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टेसू झिंझिया के ब्याह की तैयारी
अमर उजाला ब्यूरो, उरई
Updated Fri, 14 Oct 2016 11:27 PM IST
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कोंच में दीवार पर बनी सुआटा की आकृति
- फोटो : अमर उजाला
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बुंदेलखण्ड का प्रमुख लोकक्रीड़ा पर्र्व ‘सुआटा’ का दो दिन बाद टेसू झिंझिया परिणयोत्सव और सुआटा के वध के साथ समापन हो जाएगा। शहरी व ग्रामीण इलाकों में एक माह तक चले लोकक्रीड़ा पर्व में बुंदेली बालाओं और बालकों ने परंपरागत रूप से पांच चरणों की औपचारिकतायें पूरी कीं और शरद पूर्णिमा की रात्रि में धूमधाम के साथ टेसुओं की बारातें निकालीं।
इसकी तैयारियां जोरों से की जा रहीं हैं। बताते चले कि लोकक्रीड़ा पर्व ‘सुआटा’ बुंदेलखंड और ब्रज क्षेत्रों में खेला जाने वाला प्रमुख पर्व है जो पूरे एक माह तक खेला जाता है। पांच चरणों में खेले जाने बाले इस क्रीड़ा पर्व में वैसे तो बालक और बालिकाएं दोनों ही हिस्सा लेते हैं, लेकिन मुख्य रूप से यह बालिकाओं द्वारा खेला जाने वाला क्रीड़ापर्व है। पिछले एक सप्ताह से बालक
और बालिकायें अलग अलग झुंडों में टेसू और झिंझिया मांगने निकले हैं, घर घर जाकर ‘हिन्न खुरी भई हिन्न खुरी हिन्ना मांगे तीन खुरी, तीन खुरी कौ पाइया बापै बैठो लोइया’ तथा ‘हिमांचल जू की कुंवरि लड़ायेंती नारे सुआटा’ जैसे उल्टे सीधे गीत गाकर वे धन इकट्ठा कर रहे हैं ताकि इसे टेसू झिंझिया विवाह पर खर्च किया जा सके। सभी चरण सफलतापूर्वक
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संपन्न कराने के बाद शनिवार को शरद पूर्णिमा की रात्रि में टेसुओं की बारातें बैंड बाजों के साथ निकाली जायेंगीं और जहां जहां सुआटा स्थापित हैं वहां झिंझियाओं के साथ उनके विवाहों की रस्में पूरी होंगी।
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इसकी तैयारियां जोरों से की जा रहीं हैं। बताते चले कि लोकक्रीड़ा पर्व ‘सुआटा’ बुंदेलखंड और ब्रज क्षेत्रों में खेला जाने वाला प्रमुख पर्व है जो पूरे एक माह तक खेला जाता है। पांच चरणों में खेले जाने बाले इस क्रीड़ा पर्व में वैसे तो बालक और बालिकाएं दोनों ही हिस्सा लेते हैं, लेकिन मुख्य रूप से यह बालिकाओं द्वारा खेला जाने वाला क्रीड़ापर्व है। पिछले एक सप्ताह से बालक
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और बालिकायें अलग अलग झुंडों में टेसू और झिंझिया मांगने निकले हैं, घर घर जाकर ‘हिन्न खुरी भई हिन्न खुरी हिन्ना मांगे तीन खुरी, तीन खुरी कौ पाइया बापै बैठो लोइया’ तथा ‘हिमांचल जू की कुंवरि लड़ायेंती नारे सुआटा’ जैसे उल्टे सीधे गीत गाकर वे धन इकट्ठा कर रहे हैं ताकि इसे टेसू झिंझिया विवाह पर खर्च किया जा सके। सभी चरण सफलतापूर्वक
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संपन्न कराने के बाद शनिवार को शरद पूर्णिमा की रात्रि में टेसुओं की बारातें बैंड बाजों के साथ निकाली जायेंगीं और जहां जहां सुआटा स्थापित हैं वहां झिंझियाओं के साथ उनके विवाहों की रस्में पूरी होंगी।