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Jalaun News: रमजान -उल-मुबारक, पढ़ी जाती खास नमाज तरावीह

Thu, 14 Mar 2024 01:06 AM IST
कानपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, जालौन
संवाद न्यूज एजेंसी, जालौन Updated Thu, 14 Mar 2024 01:06 AM IST
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Ramzan-ul-Mubarak, special Namaz Taraweeh is offered
मुहम्मदाबाद। इस्लाम धर्म का प्रमुख त्योहार रमजान शुरु हो गया है। रमजान में मुस्लिम समाज के लोग तीस दिन तक रोजे रखकर एक खास नमाज पढ़ते हैं। जिसे तरावीह कहा जाता है। वैसे तो मस्जिदों में रमजान महीने के तीसों दिन इशां की नमाज के बाद दो-दो रकात करके पढ़ाई और सुनाई जाती है, लेकिन कहीं-कहीं कम समय में तराबीह एक, पांच, दस और पंद्रह दिनों की भी होती है। जिसमें कुरान पढ़ा और सुना जाता है।
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.फोटो-6-मौलाना शमशुल कमर।
तरावीह में गौरोफिक्र से सुना जाए कुरआन
मौलाना शमशुल कमर बताते हैं कि रमजान के महीने की खास इबादत तरावीह हुजूर हजरत मोहम्मद साहब की सुन्नतों में से एक है। हाफिजों, कारी, मौलाना द्वारा मुंहजुबानी पढ़कर सुनाया जाने वाला कुरान लोगों को गौरोफिक्र से सुनना चाहिए। इसे सुनने से दुनिया व आखिरत दोनों ही संवरती है।
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फोटो-7-हाफिज जमील अहमद कादरी।
रमजान के अलावा दूसरे माह में नहीं पढ़ी जाती तरावीह
हाफिज जमील अहमद कादरी बताते हैं कि रमजान में इबादत में इजाफा अपनी जगह है, लेकिन बहुत सारी इबादत महीनों के साथ मखसूस (खास) है। तरावीह हम रमजान के अलावा दूसरे महीने में नहीं पढ़ सकते। जैसे की हज के दिनों के अलावा दूसरे माह में हज नहीं होता। उसी तरह से तरावीह की नमाज खास तौर से रमजान में अदा की जाती है। क्योंकि इसी माह में कुरान-ए-करीम नाजिल हुआ है।
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फोटो-8-हाफिज अकील रिजवी।
रमजान माह में नाजिल हुआ कुरआन
हाफिज अकील रिजवी बताते हैं कि रमजान माह में कुरान नाजिल हुआ है, इसलिए इसे सुनना और पढ़ना ज्यादा खास है। इसी माह में अल्लाह के रसूल हजरत मोहम्मद साहब ने तराबीह पढ़ी है। इसलिए इस्लाम धर्म का अनुसरण करने वाले रमजान माह में तराबीह के माध्यम से कुरान को सुनते हैं और पढ़ते भी हैं। तरावीह की 20 रकात नमाज पढ़ना और कुरान का सुनना दोनों ही सुनते हैं।


फोटो-9-हाफिज जीशान हाशमी।
हर अंग का रोजा रखें-हाफिज जीशान हाशमी

हाफिज मोहम्मद जीशान हाशमी कहते हैं, इसमें किए गए सबाब का फल कई गुना अधिक मिलता है। यह इबादत और फजीलत का महीना है, रमजान में हर अंग का रोजा होना चाहिए, यानी हाथों से न कोई गलत काम करना चाहिए और न ही जुबान से गलत बोलना चाहिए। मस्जिदों में कुरानख्वानी और तरावीह आरंभ हो गई है। घरों में भी अकीदतमंदों ने कुरान का पाठ शुरू कर दिया है।
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