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जॉबकार्ड में फर्जीवाड़ा कर निकाल रहे रुपये
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जॉबकार्ड में फर्जीवाड़ा कर निकाले रहे रुपये
कोंच। मनरेगा में काम करने वाले ग्रामीण की मानें तो गांव में नाले की साफ-सफाई के लिए छह हजार का ठेका देकर सिर्फ चार मजदूरों से पूरा करा दिया गया जबकि मास्टर रोल में देखा जाए तो हेरफेर है।
ग्राम दिरावटी निवासी देवेंद्र कौशिक पुत्र माधव स्वरूप ने आज रविवार को एसडीएम अशोक कुमार को प्रार्थना पत्र देकर बताया कि गांव में जॉबकार्ड के नाम पर लंबे समय से धांधली हो रही है जिसमें बाहरी लोगों के जॉबकार्ड बनाकर सरकारी धन की लूटखसोट की जा रही है। देवेंद्र ने जॉबकार्ड के फर्जीवाड़े में प्रधान, सचिव, पंचायत मित्र, जेई, कोटेदार सभी की मिलीभगत होने का आरोप लगाते हुए जांच कर कार्रवाई किए जाने की मांग की है। उसने बताया कि अभिलेखों को खंगाला जाए तो मजदूरों के आधार कार्डों में कई बार पता बदला गया है। आरोप है कि शैलेंद्र सहित कई और ऐसे व्यक्ति हैं, जो दूसरे गांव के रहने वाले हैं और यह कभी काम करने नहीं आते है जबकि धनराशि प्रधान और सचिव द्वारा बराबर निकाली जा रही है। जब इस बाबत पर हमने मनरेगा अधिकारी अवधेश कुमार दीक्षित को इस मामले पर बात की तो उन्होंने बताया कि मामला संज्ञान में है और खंड विकास अधिकारी को मौके पर भेजकर जांच को आदेशित किया गया है और जो भी इस बंदरबांट में दोषी होगा उसके खिलाफ कार्रवाई कर सरकारी धन की वसूली की जाएगी। वहीं ग्रामीण ने प्रार्थना पत्र की प्रति मुख्यमंत्री, प्रमुख सचिव, मंडलायुक्त, जिलाधिकारी, सीडीओ, डीडीओ आदि को भी प्रेषित की है।
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कोंच। मनरेगा में काम करने वाले ग्रामीण की मानें तो गांव में नाले की साफ-सफाई के लिए छह हजार का ठेका देकर सिर्फ चार मजदूरों से पूरा करा दिया गया जबकि मास्टर रोल में देखा जाए तो हेरफेर है।
ग्राम दिरावटी निवासी देवेंद्र कौशिक पुत्र माधव स्वरूप ने आज रविवार को एसडीएम अशोक कुमार को प्रार्थना पत्र देकर बताया कि गांव में जॉबकार्ड के नाम पर लंबे समय से धांधली हो रही है जिसमें बाहरी लोगों के जॉबकार्ड बनाकर सरकारी धन की लूटखसोट की जा रही है। देवेंद्र ने जॉबकार्ड के फर्जीवाड़े में प्रधान, सचिव, पंचायत मित्र, जेई, कोटेदार सभी की मिलीभगत होने का आरोप लगाते हुए जांच कर कार्रवाई किए जाने की मांग की है। उसने बताया कि अभिलेखों को खंगाला जाए तो मजदूरों के आधार कार्डों में कई बार पता बदला गया है। आरोप है कि शैलेंद्र सहित कई और ऐसे व्यक्ति हैं, जो दूसरे गांव के रहने वाले हैं और यह कभी काम करने नहीं आते है जबकि धनराशि प्रधान और सचिव द्वारा बराबर निकाली जा रही है। जब इस बाबत पर हमने मनरेगा अधिकारी अवधेश कुमार दीक्षित को इस मामले पर बात की तो उन्होंने बताया कि मामला संज्ञान में है और खंड विकास अधिकारी को मौके पर भेजकर जांच को आदेशित किया गया है और जो भी इस बंदरबांट में दोषी होगा उसके खिलाफ कार्रवाई कर सरकारी धन की वसूली की जाएगी। वहीं ग्रामीण ने प्रार्थना पत्र की प्रति मुख्यमंत्री, प्रमुख सचिव, मंडलायुक्त, जिलाधिकारी, सीडीओ, डीडीओ आदि को भी प्रेषित की है।
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