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Jalaun News: बारिश से धान की फसल बर्बाद, मायूस हो गए किसान
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फोटो- 23 धान की गिरी फसल दिखाता किसान। संवाद
मुहम्मदाबाद। मंगलवार को हुई तेज बारिश से धान की फसल करने वाले किसानों को नुकसान हुआ। दोपहर दो बजे तेज बारिश होने लगी। कुछ किसान खेतों पर धान की कटाई कर रहे थे, उन्हें बीच में ही काम छोड़कर भागना पड़ा। क्षेत्र में सौ एकड़ से ज्यादा में धान की बुआई हुई थी। किसानों को सिर्फ काटकर आप घर लाना था, अचानक हुई बारिश ने किसानों तोड़कर रख दिया।
धान की बुआई जून में की जाती है जो 85 दिन से 140 दिन में तैयार हो जाती है। कुछ धान की किस्में 85 दिन कुछ 115 दिन तो कुछ 140 दिन में पककर तैयार हो जाती है। इस समय फसल पूरी तरह तैयार हो गई थी। आजकल में फसल काटकर घर लाना था लेकिन अचानक बारिश होने से खेतों में फसल पूरी तरह पकी हुई लेट गई है और पानी भर गया है।
किसानों को अब अपनी लागत भी निकलना मुश्किल दिखाई दे रहा है। गांव की मंगल सिंह राजपूत की 22 बीघा, अंशु महाराज 12 बीघा, अंसार हुसैन 40 बीघा, मोनिश हुसैन 45 बीघा, तारिक अली 12 बीघा, अब्दुल हमीद आठ बीघा, उवैद उल्ला 40 बीघा, रहूप 9 बीघा, देवेंद्र राजपूत 30 बीघा, प्रिंस 5 बीघा, सुरेश की तीन बीघा, रियाज 8 बीघा, राजू राजपूत 50 बीघा, वीर प्रताप 30 बीघा समेत कई किसानों की फसल पूरी तरह तैयार हो गई थी। कुछ किसान तो आज कटाई के लिए भी पहुंचे थे लेकिन बारिश की वजह से लौटना पड़ा। उनका कहना है हम लोगों का जो नुकसान हुआ है, उसका सर्वे कराकर मुआवजा दिया जाए। हम लोगों को आने वाली दूसरी फसल के लिए बीज और खाद के लिए कर्ज न लेना पड़े।
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किसान मोनिश बताते हैं इस बार हमने सबसे अच्छी धान 45 बीघा में बुआई की थी। धान पूरी तरह तैयार हो गई थी। आज पांच बीघा की फसल कटाई करवाई, वही घर पर ला पाए हैं। अचानक से बारिश होने लगी, ट्रैक्टर हार्वेस्टर सब वापस लेकर घर आना पड़ा। हमारी फसल पूरी तरह से तैयार होने की वजह से नीचे गिर गई है। अब लागत निकालना भी मुश्किल पड़ जाएगा।
किसान मंगल राजपूत का कहना कि इस बार बलकट पर 25 बीघा खेत लिया था। खाद बीज भी उधार लिया था। फसल पूरी तरह तैयार भी हो गई थी। रात-दिन खेतों पर रखवाली कर फसल जब घर आने को हुई तो अचानक इतनी बारिश मई-जून महीने हुई वह आज दो घंटे में हो गई। फसल बेचकर लोगों का पैसा लौटाना था, अब कैसे लौटाएंगे।
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धान की बुआई जून में की जाती है जो 85 दिन से 140 दिन में तैयार हो जाती है। कुछ धान की किस्में 85 दिन कुछ 115 दिन तो कुछ 140 दिन में पककर तैयार हो जाती है। इस समय फसल पूरी तरह तैयार हो गई थी। आजकल में फसल काटकर घर लाना था लेकिन अचानक बारिश होने से खेतों में फसल पूरी तरह पकी हुई लेट गई है और पानी भर गया है।
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किसानों को अब अपनी लागत भी निकलना मुश्किल दिखाई दे रहा है। गांव की मंगल सिंह राजपूत की 22 बीघा, अंशु महाराज 12 बीघा, अंसार हुसैन 40 बीघा, मोनिश हुसैन 45 बीघा, तारिक अली 12 बीघा, अब्दुल हमीद आठ बीघा, उवैद उल्ला 40 बीघा, रहूप 9 बीघा, देवेंद्र राजपूत 30 बीघा, प्रिंस 5 बीघा, सुरेश की तीन बीघा, रियाज 8 बीघा, राजू राजपूत 50 बीघा, वीर प्रताप 30 बीघा समेत कई किसानों की फसल पूरी तरह तैयार हो गई थी। कुछ किसान तो आज कटाई के लिए भी पहुंचे थे लेकिन बारिश की वजह से लौटना पड़ा। उनका कहना है हम लोगों का जो नुकसान हुआ है, उसका सर्वे कराकर मुआवजा दिया जाए। हम लोगों को आने वाली दूसरी फसल के लिए बीज और खाद के लिए कर्ज न लेना पड़े।
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किसान मोनिश बताते हैं इस बार हमने सबसे अच्छी धान 45 बीघा में बुआई की थी। धान पूरी तरह तैयार हो गई थी। आज पांच बीघा की फसल कटाई करवाई, वही घर पर ला पाए हैं। अचानक से बारिश होने लगी, ट्रैक्टर हार्वेस्टर सब वापस लेकर घर आना पड़ा। हमारी फसल पूरी तरह से तैयार होने की वजह से नीचे गिर गई है। अब लागत निकालना भी मुश्किल पड़ जाएगा।
किसान मंगल राजपूत का कहना कि इस बार बलकट पर 25 बीघा खेत लिया था। खाद बीज भी उधार लिया था। फसल पूरी तरह तैयार भी हो गई थी। रात-दिन खेतों पर रखवाली कर फसल जब घर आने को हुई तो अचानक इतनी बारिश मई-जून महीने हुई वह आज दो घंटे में हो गई। फसल बेचकर लोगों का पैसा लौटाना था, अब कैसे लौटाएंगे।

फोटो- 23 धान की गिरी फसल दिखाता किसान। संवाद

फोटो- 23 धान की गिरी फसल दिखाता किसान। संवाद

फोटो- 23 धान की गिरी फसल दिखाता किसान। संवाद