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उतरने लगी बाढ़, पर बहा ले गई सब कुछ

Fri, 26 Aug 2016 11:16 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो, उरई
अमर उजाला ब्यूरो, उरई Updated Fri, 26 Aug 2016 11:16 PM IST
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Spread- ing flood, but all were washed away
कोठी में घुसे बेतवा के पानी में डूबा पम्पिंग सेट व खड़ी वृद्घा। - फोटो : अमर उजाला
एमपी के बांधों से चार लाख क्यूसेक पानी छोड़े जाने के चलते बीते दिनों अचानक बेतवा का जलस्तर एकदम बढ़ गया। नदी खतरे के निशान 122.66 मीटर को पार करते हुए 124.42 मीटर पर पहुंच गई। इस दौरान नदी के आसपास की किसानों की फसलें जलमग्न होकर पूरी तरह से बर्बाद हो गईं। वहीं दूसरी ओर नदी का जलस्तर बढ़ने से जानवरों के बाड़े
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भी पानी से लबालब हो गए। इससें ग्रामीणों के कई जानवर मर गए। हालांकि अब नदी का पानी धीरे-धीरे सिमट रहा है लेकिन अब नई समस्या खड़ी हो गई है। तेज धूप व उमस से इंसानों तथा जानवरों में भी बीमारी फैलने की आशंका बढ़ रही है। एक रिपोर्ट-
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आटा, दाल सब बर्बाद
गांव मुहाना निवासी 70 साल की धरमी बाई कहतीं हैं कि पूर्व में सूखा के चलते उन्होंने नदी किनारे अपने कुआं की बोरिंग करके फसल की सिंचाई के लिये पंपिंग सेट लगाया था। 21 अगस्त को तड़के 3 बजे बेतवा उफान पर आ गई। उन्हें अपना सामान समेटने तक की मोहलत न मिली। सुबह 7 बजे तक पानी कोठी में घुटनों तक भर गया और उसमें पंपिंग सेट, खाने पीने का साल भर का समान, आटा, दाल, कपड़े, गेहूं आदि सब बर्बाद हो गया।
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मगरमच्छ ने लील ली एक गाय
मकरेछा निवासी सोहनलाल पाल कहते हैं कि 21 अगस्त को बेतवा का जलस्तर बढ़ने से उनके बाड़े में पानी भर गया था। इससे पानी के साथ एक बड़ा मगरमच्छ भी आ गया था और एक दुधारू गाय को ही खींच ले गया। कहा, गाय का आज तक कुछ भी पता नहीं चल सका। अब तेज धूप पड़ने से उमस भी बढ़ रही है और ज्यादातर जानवर भी बीमार पड़ कर मर रहे हैं। इससे किसानों की परेशानी बढ़ गई है।

फसल चढ़ गई पानी की भेंट
मुहाना निवासी बराती श्रीवास कहते हैं कि उन्होंने नदी किनारे थोड़ी सी ही जगह में कर्ज लेकर फसल की बुवाई की थी लेकिन नदी के बढ़े जलस्तर ने सब कुछ बर्बाद कर दिया। अब तो खाने के लिए दाने-दाने के लिए मोहताज होना पडे़गा। इसी तरह रामलाल पुत्र भोनिया पांचाल के 10 बीघा की भी तिली की फसल प्रभावित हो गई। वहीं मनीराम राजपू बंधौली वाले की भी लगभग 15 बीघा की फसल पानी की भेंट चढ़ गई।


प्रधान वीर सिंह राजपूत का कहना है कि बेतवा का जलस्तर बढ़ने से आसपास के खेतों में खड़ी फसल पूर्ण रूप से बर्बाद हो गई है। ग्रामीणों की ओर से मांग की जा रही है कि पानी प्रभावित हुईं फसलों का लेखपालों द्वारा सर्वे करा कर मुआवजा दिलाया जाए ताकि किसानों की आर्थ्क स्थिति में सुधार आ सके।
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