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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Jalaun News ›   The miscreants blindfolded him, put him in the car seat and took him to the forest.

Jalaun News: आंख में पट्टी बांधकर, कार की सीट में डालकर जंगल में ले गए थे बदमाश

Sat, 20 Sep 2025 12:55 AM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Sat, 20 Sep 2025 12:55 AM IST
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The miscreants blindfolded him, put him in the car seat and took him to the forest.
उरई। 12 वर्ष पहले मेडिकल संचालक का अपहरण उसके पड़ोसी उमेश मिश्रा ने रुपये के लालच में आकर करा दिया था। 20 दिन बाद घर पहुंचने पर अजय कुमार ने परिजनों को बताया था कि वह 23 जुलाई 2013 की रात 9 बजे बाइक लेकर घर लौट रहा था। तभी पहले से ही पुलिया पर उसका पड़ोसी उमेश अन्य साथी बदमाशों के साथ अपहरण की साजिश बनाई थी।
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वह पुलिया पर पहुंचा तो उमेश ने उसे अपने पास बुलाया। उसने परिजनों को बताया था कि बदमाशों ने उसे पीछे से सिर में डंडा मार दिया था। इससे वह बाइक से गिर गया था। उसी दौरान कुछ बदमाश कार लेकर पहुंचे और उसको बीच में डाल लिया। इसके बाद उसके आंखों में पट्टी बांध दी। इसके बाद आरोपी बदमाश उसे कैलिया के जंगल में ले गए। वहां बदमाश उसे केवल एक वक्त का खाना देते थे और मांगने पर मारपीट करते थे। पानी के लिए भी वह तरसता था। लेकिन बदमाशों को उसके ऊपर कोई दया नहीं आती थी।
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पड़ोसी उमेश उससे कहता था कि एक करोड़ रुपये की व्यवस्था अगर तुम्हारे घर वाले कर लेंगे तो तुम्हें छोड़ दिया जाएगा। इस पर एक बदमाश ने एट थाना क्षेत्र के एक गांव निवासी जाहर सिंह यादव के मोबाइल के माध्यम से उसके परिजनों से फिरौती की मांग की बात बताई थी। साथ ही धमकी दी गई थी कि अगर किसी को कोई बात बताई तो अजय तो जान से मार दिया जाएगा। परिजनों ने रुपये जुटाने की कोशिश की, लेकिन नहीं हो सके थे। इसके बाद उन्होंने पुलिस से शिकायत की थी। पुलिस ने पूरे मामले में छह लोगों की गवाही के साथ 60 पेज की केस डायरी दाखिल की गई थी।
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इतना हो गया था भयभीत कि तीन दिन तक नहीं की थी बात

बदमाशों ने पीड़ित अजय कुमार को अपहरण के बाद इतना पीटा था कि पुलिस के द्वारा बदमाशों से छुड़वाने के बाद वह तीन दिन तक किसी से बोला नहीं था। 20 दिन में उसकी दाड़ी बढ़ गई थी। आते ही वह एक कमरे में चला गया था और किसी से बात नहीं करता था। उसने बताया था कि बदमाश उसी से पूरा काम करवाते थे। इसके बाद नशे में होकर उसके साथ मारपीट कर रुपये मंगवाने की बात कहते थे। जब उसे पुलिस आने की आहट हुई तो वह चिल्लाने लगा था। दोनों ओर से जब फायरिंग हुई तो वह जमीन पर लेट गया और भागकर पुलिस वालों के पास पहुंच गया था।




न्याय के पहले जिंदगी की जंग हार गया अजय
पीड़ित अजय को एट थाना पुलिस जब छुड़ाकर लाई थी, तो परिजनों की आंखें खुशी से झलक आईं थी। परिजनों ने पुलिस से कहा था कि आरोपियों पर कड़ी कार्रवाई की जाए। पीड़ित का भी कहना था कि उसके साथ गलत कृत्य करने वाले आरोपियों पर कड़ी कार्रवाई की जाए। फरवरी वर्ष 2024 में बीमारी के चलते पीड़ित की मौत हो गई। उसके केस की पैरवी उसका भाई करता रहा। परिजनों का कहना है कि न्याय के पहले ही वह अपनी जिंदगी से जंग हार गया। अगर वह आज जिंदा होता, तो उसे बहुत खुशी होती।
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