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सबसे वजनी बच्ची स्वस्थ, मां डिस्चार्ज
ब्यूरो/ अमर उजाला, उरई
Updated Sun, 08 Nov 2015 10:46 PM IST
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बुधवार को उरई में नार्मल डिलीवरी से जन्मी देश की सबसे वजनी बच्ची की हालत
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अब ठीक है। वह झांसी के एक नर्सिंग होम की नर्सरी में रखी गई है। डॉक्टरों
के अनुसार अब वह खतरे से बाहर है और एक दो दिन में उसे डिस्चार्ज कर दिया
जाएगा। वहीं, बच्ची की मां फिरदौस को अस्पताल से छुट्टी दे दी गई है।
जालौन जिले के कदौरा ब्लाक के गुलौली गांव की 37 वर्षीय फिरदौस को चार नवंबर को 6.7 किलो की बच्ची नार्मल डिलीवरी से पैदा हुई। डॉ. अंजना गुप्ता ने बताया कि बच्चे की सांस थोड़ी तेज चल रही है। शाम करीब साढ़े सात बजे पैदा हुए इस बच्चे को रात दस बजे झांसी के एक नर्सिंग होम रेफर कर दिया गया जहां उसे नर्सरी में रखा गया। डॉ. अंजना के
मुताबिक अब बच्ची खतरे से बाहर है और एक दो दिन में डिस्चार्ज हो जाएगी। दूसरी ओर मां को उरई में दो दिन के इलाज के बाद डिस्चार्ज कर दिया गया। वहीं अमर उजाला को फिरदौस ने बताया कि अब वह अपने बच्चे का बेसब्री से इंतजार कर रही है। एक सवाल के जवाब में कहा कि वह अपनी इस बच्ची को डॉक्टर बनाएगी ताकि बड़ी होकर वह मानवता की सेवा करे।
सऊदी अरब से रिश्तेदार कर रहे फोन
अमर उजाला द्वारा सबसे पहले खबर प्रकाशित करने के बाद देश विदेश में इस बच्ची की चर्चा है। परिजनों ने बताया कि उनके कुछ रिश्तेदार सऊदी अरब में रहते हैं। अमर उजाला डॉट काम पर उन्होंने जब बच्ची की खबर पढ़ी तो उन्होंने सीधे उन्हें फोन कर बधाई दी।
विश्व की पहली बड़ी डिलीवरी
डॉ. अंजना गुप्ता इस डिलीवरी को विश्व इतिहास में एक अनोखी डिलीवरी मानती हैं। उनका कहना है कि अब तक पूरे विश्व में इतना भारी बच्चा नार्मल डिलीवरी से पैदा नहीं हुआ है। अन्य बच्चे सर्जरी के बाद पैदा हुए। ऐसे में नार्मल डिलीवरी से बच्ची का पैदा होना अपने आप में एक विश्व कीर्तिमान है।
बच्ची अब खतरे से बाहर
बच्ची का झांसी में इलाज कर रहे डॉ. प्रमोद गुप्ता ने बताया कि बच्ची के जन्म के समय सांस की नली में गंदा पानी चला गया और इसमें सूजन भी आ गई। इससे फेफड़े में इन्फेक्शन हो गया था। अब बच्ची खतरे से बाहर है। वह दूध भी पी रही है। एक दो दिन में उसे डिस्चार्ज कर दिया जाएगा।
जालौन जिले के कदौरा ब्लाक के गुलौली गांव की 37 वर्षीय फिरदौस को चार नवंबर को 6.7 किलो की बच्ची नार्मल डिलीवरी से पैदा हुई। डॉ. अंजना गुप्ता ने बताया कि बच्चे की सांस थोड़ी तेज चल रही है। शाम करीब साढ़े सात बजे पैदा हुए इस बच्चे को रात दस बजे झांसी के एक नर्सिंग होम रेफर कर दिया गया जहां उसे नर्सरी में रखा गया। डॉ. अंजना के
मुताबिक अब बच्ची खतरे से बाहर है और एक दो दिन में डिस्चार्ज हो जाएगी। दूसरी ओर मां को उरई में दो दिन के इलाज के बाद डिस्चार्ज कर दिया गया। वहीं अमर उजाला को फिरदौस ने बताया कि अब वह अपने बच्चे का बेसब्री से इंतजार कर रही है। एक सवाल के जवाब में कहा कि वह अपनी इस बच्ची को डॉक्टर बनाएगी ताकि बड़ी होकर वह मानवता की सेवा करे।
सऊदी अरब से रिश्तेदार कर रहे फोन
अमर उजाला द्वारा सबसे पहले खबर प्रकाशित करने के बाद देश विदेश में इस बच्ची की चर्चा है। परिजनों ने बताया कि उनके कुछ रिश्तेदार सऊदी अरब में रहते हैं। अमर उजाला डॉट काम पर उन्होंने जब बच्ची की खबर पढ़ी तो उन्होंने सीधे उन्हें फोन कर बधाई दी।
विश्व की पहली बड़ी डिलीवरी
डॉ. अंजना गुप्ता इस डिलीवरी को विश्व इतिहास में एक अनोखी डिलीवरी मानती हैं। उनका कहना है कि अब तक पूरे विश्व में इतना भारी बच्चा नार्मल डिलीवरी से पैदा नहीं हुआ है। अन्य बच्चे सर्जरी के बाद पैदा हुए। ऐसे में नार्मल डिलीवरी से बच्ची का पैदा होना अपने आप में एक विश्व कीर्तिमान है।
बच्ची अब खतरे से बाहर
बच्ची का झांसी में इलाज कर रहे डॉ. प्रमोद गुप्ता ने बताया कि बच्ची के जन्म के समय सांस की नली में गंदा पानी चला गया और इसमें सूजन भी आ गई। इससे फेफड़े में इन्फेक्शन हो गया था। अब बच्ची खतरे से बाहर है। वह दूध भी पी रही है। एक दो दिन में उसे डिस्चार्ज कर दिया जाएगा।