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घरों में ही हुई भगवान परशुराम की पूजा अर्चना
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कोंच। कोरोना संक्रमण के चलते विप्र समाज के लोगों ने अपने घरों में ही भगवान परशुराम का प्राकट्योत्सव मनाया। पिछले साल भी देशव्यापी लॉकडाउन के चलते परशुराम जयंती पर आयोजन नहीं हुए थे और लोगों को घरों में ही भगवान परशुराम का पूजन-अर्चन करना पड़ा था।
ब्राह्मण महासभा और सनाढ्य सभा आदि संगठनों ने अलग-अलग प्राकट्योत्सव कार्यक्रम आयोजित किए। इनमें गिने-चुने चार-पांच लोग ही मौजूद रहे। लोगों ने भगवान परशुराम की आरती उतारी। गोखले नगर स्थित ब्राह्मण महासभा परिसर के परशुराम मंदिर में महासभा के महामंत्री अनुरुद्ध मिश्रा के निर्देशन में भगवान परशुराम का अभिषेक किया गया और हवन भी हुआ।
विप्र जनों ने भगवान परशुराम की स्तुति की। इस मौके पर महासभा के संस्थापक सदस्य राजेंद्र भारद्वाज, पंकजाचरण बाजपेयी, अरुण दुबे, शिवांग बाजपेयी, पुजारी राजाभैया आदि ने आरती उतारी। उधर, रामकुंड कॉलोनी स्थित सनाढ्य सभा भवन में सभा के अध्यक्ष मनोज दूरवार ने भगवान परशुराम के चित्र पर पूजन-अर्चन कर अनुष्ठान संपन्न कराए।
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खेतों में की पूजा, गुड्डा और गुड़िया का कराया विवाह
कोंच। अक्षय तृतीया का पर्व आंचलिक संस्कृति में भी गहरे से रचा बसा है। बुंदेली संस्कृति में अक्षय तृतीया को अक्ति रूप में मनाने की परंपरा है।
बुंदेली बालाएं इस दिन गुड्डा और गुड़िया, जिन्हें स्थानीय बोलचाल की भाषा में पुतरा पुतरिया कहते हैं, का विवाह कराती हैं।
इसके साथ ही किसान परिवारों में इस पर्व का खास महत्व है। अक्षय तृतीय के दिन ही खेतों की हल से जुताई करके खेती किसानी की शुरुआत हो जाती है। शादी विवाह के लिए भी यह बहुत ही शुभ मुहूर्त माना जाता है। विद्वानों का मत है कि आज के मुहूर्त का शोधन करने की जरूरत नहीं होती है।
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ब्राह्मण महासभा और सनाढ्य सभा आदि संगठनों ने अलग-अलग प्राकट्योत्सव कार्यक्रम आयोजित किए। इनमें गिने-चुने चार-पांच लोग ही मौजूद रहे। लोगों ने भगवान परशुराम की आरती उतारी। गोखले नगर स्थित ब्राह्मण महासभा परिसर के परशुराम मंदिर में महासभा के महामंत्री अनुरुद्ध मिश्रा के निर्देशन में भगवान परशुराम का अभिषेक किया गया और हवन भी हुआ।
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विप्र जनों ने भगवान परशुराम की स्तुति की। इस मौके पर महासभा के संस्थापक सदस्य राजेंद्र भारद्वाज, पंकजाचरण बाजपेयी, अरुण दुबे, शिवांग बाजपेयी, पुजारी राजाभैया आदि ने आरती उतारी। उधर, रामकुंड कॉलोनी स्थित सनाढ्य सभा भवन में सभा के अध्यक्ष मनोज दूरवार ने भगवान परशुराम के चित्र पर पूजन-अर्चन कर अनुष्ठान संपन्न कराए।
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खेतों में की पूजा, गुड्डा और गुड़िया का कराया विवाह
कोंच। अक्षय तृतीया का पर्व आंचलिक संस्कृति में भी गहरे से रचा बसा है। बुंदेली संस्कृति में अक्षय तृतीया को अक्ति रूप में मनाने की परंपरा है।
बुंदेली बालाएं इस दिन गुड्डा और गुड़िया, जिन्हें स्थानीय बोलचाल की भाषा में पुतरा पुतरिया कहते हैं, का विवाह कराती हैं।
इसके साथ ही किसान परिवारों में इस पर्व का खास महत्व है। अक्षय तृतीय के दिन ही खेतों की हल से जुताई करके खेती किसानी की शुरुआत हो जाती है। शादी विवाह के लिए भी यह बहुत ही शुभ मुहूर्त माना जाता है। विद्वानों का मत है कि आज के मुहूर्त का शोधन करने की जरूरत नहीं होती है।