहा है। बावजूद इसके समस्या के समाधान की दिशा में कोई ठोस पहल नहीं की गई। पानी दूषित होने के कारण तमाम घरों में लोगों ने उसे पीना छोड़ दिया है। पाइप लाइन का पानी केवल कपड़े धोने और नहाने में इस्तेमाल किया जा रहा है। तमाम लोगों ने आरओ लगवाया है या वे पेयजल का केन खरीदते हैं। 20 लीटर का एक केन पानी 25 से 30 रुपये में आता है। मीरमस्त निवासी मो. ताबिश कहते हैं सप्लाई का पानी पीने लायक नहीं रह गया है। नखास मुहल्ला निवासी चंदन निषाद कहते हैं कि कई बार शिकायत के बाद भी नगर पालिका प्रशासन घरों में शुद्ध पानी की सप्लाई नहीं कर सका।
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शहर में लगेंगे 24 नए ट्यूबवेल
जौनपुर। नगर विकास राज्यमंत्री गिरीश चंद्र यादव का कहना है कि नगरवासियों को शुद्ध पेयजल आपूर्ति के लिए शीघ्र ही 24 नए ट्यूबवेल लगाए जाएंगे। इसके अलावा शहर के गंदे नालों को सीधे गोमती में गिरने से रोकने के लिए वाटर ट्रीटमेंट प्लांट लगाया जाएगा। इन नालों में 24.72 एमएलडी कचरा रोज उत्सर्जित होकर गोमती नदी में गिरता है। गोमती नदी आगे जाकर गंगा में मिलती हैं। जिससे गंगा नदी भी प्रदूषित हो रही है। अटल नवीनीकरण और शहरी रुपांतरण मिशन के तहत नगर पालिका परिषद जौनपुर सीवरेज योजना से संबंधित परियोजना की प्रस्तावित लागत 30283.44 लाख के परीक्षण के लिए पत्रावली व्यय वित्त समिति को भेज दी गई है।
शहर में दो एमएलडी जल शोधन संयंत्र लगा है। इसके अलावा 29 नलकूप लगाए गए हैं। इसी साधन से लोगों के घरों में पानी की सप्लाई की जा रही है। करीब 83 साल पहले बिछाई गई पाइपलाइन जर्जर हो गई है और जगह-जगह से टूट गई है। पेयजल पाइपलाइन अधिकतर स्थानों पर नालियों के रास्ते ही बिछाई गई है। ऐसे में जर्जर पाइप सहारे गंदा पानी में भी लोगों के घरों तक पहुंच रहा है।
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जौनपुर नगर पालिका क्षेत्र में करीब तीन लाख से अधिक की आबादी है। सात हजार घरों में पेयजल आपूर्ति के लिए बिछाई गई पाइपलाइन का कनेक्शन है। इन घरों में नगरपालिका द्वारा पेयजल के नाम प्रदूषित पानी की सप्लाई की जा रही है। आए दिन लोग नगर पालिका प्रशासन इस बात की शिकायत करते रहते हैं कि उनके घर में गंदा पानी आ रहा है। बावजूद इसके समस्या के समाधान की दिशा में कोई ठोस पहल नहीं की गई। पानी दूषित होने के कारण तमाम घरों में लोगों ने उसे पीना छोड़ दिया है। पाइप लाइन का पानी केवल कपड़े धोने और नहाने में इस्तेमाल किया जा रहा है। तमाम लोगों ने आरओ लगवाया है या वे पेयजल का केन खरीदते हैं। 20 लीटर का एक केन पानी 25 से 30 रुपये में आता है। मीरमस्त निवासी मो. ताबिश कहते हैं सप्लाई का पानी पीने लायक नहीं रह गया है। नखास मुहल्ला निवासी चंदन निषाद कहते हैं कि कई बार शिकायत के बाद भी नगर पालिका प्रशासन घरों में शुद्ध पानी की सप्लाई नहीं कर सका।
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शहर में लगेंगे 24 नए ट्यूबवेल
जौनपुर। नगर विकास राज्यमंत्री गिरीश चंद्र यादव का कहना है कि नगरवासियों को शुद्ध पेयजल आपूर्ति के लिए शीघ्र ही 24 नए ट्यूबवेल लगाए जाएंगे। इसके अलावा शहर के गंदे नालों को सीधे गोमती में गिरने से रोकने के लिए वाटर ट्रीटमेंट प्लांट लगाया जाएगा। इन नालों में 24.72 एमएलडी कचरा रोज उत्सर्जित होकर गोमती नदी में गिरता है। गोमती नदी आगे जाकर गंगा में मिलती हैं। जिससे गंगा नदी भी प्रदूषित हो रही है। अटल नवीनीकरण और शहरी रुपांतरण मिशन के तहत नगर पालिका परिषद जौनपुर सीवरेज योजना से संबंधित परियोजना की प्रस्तावित लागत 30283.44 लाख के परीक्षण के लिए पत्रावली व्यय वित्त समिति को भेज दी गई है।