{"_id":"56feb4014f1c1bba3bf00105","slug":"twenty-two-million-surrendered-night","type":"story","status":"publish","title_hn":"राहत के पौने दो करोड़ सरेंडर ","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
राहत के पौने दो करोड़ सरेंडर
अमर उजाला ब्यूरो, उरई
Updated Fri, 01 Apr 2016 11:16 PM IST
विज्ञापन
rupee
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
जिले समेत पूरे बुंदेलखंड का किसान लगातार चार साल से प्राकृतिक आपदा से जूझ रहा है। इस साल भी प्रकृति ने उसे नहीं बख्शा। कुछ सूखा तो कुछ बेमौसम बरसात और बचीखुची फसल ओला ने लील ली। इसके बाद अधिकारियों की लापरवाही या फिर यूं कहें कि किसानों का दुर्भाग्य से सरकार से आया राहत का बजट भी उन तक नहीं पहुंच सका। शासन से बारिश
व ओलावृष्टि में हुए फसल नुकसान पर किसानों के लिए आया एक करोड़ रुपया वित्तीय वर्ष के अंतिम दिन सरेंडर कर दिया गया। इसी तरह से पशुओं के चारे के लिए मिले एक करोड़ के बजट में से 81 लाख 45 हजार रुपये शासन को लौटा दिए गए। उधर किसान अपना और अपने दुधारू जानवरों का पेट भरने के लिए परेशान है। पहले सूखा और फिर बारिश व ओलावृष्टि
के बाद अब अधिकारियों की लापरवाही किसानों पर आफत बनकर टूटी है। आर्थिक रूप से टूटे किसानों को शासन की इमदाद का ही सहारा है। रबी फसल में बारिश व ओलावृष्टि से खासा नुकसान हो गया। इसकी रिपोर्ट शासन को भेजी गई और राहत के लिए 43 करोड़ रुपये की डिमांड की गई। शासन ने इसके सापेक्ष एक करोड़ का बजट 28 मार्च को रिलीज कर दिया।
विज्ञापन
इसी के साथ निर्देश दिए कि बजट को तत्काल किसानों के खाते में ईमेल व्यवस्था के माध्यम से डाल दें। इस निर्देश पर अधिकारी अमल नहीं कर सके और 31 मार्च को रकम लौटा दी गई। इसके साथ ही किसानों की उम्मीदों पर पानी फिर गया। दूसरी ओर सूखा राहत के तहत पशुओं के लिए भूसे का इंतजाम करने को एक करोड़ का बजट शासन से पहले ही मिल चुका
था। भूसा का इंतजाम करने के लिए टेंडर प्रक्रिया पूरी की गई। माना जा रहा था कि पेट भरने के लिए सड़कों पर घूम रहे आवारा जानवरों के अच्छे दिन आ जाएंगे पर ऐसा कुछ भी नहीं हो सका। अधिकारी पशुओं के निवाले को मिले बजट को दबाए बैठे रहे। वित्तीय वर्ष के अंतिम दिन भूसा बजट में से 8145280 रुपये शासन को लौटा दिए गए।
कहां खर्च हो गये साढ़े 18 लाख
पशुपालन विभाग को एक करोड़ के बजट के साथ निर्देश दिए गए थे कि जिले में एक भी पशु की मौत भूख से नहीं होनी चाहिए। जानवरों के लिए भूसा का इंतजाम किया जाए। मिले
बजट से 18 लाख 54 हजार रुपये खर्च भी हो गए और पशुओं को भूसा भी नहीं मिला। यह बजट कहां खर्च किया यह तो अधिकारी ही जाने। बताया जा रहा है कि इस बजट से कुछ भूसा खरीदा गया है चूंकि यहां पर फिलहाल भूसा की आवश्यकता नहीं है। लिहाजा अवशेष बजट को मार्च क्लोजिंग में शासन को लौटा दिया गया।
विज्ञापन
व ओलावृष्टि में हुए फसल नुकसान पर किसानों के लिए आया एक करोड़ रुपया वित्तीय वर्ष के अंतिम दिन सरेंडर कर दिया गया। इसी तरह से पशुओं के चारे के लिए मिले एक करोड़ के बजट में से 81 लाख 45 हजार रुपये शासन को लौटा दिए गए। उधर किसान अपना और अपने दुधारू जानवरों का पेट भरने के लिए परेशान है। पहले सूखा और फिर बारिश व ओलावृष्टि
विज्ञापन
के बाद अब अधिकारियों की लापरवाही किसानों पर आफत बनकर टूटी है। आर्थिक रूप से टूटे किसानों को शासन की इमदाद का ही सहारा है। रबी फसल में बारिश व ओलावृष्टि से खासा नुकसान हो गया। इसकी रिपोर्ट शासन को भेजी गई और राहत के लिए 43 करोड़ रुपये की डिमांड की गई। शासन ने इसके सापेक्ष एक करोड़ का बजट 28 मार्च को रिलीज कर दिया।
विज्ञापन
इसी के साथ निर्देश दिए कि बजट को तत्काल किसानों के खाते में ईमेल व्यवस्था के माध्यम से डाल दें। इस निर्देश पर अधिकारी अमल नहीं कर सके और 31 मार्च को रकम लौटा दी गई। इसके साथ ही किसानों की उम्मीदों पर पानी फिर गया। दूसरी ओर सूखा राहत के तहत पशुओं के लिए भूसे का इंतजाम करने को एक करोड़ का बजट शासन से पहले ही मिल चुका
था। भूसा का इंतजाम करने के लिए टेंडर प्रक्रिया पूरी की गई। माना जा रहा था कि पेट भरने के लिए सड़कों पर घूम रहे आवारा जानवरों के अच्छे दिन आ जाएंगे पर ऐसा कुछ भी नहीं हो सका। अधिकारी पशुओं के निवाले को मिले बजट को दबाए बैठे रहे। वित्तीय वर्ष के अंतिम दिन भूसा बजट में से 8145280 रुपये शासन को लौटा दिए गए।
कहां खर्च हो गये साढ़े 18 लाख
पशुपालन विभाग को एक करोड़ के बजट के साथ निर्देश दिए गए थे कि जिले में एक भी पशु की मौत भूख से नहीं होनी चाहिए। जानवरों के लिए भूसा का इंतजाम किया जाए। मिले
बजट से 18 लाख 54 हजार रुपये खर्च भी हो गए और पशुओं को भूसा भी नहीं मिला। यह बजट कहां खर्च किया यह तो अधिकारी ही जाने। बताया जा रहा है कि इस बजट से कुछ भूसा खरीदा गया है चूंकि यहां पर फिलहाल भूसा की आवश्यकता नहीं है। लिहाजा अवशेष बजट को मार्च क्लोजिंग में शासन को लौटा दिया गया।