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Jalaun News: दो किलोमीटर सड़क, तीन महीने और चार मौतें
Mon, 25 Dec 2023 11:52 PM IST
कानपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, जालौन
संवाद न्यूज एजेंसी, जालौन
Updated Mon, 25 Dec 2023 11:52 PM IST
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उरई। दो किलोमीटर सड़क..., तीन महीने... और चार मौतें। यह कहानी है कालपी तहसील के ग्राम पंचायत मंगरौल से जुड़े वसानताल मजरे की। मजरे के परिवारों को जब संकट आता है तो मात्र 1.8 किलोमीटर लंबाई की यह सड़क उन्हें मातम में डाल देती है।
नवलपुरा से वसानताल मजरे को जाने वाली यह सड़क का कभी निर्माण ही नहीं हुआ। पूरी सड़क कच्ची है। दोनों साइडों पर खेत हैं। सिंचाई के दौरान सड़क पर पानी भर जाता है और दलदलनुमा होने की वजह से वाहन उस पर नहीं चल पाते हैं। बारिश के दौरान तो यह सड़क बंबानुमा हो जाती है। यही कारण है कि एंबुलेंस नवलपुरा तक पहुंच जाती है और उसके आगे बढ़ने से कतराने लगती है। इलाज में देरी होती है और फिर ये घटनाएं मजरे के लोगों को अपनी किस्मत कोसने को मजबूर कर देती है। सितंबर से नवंबर अंतिम दिवस तक चार मौतें इसी वजह से हुईं, इसमें तीन की तो दुनिया में आने से पहले ही आंखें बंद हो गईं, जबकि एक किशोरी को समय पर इलाज नहीं मिल पाया और परिवार ने उस बच्ची को खो दिया।
केस-1
फोटो 16 - सुनीता
30 नवंबर को इसी मजरे के निवासी सुनील की पत्नी अंजलि प्रसव पीड़ा हुई। परिवार की ही सुनीता ने बताया कि एंबुलेंस के लिए डायल किया था। लेकिन बारिश होने की वजह से सड़क भर गई थी। एंबुलेंस ने गांव तक आने से मना कर दिया। उसके बाद ट्रैक्टर से अंजलि को लेकर गए, लेकिन गर्भ में ही बच्चे की सांसे रुक गईं।
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केस-2
फोटो 14- राजेश गौतम
10 अक्तूबर को इसी मजरे के निवासी रामू की पत्नी अंशु देवी को प्रसव पीड़ा हुई। राजेश गौतम ने बताया कि पीड़ित परिवार ने एंबुलेंस के लिए कॉल की। एंबुलेंस आई भी, लेकिन नवलपुरा पहुंचने के बाद उन्होंने वहां तक गर्भवती को लेकर आने को कहा। बताया कि सड़क खराब है, अंदर नहीं आ सकते। किसी तरह एंबुलेंस तक पहुंचे, लेकिन देर हो गई और बच्चा गर्भ में ही मृत हो गया।
केस-3
फोटो 13 - लल्लन सिंह
छह अक्तूबर को इसी मजरे के रहने वाले लल्लन सिंह की पुत्री प्रीती को प्रसव पीड़ा हुई। लल्लन सिंह ने बताया कि एंबुलेंस को कॉल की। लेकिन सड़क खराब होने की बात कहते हुए एंबुलेंस मजरे तक नहीं पहुंची। इस वजह से बच्चा गर्भ में ही खत्म हो गया।
केस-4
फोटो 15 - सोवरन
15 सितंबर को इसी मजरे के रहने वाले छोटे की 16 वर्षीय बेटी सृष्टि को सांप ने डस लिया था। बीडीसी सोवरन ने बताया कि परिवार के लोगों ने एंबुलेंस को कॉल की। लेकिन, वह कच्ची सड़क की वजह से समय पर नहीं पहुंच पाई। इससे उसकी बेटी की मौत हो गई।
क्यों कतराते हैं एंबुलेंस चालक
नवलपुरा से बसानताल मजरे तक करीब 1.8 किलोमीटर की सड़क है। लोक निर्माण विभाग की यह सड़क कभी बनी ही नहीं। इस वजह से यह पूरी कच्ची है। खेतों के बीच से यह मार्ग बना है। सिंचाई के दौरान इस सड़क पर पानी आ जाता है। बारिश के दौरान यह सड़क बंबा का रूप ले लेती है। इस वजह से इस सड़क पर वाहन नहीं चल पाते हैं।
दूसरा मार्ग भी, लेकिन वहां वन विभाग का पेंच
जोल्हूपुर मोड़ से महेवा के लिए जाने वाले मार्ग पर बसानताल मजरे को जाने वाला मार्ग लिंक है। इस मजरे तक पहुंचने के लिए सोहरापुर व इमिलिया मार्ग पड़ता है। करीब डेढ़ किलोमीटर की यह सड़क आधी बनी है। 600 से 700 मीटर तक सड़क की जगह वन विभाग होने के कारण इस मार्ग का डामरीकरण नहीं हो सका। इस वजह से इस मार्ग से भी एंबुलेंस चालक आनाकानी करते हैं। वन विभाग के डीएफओ जेपीएन तिवारी ने बताया कि कभी भी उस जगह पर सड़क बनाने के लिए पीडब्ल्यूडी ने जगह नहीं मांगी। पीडब्ल्यूडी की ओर से कोई पत्र नहीं मिला।
फोटो 17 - मुन्नी
बीमार हो जाए तो अस्पताल कैसे जाएं
हमाए मजरे में कौनू ध्यान नहीं देता...। बीमार पड़ जाएं तो कैसे अस्पताल जाएं। कौनउ एंबुलेंस वाला गांव तक नहीं आता। गांव में कई बच्चों, महिलाओं और बुजुर्गों को तड़पते देखा है। सड़क कच्ची है, इस वजह से एंबुलेंस नहीं पहुंच पाती। समय पर इलाज नहीं मिलता है तो उनकी मौत हो जाती है।
ग्रामीण सड़कों के लिए योजनाएं
- बुंदेलखंड विकास निधि की ओर से
- जिला योजना के माध्यम से
- राज्य सड़क निधि के माध्यम से
- क्रिटिकल गैप्स योजना
- त्वरित आर्थिक विकास योजना
- ग्राम प्रधान स्तर से मनरेगा, राज्य वित्तीय योजना, प्रधान निधि आदि।
1.75 करोड़ में डामरीकरण और 25 लाख रुपये तक में तैयार होगी इंटरलॉकिंग
पीडब्ल्यूडी के सहायक अभियंता ब्रजकिशोर की माने तो करीब पौने दो किलोमीटर से ज्यादा लंबाई की इस सड़क के डामरीकरण में 1.75 करोड़ के खर्च का अनुमान है। प्रधान के अनुसार यदि इस सड़क पर इंटरलॉकिंग सड़क बनाई जाए तो करीब 25 लाख रुपये तक खर्च आएगा। 250 की आबादी वाले मजरों के संपर्क मार्क लोक निर्माण विभाग की ओर से बनाए जाते हैं। इस प्रकार के लगभग सभी संपर्क मार्ग बन चुके हैं। बसानताल मजरे की आबादी ऑन रिकार्ड इस मानक को पूरा नहीं करती होगी, इसलिए यह सड़क पीडब्ल्यूडी ने नहीं बनाई है। लिंक मार्ग पर वन विभाग की जगह है तो वहां का छूटा रास्ता उसी विभाग के स्तर या सहयोग से बन सकता है।
फोटो 19 - माया देवी, प्रधान
यह सड़क लोक निर्माण विभाग के अधीन है। जलभराव की वजह से कच्ची सड़क पर अक्सर पानी भर जाता है। मसानताल मजरे के लोगों को एंबुलेंस की सुविधा ठीक से नहीं मिल पाती है।
- माया देवी, प्रधान, मंगरौल, तहसील कालपी
फोटो 18 - विनोद चतुर्वेदी, विधायक
विधायक निधि से दो किलोमीटर की सड़क नहीं बनाई जा सकती है। विधानसभा के माध्यम से सरकार को अवगत करा सकते हैं। सड़क का निर्माण सरकार को ही कराना है। सड़क की वजह से लोगों की मौत होना बेहद दुखद है।
- विनोद चतुर्वेदी, विधायक, कालपी
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नवलपुरा से वसानताल मजरे को जाने वाली यह सड़क का कभी निर्माण ही नहीं हुआ। पूरी सड़क कच्ची है। दोनों साइडों पर खेत हैं। सिंचाई के दौरान सड़क पर पानी भर जाता है और दलदलनुमा होने की वजह से वाहन उस पर नहीं चल पाते हैं। बारिश के दौरान तो यह सड़क बंबानुमा हो जाती है। यही कारण है कि एंबुलेंस नवलपुरा तक पहुंच जाती है और उसके आगे बढ़ने से कतराने लगती है। इलाज में देरी होती है और फिर ये घटनाएं मजरे के लोगों को अपनी किस्मत कोसने को मजबूर कर देती है। सितंबर से नवंबर अंतिम दिवस तक चार मौतें इसी वजह से हुईं, इसमें तीन की तो दुनिया में आने से पहले ही आंखें बंद हो गईं, जबकि एक किशोरी को समय पर इलाज नहीं मिल पाया और परिवार ने उस बच्ची को खो दिया।
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फोटो 16 - सुनीता
30 नवंबर को इसी मजरे के निवासी सुनील की पत्नी अंजलि प्रसव पीड़ा हुई। परिवार की ही सुनीता ने बताया कि एंबुलेंस के लिए डायल किया था। लेकिन बारिश होने की वजह से सड़क भर गई थी। एंबुलेंस ने गांव तक आने से मना कर दिया। उसके बाद ट्रैक्टर से अंजलि को लेकर गए, लेकिन गर्भ में ही बच्चे की सांसे रुक गईं।
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फोटो 14- राजेश गौतम
10 अक्तूबर को इसी मजरे के निवासी रामू की पत्नी अंशु देवी को प्रसव पीड़ा हुई। राजेश गौतम ने बताया कि पीड़ित परिवार ने एंबुलेंस के लिए कॉल की। एंबुलेंस आई भी, लेकिन नवलपुरा पहुंचने के बाद उन्होंने वहां तक गर्भवती को लेकर आने को कहा। बताया कि सड़क खराब है, अंदर नहीं आ सकते। किसी तरह एंबुलेंस तक पहुंचे, लेकिन देर हो गई और बच्चा गर्भ में ही मृत हो गया।
केस-3
फोटो 13 - लल्लन सिंह
छह अक्तूबर को इसी मजरे के रहने वाले लल्लन सिंह की पुत्री प्रीती को प्रसव पीड़ा हुई। लल्लन सिंह ने बताया कि एंबुलेंस को कॉल की। लेकिन सड़क खराब होने की बात कहते हुए एंबुलेंस मजरे तक नहीं पहुंची। इस वजह से बच्चा गर्भ में ही खत्म हो गया।
केस-4
फोटो 15 - सोवरन
15 सितंबर को इसी मजरे के रहने वाले छोटे की 16 वर्षीय बेटी सृष्टि को सांप ने डस लिया था। बीडीसी सोवरन ने बताया कि परिवार के लोगों ने एंबुलेंस को कॉल की। लेकिन, वह कच्ची सड़क की वजह से समय पर नहीं पहुंच पाई। इससे उसकी बेटी की मौत हो गई।
क्यों कतराते हैं एंबुलेंस चालक
नवलपुरा से बसानताल मजरे तक करीब 1.8 किलोमीटर की सड़क है। लोक निर्माण विभाग की यह सड़क कभी बनी ही नहीं। इस वजह से यह पूरी कच्ची है। खेतों के बीच से यह मार्ग बना है। सिंचाई के दौरान इस सड़क पर पानी आ जाता है। बारिश के दौरान यह सड़क बंबा का रूप ले लेती है। इस वजह से इस सड़क पर वाहन नहीं चल पाते हैं।
दूसरा मार्ग भी, लेकिन वहां वन विभाग का पेंच
जोल्हूपुर मोड़ से महेवा के लिए जाने वाले मार्ग पर बसानताल मजरे को जाने वाला मार्ग लिंक है। इस मजरे तक पहुंचने के लिए सोहरापुर व इमिलिया मार्ग पड़ता है। करीब डेढ़ किलोमीटर की यह सड़क आधी बनी है। 600 से 700 मीटर तक सड़क की जगह वन विभाग होने के कारण इस मार्ग का डामरीकरण नहीं हो सका। इस वजह से इस मार्ग से भी एंबुलेंस चालक आनाकानी करते हैं। वन विभाग के डीएफओ जेपीएन तिवारी ने बताया कि कभी भी उस जगह पर सड़क बनाने के लिए पीडब्ल्यूडी ने जगह नहीं मांगी। पीडब्ल्यूडी की ओर से कोई पत्र नहीं मिला।
फोटो 17 - मुन्नी
बीमार हो जाए तो अस्पताल कैसे जाएं
हमाए मजरे में कौनू ध्यान नहीं देता...। बीमार पड़ जाएं तो कैसे अस्पताल जाएं। कौनउ एंबुलेंस वाला गांव तक नहीं आता। गांव में कई बच्चों, महिलाओं और बुजुर्गों को तड़पते देखा है। सड़क कच्ची है, इस वजह से एंबुलेंस नहीं पहुंच पाती। समय पर इलाज नहीं मिलता है तो उनकी मौत हो जाती है।
ग्रामीण सड़कों के लिए योजनाएं
- बुंदेलखंड विकास निधि की ओर से
- जिला योजना के माध्यम से
- राज्य सड़क निधि के माध्यम से
- क्रिटिकल गैप्स योजना
- त्वरित आर्थिक विकास योजना
- ग्राम प्रधान स्तर से मनरेगा, राज्य वित्तीय योजना, प्रधान निधि आदि।
1.75 करोड़ में डामरीकरण और 25 लाख रुपये तक में तैयार होगी इंटरलॉकिंग
पीडब्ल्यूडी के सहायक अभियंता ब्रजकिशोर की माने तो करीब पौने दो किलोमीटर से ज्यादा लंबाई की इस सड़क के डामरीकरण में 1.75 करोड़ के खर्च का अनुमान है। प्रधान के अनुसार यदि इस सड़क पर इंटरलॉकिंग सड़क बनाई जाए तो करीब 25 लाख रुपये तक खर्च आएगा। 250 की आबादी वाले मजरों के संपर्क मार्क लोक निर्माण विभाग की ओर से बनाए जाते हैं। इस प्रकार के लगभग सभी संपर्क मार्ग बन चुके हैं। बसानताल मजरे की आबादी ऑन रिकार्ड इस मानक को पूरा नहीं करती होगी, इसलिए यह सड़क पीडब्ल्यूडी ने नहीं बनाई है। लिंक मार्ग पर वन विभाग की जगह है तो वहां का छूटा रास्ता उसी विभाग के स्तर या सहयोग से बन सकता है।
फोटो 19 - माया देवी, प्रधान
यह सड़क लोक निर्माण विभाग के अधीन है। जलभराव की वजह से कच्ची सड़क पर अक्सर पानी भर जाता है। मसानताल मजरे के लोगों को एंबुलेंस की सुविधा ठीक से नहीं मिल पाती है।
- माया देवी, प्रधान, मंगरौल, तहसील कालपी
फोटो 18 - विनोद चतुर्वेदी, विधायक
विधायक निधि से दो किलोमीटर की सड़क नहीं बनाई जा सकती है। विधानसभा के माध्यम से सरकार को अवगत करा सकते हैं। सड़क का निर्माण सरकार को ही कराना है। सड़क की वजह से लोगों की मौत होना बेहद दुखद है।
- विनोद चतुर्वेदी, विधायक, कालपी