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Jalaun News: राधाष्टमी पर मंदिरों में विशेष पूजा, घरों में बेटियां बनीं राधा
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फोटो 18-राधा स्वरूप में सजी बच्ची चाहत। संवाद
जालौन। नगर में राधा अष्टमी का पर्व पर रविवार को मंदिरों में विशेष पूजन-अर्चन और झांकियों का आयोजन किया गया। लोगों ने बच्चियों को राधा रूप में सजाकर उत्सव को और भी मनोहारी बना दिया।
राधा अष्टमी का पर्व भाद्रपद के शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि को मनाई जाती है। साध्वी किशोरीजी बताती हैं कि इस दिन श्रीकृष्ण की प्रिय स्वरूपा राधारानी का जन्म हुआ था। भक्तजन मानते हैं कि राधा और कृष्ण एक-दूसरे के बिना अधूरे हैं और दोनों का प्रेम अद्वितीय और अलौकिक है। शास्त्रों के अनुसार, राधा भक्ति की मूर्तिमान स्वरूपा मानी जाती हैं और उनका स्मरण करने मात्र से भगवान श्रीकृष्ण की कृपा प्राप्त होती है।
नगर के प्रमुख राधा कृष्ण मंदिरों में सुबह से ही श्रद्धालुओं की भीड़ जुटी रही। श्रीराधा-कृष्ण के भजन-कीर्तन गूंजते रहे। श्रद्धालुओं ने राधा-कृष्ण के चरणों में पुष्प अर्पित कर आशीर्वाद प्राप्त किया। पर्व की सबसे आकर्षक झलक तब देखने को मिली, जब भक्तों ने अपनी नन्हीं-नन्हीं बेटियों को राधा के स्वरूप में सजाया। बच्चियों ने सिर पर मुकुट, माथे पर तिलक, लाल-पीले-हरे रंग की चुनरी और हाथों में कमल या बांसुरी सजाकर ऐसा आभास कराया मानो स्वयं राधारानी नगर में अवतरित हो गई हों। मंदिरों में श्रीमद्भागवत और अन्य धार्मिक ग्रंथों का पाठ भी हुआ।
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राधा अष्टमी का पर्व भाद्रपद के शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि को मनाई जाती है। साध्वी किशोरीजी बताती हैं कि इस दिन श्रीकृष्ण की प्रिय स्वरूपा राधारानी का जन्म हुआ था। भक्तजन मानते हैं कि राधा और कृष्ण एक-दूसरे के बिना अधूरे हैं और दोनों का प्रेम अद्वितीय और अलौकिक है। शास्त्रों के अनुसार, राधा भक्ति की मूर्तिमान स्वरूपा मानी जाती हैं और उनका स्मरण करने मात्र से भगवान श्रीकृष्ण की कृपा प्राप्त होती है।
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नगर के प्रमुख राधा कृष्ण मंदिरों में सुबह से ही श्रद्धालुओं की भीड़ जुटी रही। श्रीराधा-कृष्ण के भजन-कीर्तन गूंजते रहे। श्रद्धालुओं ने राधा-कृष्ण के चरणों में पुष्प अर्पित कर आशीर्वाद प्राप्त किया। पर्व की सबसे आकर्षक झलक तब देखने को मिली, जब भक्तों ने अपनी नन्हीं-नन्हीं बेटियों को राधा के स्वरूप में सजाया। बच्चियों ने सिर पर मुकुट, माथे पर तिलक, लाल-पीले-हरे रंग की चुनरी और हाथों में कमल या बांसुरी सजाकर ऐसा आभास कराया मानो स्वयं राधारानी नगर में अवतरित हो गई हों। मंदिरों में श्रीमद्भागवत और अन्य धार्मिक ग्रंथों का पाठ भी हुआ।
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