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तनाव में कभी मोबाइल मिलाया तो कभी तंबाकू व पान मसाला खाया
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जिला एवं सत्र न्यायालय ,उरई (जालौन) से सीओ भगवान सिंह को हवालात ले जाते पुलिसकर्मी
- फोटो : ORAI
उरई (जालौन)। दो दिन पहले तक जिन भगवान सिंह (सीओ कर्नलगंज रहे) के आगे पीछे उनके सर्किल की पुलिस नजर आती थी वे शुक्रवार को सुनवाई से पूर्व अदालत के कठघरे में बेबस खड़े नजर आ रहे थे, चेहरे की बेचैनी छिपाने को कभी मोबाइल मिलाकर बात करते तो कभी जेब से रजनीगंधा व तुलसी तंबाकू के पाउच निकालकर फांक रहे थे। गुटखा खाने के बाद एक दो बार चेहरे में जबरदस्ती की मुस्कुराहट भी दिख रही थी।
सीओ भगवान सिंह पास में खड़े एक इंस्पेक्टर व दरोगा से बार-बार राय मशविरा भी कर रहे थे। बीच बीच में भगवान सिंह स्वयं कभी अपने घरवालों से तो कभी किसी खास रिश्तेदार से फोन पर बतियाते जा रहे थे। उन्हें अहसास था कि कुछ ही देर बाद उन्हें सजा होना तय है लेकिन कठघरे से लेकर जेल जाने वाली गाड़ी में बैठते वक्त तक कभी एक हाथ जींस की जेब तो कभी दोनों हाथ जेब में डाल रहे थे।
बाकी के दोषियों को पुलिस की गाड़ी में पीछे बैठाया गया लेकिन सीओ की इच्छा पर उन्हें पुलिस वैन में आगे बैठाकर जेल तक ले जाया गया। भगवान सिंह का कहना है कि वे तो घटना के वक्त कोतवाली में ही नहीं थे। जबकि कचहरी के सूत्रों की मानें तो घटना के वक्त एक हेड मोहर्रिर की गवाही ने ही भगवान सिंह को फंसा दिया था, जिसने गवाही दी थी कि घटना के वक्त भगवान सिंह भी कोतवाली में मौजूद थे।
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रवानगी न कर फंसा कांस्टेबल कटियार
सजा पाने वालों में शामिल तत्कालीन कांस्टेबल राकेश बाबू कटियार की कहानी कुछ कम अजीब नहीं है। कटियार के साथी पुलिस कर्मियों ने बताया कि जिस दिन कोतवाली में घटना हुई उससे पांच छह दिन पहले ही राकेश की कोंच कोतवाली से रवागनगी हो चुकी थी लेकिन वह नई तैनाती पर जाने के बजाए कोतवाली में ही समय गुजार रहा था और घटना के वक्त भी कोतवाली में मौजूद था और घटना में नामजद हो गया।
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सीओ भगवान सिंह पास में खड़े एक इंस्पेक्टर व दरोगा से बार-बार राय मशविरा भी कर रहे थे। बीच बीच में भगवान सिंह स्वयं कभी अपने घरवालों से तो कभी किसी खास रिश्तेदार से फोन पर बतियाते जा रहे थे। उन्हें अहसास था कि कुछ ही देर बाद उन्हें सजा होना तय है लेकिन कठघरे से लेकर जेल जाने वाली गाड़ी में बैठते वक्त तक कभी एक हाथ जींस की जेब तो कभी दोनों हाथ जेब में डाल रहे थे।
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बाकी के दोषियों को पुलिस की गाड़ी में पीछे बैठाया गया लेकिन सीओ की इच्छा पर उन्हें पुलिस वैन में आगे बैठाकर जेल तक ले जाया गया। भगवान सिंह का कहना है कि वे तो घटना के वक्त कोतवाली में ही नहीं थे। जबकि कचहरी के सूत्रों की मानें तो घटना के वक्त एक हेड मोहर्रिर की गवाही ने ही भगवान सिंह को फंसा दिया था, जिसने गवाही दी थी कि घटना के वक्त भगवान सिंह भी कोतवाली में मौजूद थे।
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रवानगी न कर फंसा कांस्टेबल कटियार
सजा पाने वालों में शामिल तत्कालीन कांस्टेबल राकेश बाबू कटियार की कहानी कुछ कम अजीब नहीं है। कटियार के साथी पुलिस कर्मियों ने बताया कि जिस दिन कोतवाली में घटना हुई उससे पांच छह दिन पहले ही राकेश की कोंच कोतवाली से रवागनगी हो चुकी थी लेकिन वह नई तैनाती पर जाने के बजाए कोतवाली में ही समय गुजार रहा था और घटना के वक्त भी कोतवाली में मौजूद था और घटना में नामजद हो गया।

जिला एवं सत्र न्यायालय ,उरई (जालौन) में सजा सुनाए जाने के बाद बाहर निकलते सीओ भगवान सिंह- फोटो : ORAI