फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Jalaun News ›   Pardes will not go now, will work in the village itself

अब नहीं जाएंगे परदेस, गांव में ही करेंगे काम

Thu, 28 May 2020 11:51 PM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Thu, 28 May 2020 11:51 PM IST
विज्ञापन
Pardes will not go now, will work in the village itself
समीर - फोटो : ORAI
आटा। कोरोना माहामारी के दोराना बड़े शहरों से मजदूरों की परेशानी की जो तस्वीरें आ रही है वह दिल दहलाने हैं। स्थिति यह है कि शासन प्रशासन के तमाम प्रयासों के बाद भी मजदूरों के पैदल घर पहुंचने का सिलसिला जारी है।
विज्ञापन

ऐसे में अब तक जो मजदूर किसी भी तरह जिले में पहुंचे है आज वह गांव में ही रोजगार ढूंढ रहे हैं। कस्बे में बाहर से आए मजदूरों का कहना है कि अब वह कभी परदेस नहीं जाएंगे, वह गांव में ही अपनों के बीच रहकर रोजगार करेंगे। बेरोजगारी के इस दौर में कई प्रवासी मजदूरों ने गांव में ही रोजगार कर एक नजीर दी है।
विज्ञापन

अकबरपुर इटौरा निवासी राजेंद्र कुशवाहा आंध्रप्रदेश के तिरुपति बालाजी जी में पांच साल से पानी पूरी बेचने का काम करते थे, कोरोना के डर से वह परिवार सहित 30 अप्रैल को गांव आ गए। इसके बाद उन्होंने कई जगह काम मांगा, लेकिन जब काम नहीं मिला तो उन्होंने सब्जी और फ ल की दुकान लगा ली।
विज्ञापन
विज्ञापन

आटा कस्बा निवासी समीर अभी दिल्ली से 10 मई को किसी तरह अपने घर आ गया। समीर का कहना है कि अब वह दिल्ली नहीं जाना चाहता, इसी सोच के चलते समीर ने क्वारंटीन अवधि पूर्ण करने के बाद गांव के बाहर आपे सुधारने की दुकान खोल ली और अपना रोजगार शुरू किया।

राजेंद्र कुशवाहा

राजेंद्र कुशवाहा- फोटो : ORAI

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed