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अपनों के दिलों से भी दूर कर रहे क्वारंटीन सेंटर

Wed, 27 May 2020 11:30 PM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Wed, 27 May 2020 11:30 PM IST
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Quarantine centers are also getting away from the hearts of loved ones
परिवार के साथ दर्द बयां करते ख्यालीराम। - फोटो : ORAI
कदौरा/मुहम्मदाबाद। लॉकडाउन में सामाजिक दूरी बनाए रखने पर जोर दिया गया लेकिन जैसे जैसे दिन बीतते जा रहे हैं, क्वारंटीन सेंटरों के कारण लोगों के दिलों के बीच की दूरी बढ़ती जा रही है। जिस किसी के घर का कोई सदस्य क्वारंटीन होता है, उस परिवार से पास पड़ोस के लोग भी मुंह फेरने लगते हैं। ऐसे मामले ज्यादातर प्रवासी मजदूरों के साथ ही देखने को मिल रहे हैं, जो अपने गांव सालों से जमा जमाया काम धंधा छोड़कर लौटे तो प्रशासन ने उन्हें क्वारंटीन करा दिया।
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अब गांव के लोग क्वारंटीन व्यक्ति के परिवार वालों के साथ बेगानों सा बर्ताव कर रहे हैं। जिससे ग्रामीण इलाकों में स्थिति तनावपूर्ण भी होती जा रही है। बता दें कि अभी तक जिले में तकरीबन पांच हजार प्रवासी मजदूर आ चुके हैं। जिन्हें गांव कस्बों के स्कूलों में क्वारंटीन किया गया है। प्रस्तुत है अपने पड़ोसियों की बेरुखी झेल रहे कुछ ऐसे ही लोगों का दर्द उन्हीं की जुबानी-
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मुहम्मदाबाद के ख्यालीराम ने बताया कि उनका बेटा राहुल दिल्ली में मजदूरी करता था। हाल ही में परदेस से घर लौटा तो गांव वालों ने उसे क्वारंटीन करा दिया। अब बेटा तो स्कूल में बने सेंटर में है लेकिन पास पड़ोस के लोगों का बर्ताव ही बदल गया है। कोई उनके परिवार के सदस्य पत्नी आशा, बेटी गोल्डी और बेटे सौरभ से सीधे मुंह बात भी नहीं करता है। मकान के सामने से भी पड़ोसी दूरी बनाकर गुजरते हैं।
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इसी तरह लॉकडाउन में मुंबई से फैक्ट्री की नौकरी छोड़कर घर लौटे सगे भाई आमिर और अमजद भी क्वारंटीन सेंटर पर है। पिता हबीब रजा बताते हैं कि जिस दिन से बेटे लौटे हैं, गांव वालों ने तो एकदम से बेगानों का व्यवहार करना शुरू कर दिया है। कोई हाल चाल तो दूर दुआ सलाम तक नहीं करता है। न जाने सभी को क्या हो गया है। कितना मेल मिलाप था। हम भी सब समझते हैं लेकिन कुछ कर और कह नहीं सकते, सो बर्दाश्त कर रहे हैं।

इलाहाबाद से अपने कस्बे कदौरा लौटे हिमांशु (16) को प्रशासन ने होम क्वारंटीन क्या किया, मानो परिवार पर मुसीबत का पहाड़ टूट पड़ा। पिता विकास ने बताया कि नाते रिश्तेदारों ने तो फोन पर बात करना तक बंद कर रखा है। मोहल्ले में किसी के दरवाजे से परिवार का कोई सदस्य गुजर जाए तो लोग घर के दरवाजे बंद कर लेते हैं। न जाने ऐसा कौन का अपराध उन लोगों से हो गया है। जल्द ही बीमारी खत्म न हुई तो सभी रिश्ते खत्म हो जाएंगे।
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