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बारिश से 10 फीसदी खरीफ की फसलों की हुई है क्षति

Sun, 06 Oct 2019 12:09 AM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Sun, 06 Oct 2019 12:09 AM IST
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10% kharif crops have been damaged due to rain
जौनपुर। पिछले दस दिनों में हुई भारी बारिश से खेती को काफी नुकसान पहुंचा है। खरीफ की करीब 10 फीसदी फसल खराब हो गई। सबसे अधिक नुकसान तिलहन व दलहनी फसलों को हुआ है। जबकि धान की फसल के लिए पानी फायदेमंद रहा। ज्यादा नुकसान तटीय इलाकों की ही फसलों को हुआ है। जिले में 2,21,868 हेक्टेयर खेत में खरीफ की फसल बोई गई है।
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जिले में दो लाख 22 हजार 851 हेक्टेयर में खरीफ की फसल बोने का लक्ष्य था। जिसमें से दो लाख 21 हजार 864 हेक्टेयर में खरीफ खेती की गई। इसमें एक लाख 47 हजार 239 हेक्टेयर में धान रोप गया जबकि मक्का 48748 हेक्टेयर में, ज्वार 3964 हेक्टेयर, बाजरा 6341 हेक्टेयर में, उर्द 7612 हेक्टेयर में, मूंग49 हेक्टेयर में, अरहर 7981हेक्टेयर में, तिल 723 हेक्टेयर में और मूंगफली 202 हेक्टेयर में बोई गई। बीते दस दिनों में हुई भारी बारिश और नदियों में उफान से दलहनी व तिलहनी फसल को काफी नुकसान हुआ है। तटीय इलाकों की पूरी फसल डूब गई। इससे अरहर, तिल, मूंग, उर्द को सबसे अधिक नुकसान हुई हैं। कृषि विभाग के मुताबिक कुल 10 फीसदी फसल की क्षति हुई है।
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बारिश के कारण 10 फीसदी फसल को नुकसान पहुंचा है। तटीय इलाकों में बोई गई फसल अधिक प्रभावित हुई है। तिलहनी व दलहनी फसलों को सबसे अधिक नुकसान हुआ है। हालांकि इसका आंकलन राजस्व विभाग की ओर से किया जाएगा।
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अमित कुमार चौबे
जिला कृषि अधिकारी
पीएम फसल बीमा के तहत दी जाती है क्षतिपूर्ति
जौनपुर। उप कृषि निदेशक जय प्रकाश ने बताया कि जिन किसानों की फसल बाढ़, ओलावृष्टि, चक्रवात या बिजली गिरने से खराब होती है। उन्हें प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना से क्षतिपूर्ति देने की व्यवस्था है। इसके लिए किसान को बीमा कंपनी के टोल फ्री नंबर पर सूचना देंगे। इसके बाद बीमा कंपनी, कृषि विभाग व राजस्व विभाग की टीमें मौके पर जाकर क्षति का आंकलन करेंगी हैं। इनकी रिपोर्ट के आधार पर फसल की क्षतिपूर्ति दी जाएगी। साथ ही ऐसी ग्राम पंचायत के किसान जिनकी उत्पादकता कम आती है। उन्हें बीमा कंपनी द्वारा सात वर्ष की क्राप कटिंग करने के पश्चात जो उत्पादकता का अंतर होता है। उसकी क्षतिपूर्ति बीमा कंपनी किसानों के बैंक खाते में देती है। गैर ऋणी व केसीसी धारक किसान पात्र होते हैं।
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