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Jalaun News: उपकेंद्र पहुंचना मुश्किल, 100 मीटर का रास्ता 18 साल से कच्चा
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फोटो - 03 अस्पताल हो जाने वाला कच्चा मार्ग। संवाद
सिरसा कलार। महेवा विकासखंड के अकबरपुर मढ़ैया में करीब 18 साल पहले छह गांवों की स्वास्थ्य सुविधाओं के लिए बनाया गया हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर आज भी पक्के रास्ते का इंतजार कर रहा है। मुख्य मार्ग से जूनियर हाईस्कूल तक रास्ता पक्का है, लेकिन वहां से उपकेंद्र तक करीब 80 से 100 मीटर रास्ता कच्चा है। बरसात में कीचड़ और जलभराव के कारण मरीजों और खासकर गर्भवती महिलाओं को उपकेंद्र तक पहुंचने में परेशानी होती है।
महेवा विकासखंड के अकबरपुर मढ़ैया में बनाया गया हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर पक्के रास्ते की वजह से लोगों को इसका लाभ नहीं दे पा रहा है। ग्रामीण चंदन, गजराज, देवेश और मनीष ने बताया कि अकबरपुर मढ़ैया के अलावा बड़ी मढ़ैया, मघापुर और मानपुर समेत आसपास के गांवों के लोगों की सुविधा के लिए उपकेंद्र बनाया गया था। रास्ता अधूरा होने से बारिश में लोग यहां तक नहीं पहुंच पाते। एंबुलेंस को भी करीब 100 मीटर पहले खड़ा करना पड़ता है। मजबूरी में गर्भवती महिलाओं को जांच के लिए पांच से छह किलोमीटर दूर सरकारी अस्पताल जाना पड़ता है। गर्मियों में कच्चे रास्ते की धूल उड़कर उपकेंद्र के अंदर तक पहुंचती है। बाउंड्रीवाल न होने से परिसर में सामान के रखरखाव में भी परेशानी होती है।
उपकेंद्र में होती हैं जांच और टीकाकरण
प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र बाबई के प्रभारी चिकित्सा अधिकारी विकास यादव ने बताया कि उपकेंद्र में तैनात सीएचओ नौकरी छोड़ चुके हैं और अभी आशा की भी नियुक्ति नहीं हुई है। इसके बावजूद केंद्र खुलता है। दूसरे केंद्र की एएनएम यहां आकर टीकाकरण और गर्भवती महिलाओं की जांच करती हैं। रास्ता न होने से बरसात में परेशानी होती है। रास्ते के लिए ग्राम प्रधान से बात की गई है। बंबी पर पुलिया बन जाए तो उपकेंद्र तक सीधा रास्ता भी मिल सकता है।
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खंड विकास अधिकारी अरुण कुमार सिंह ने बताया कि जल्द ही मौके का निरीक्षण कराकर उपकेंद्र तक रास्ता पक्का कराने की व्यवस्था की जाएगी।
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महेवा विकासखंड के अकबरपुर मढ़ैया में बनाया गया हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर पक्के रास्ते की वजह से लोगों को इसका लाभ नहीं दे पा रहा है। ग्रामीण चंदन, गजराज, देवेश और मनीष ने बताया कि अकबरपुर मढ़ैया के अलावा बड़ी मढ़ैया, मघापुर और मानपुर समेत आसपास के गांवों के लोगों की सुविधा के लिए उपकेंद्र बनाया गया था। रास्ता अधूरा होने से बारिश में लोग यहां तक नहीं पहुंच पाते। एंबुलेंस को भी करीब 100 मीटर पहले खड़ा करना पड़ता है। मजबूरी में गर्भवती महिलाओं को जांच के लिए पांच से छह किलोमीटर दूर सरकारी अस्पताल जाना पड़ता है। गर्मियों में कच्चे रास्ते की धूल उड़कर उपकेंद्र के अंदर तक पहुंचती है। बाउंड्रीवाल न होने से परिसर में सामान के रखरखाव में भी परेशानी होती है।
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उपकेंद्र में होती हैं जांच और टीकाकरण
प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र बाबई के प्रभारी चिकित्सा अधिकारी विकास यादव ने बताया कि उपकेंद्र में तैनात सीएचओ नौकरी छोड़ चुके हैं और अभी आशा की भी नियुक्ति नहीं हुई है। इसके बावजूद केंद्र खुलता है। दूसरे केंद्र की एएनएम यहां आकर टीकाकरण और गर्भवती महिलाओं की जांच करती हैं। रास्ता न होने से बरसात में परेशानी होती है। रास्ते के लिए ग्राम प्रधान से बात की गई है। बंबी पर पुलिया बन जाए तो उपकेंद्र तक सीधा रास्ता भी मिल सकता है।
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खंड विकास अधिकारी अरुण कुमार सिंह ने बताया कि जल्द ही मौके का निरीक्षण कराकर उपकेंद्र तक रास्ता पक्का कराने की व्यवस्था की जाएगी।