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Jalaun News: पीएचसी में आग से खलबली प्रसव कक्ष का सामान जला
Mon, 27 May 2024 11:33 PM IST
कानपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, जालौन
संवाद न्यूज एजेंसी, जालौन
Updated Mon, 27 May 2024 11:33 PM IST
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उरई। मोहल्ला तुफैलपुरवा स्थित नगरीय प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में सोमवार की देर करीब ढाई बजे आग लग गई। इससे प्रसव कक्ष का सामान जल गया। गनीमत यह रही कि जिस वक्त आग लगी, उस वक्त कोई भर्ती नहीं था। अस्पताल में आग बगल में फाइबर क्राकरी और गिफ्ट सेंटर एवं फोटो स्टूडियो में लगी आग से पहुंची। दुकानदार ने दस लाख से अधिक का नुकसान बताया।
करमेर निवासी दुकानदार वीरसिंह ने बताया कि वह रात को दुकान बंद कर घर चले गए थे। अस्पताल की बिल्डिंग में दो दुकानें हैं। एक दुकान में फाइबर क्राकरी और गिफ्ट का सामान तो दूसरी में फोटो स्टूडियो और शादी समारोह में काम आने वाला सामान रखते हैं। रात ढाई बजे दुकान के सामने रहने वाले एक व्यक्ति ने दुकान से धुआं निकलता देखाकर सूचना दी।
बताया कि जब वह पहुंचे तो दोनों दुकानों की शटर के नीचे से आग की लपटें निकल रही थी। उन्होंने दमकल को सूचना दी तो दो दमकलों ने आग पर काबू पाया। आग बुझने के बाद देखा कि दुकान से ही सटे नगरीय पीएचसी के प्रसव कक्ष में भी आग पहुंच गई थी। इस पर उन्होंने तत्काल अस्पताल के स्टाफ को सूचना दी। आगजनी में दुकानदार ने दस लाख से अधिक का नुकसान बताया है।
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वहीं, अस्पताल के प्रसव कक्ष में लगी आग से लकड़ी का दरवाजा, दो मेज, डिलीवरी टेबल, वजन मशीन, प्रसव रजिस्टर, बैनर के अलावा कई उपकरण, प्रचार प्रसार संंबंधी कागजात, बिजली के उपकरण, वायरिंग आदि जलकर राख हो गए। गनीमत यह रही कि जिस वक्त आगजनी की घटना हुई, उस वक्त कोई प्रसूता भर्ती नहीं थी। प्रभारी चिकित्साधिकारी डॉ. विष्णु ने बताया कि पूरी रिपोर्ट बनाकर सीएमओ कार्यालय भेजी गई है। उधर, शहरी स्वास्थ्य समन्वयक संजीव चंदेरिया भी मौके पर पहुंचे और उन्हें नुकसान का जायजा लिया। अस्पताल स्टाफ ने लाखों के नुकसान की बात कही है।
नहीं दिखे आग से बचाव के इंतजाम
उरई। नगरीय पीएचसी में आग से बचाव के पुख्ता इंतजाम नहीं दिखे। फायर सिलिंडर एक्सपायरी डेट का मिला। इस पर शहरी स्वास्थ्य समन्वयक संजीव चंदेरिया ने नाराजगी जताते हुए रोगी कल्याण समिति के फायर सिलिंडर की रिफलिंग कराने के निर्देश दिए। (संवाद)
आग से बचाव के लिए यह होने चाहिए इंतजाम
1-अस्पताल में स्प्रिंकलर, फायर अलार्म, पानी की पाइप लाइन जरूरी।
2-पांच हजार लीटर क्षमता की पानी की टंकी छत पर होना जरूरी।
3-आकस्मिक स्थिति में बाहर निकलने के लिए गेट होना जरूरी।
4-रैंप और सीढि़यों की चौड़ाई 1.2 मीटर होनी चाहिए।
5-आने और जाने के लिए अलग द्वार होना चाहिए
नई दिल्ली में हादसे के बाद भी नहीं चेत रहे अस्पताल संचालक
उरई। नई दिल्ली में शिशु केयर अस्पताल में आगजनी से सात नवजात की मौत के बाद भी अस्पताल संचालक चेत नहीं रहे हैं। सरकारी और निजी अस्पतालों में आगजनी से बचाव के इंतजाम में लापरवाही बरती जा रही है। जिले के सरकारी और निजी अस्पतालों में अग्निकांड होने पर बचाव के पर्याप्त इंतजाम नहीं है। कई अस्पताल और होटलों में अग्निशमन विभाग की एनओसी नही है। एनओसी लेने में सबसे बड़ी दिक्कत यह है कि वहां सेटबैक एरिया छोड़ना पड़ता है। इसमें बिल्डिंग के चारों ओर दमकल की गाड़ियों के आने जाने की जगह छोड़नी पड़ती है लेकिन जगह ऐसा नहीं किया गया है। कई अस्पतालों का नक्शा भी मानक के अनुसार नहीं है।
इस वक्त 25 नर्सिंग होम पंजीकरण है। पंजीकरण ऑनलाइन होते है, जिसमें अग्निशमन विभाग की एनओसी भी लगाई जाती है। जिसमें अग्निशमन विभाग की एनओसी है, उनका नवीनीकरण भी कर दिया जाता है। पांच आवेदनों की जांच चल रही है।
डॉ. एनडी शर्मा, सीएमओ, जालौन
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आग से बचाव के मानक अधूरे, निजी अस्पतालों के कागजात पूरे
हादसों की राह देख रहा अग्निशमन विभाग, मानकों को ताक पर रखकर जारी कर दिए गए अनापत्ति प्रमाणपत्र
कई अस्पताल फायर एनओसी बिना संचालित, जहां एनओसी वहां पर भी मानक के अनुरूप नहीं मिले उपकरण
संवाद न्यूज एजेंसी
उरई। शहर में आग से बचाव के लिए निजी अस्पतालों को अग्निशमन विभाग से एनओसी लेना आवश्यक है। इसके बावजूद शहर के कई निजी अस्पताल बिना फायर विभाग की एनओसी के संचालित हैं। जिन निजी अस्पतालों में फायर एनओसी जारी की गई है ,वहां भी आग से बचाव के मजबूत इंतजाम देखने को नहीं मिले। विभाग की गाइडलाइन को दरकिनार कर कई निजी अस्पतालों की फायर एनओसी आंख बंद करके जारी कर दी गई। अधिकतर अस्पतालों की छत पर पानी के पर्याप्त इंतजाम नहीं है। वहीं, फायर सेफ्टी उपकरणों की जांच न होने से वह भी धूल खा रहे हैं।
अग्निशमन विभाग के जरिए जनपद में 25 निजी अस्पतालों को एनओसी जारी की गई है। वहीं, इससे कहीं ज्यादा छोटे-बड़े निजी अस्पताल बिना एनओसी के संचालित हैं। कई अस्पताल जिनमें फायर एनओसी दी गई वहां पर भी आग से बचाव के पुख्ता इंतजाम नहीं दिखाई दिए। शहर के इंदिरानगर में संचालित गौरी अस्पताल में निकास का एक ही द्वार दिखाई दिया। पानी का पर्याप्त इंतजाम नहीं दिखाई दिया। साथ ही फायर सेफ्टी के उपकरण भी नहीं दिखाई दिए। मानकों की बात करें तो किसी भी अस्पताल की छत पर वाटर टैंक की क्षमता 20 हजार लीटर होनी चाहिए। यदि इमारत दो मंजिला है तो उसमें 5 हजार लीटर क्षमता का पानी अलग से भंडारित रहना चाहिए। चार मंजिल की इमारत में 20 हजार लीटर पानी रिजर्व होना चाहिए। लेकिन पड़ताल के दौरान मौके पर कहीं भी इतना पानी स्टोर नहीं मिला।
शहर के शिव हॉस्पिटल बगैर फायर एनओसी के संचालित मिला। संवाद न्यूज एजेंसी की टीम के पूछे जाने पर वहां के संचालक डॉ शिवकुमार ने बताया कि फायर एनओसी के लिए आवेदन किया है लेकिन अभी मिल नहीं पाई है। हॉस्पिटल क्यों खुला है इसका जवाब नहीं दे पाए। शहर के रामा हॉस्पिटल में फायर सेफ्टी के लिए लगाए गए पाइप नजर आए ,छत के ऊपर पानी के लिए 500 लीटर क्षमता की छह पानी की टंकिया दिखाई दीं। जो मानक के अनुरूप नहीं पाई गईं।
वर्जन-
जनपद में 25 निजी अस्पतालों के फायर एनओसी जारी की गई है। जिनकी समय समय पर पड़ताल भी की जाती है। चार मंजिला अस्पतालों को 20 हजार लीटर पानी रखने के नियम बने हैं। वहीं, दो मंजिला इमारत के लिए 5 हजार लीटर पानी रखना अनिवार्य है। जिन्हें एनओसी दी गई है उनके यहां यदि नियमों का पालन नहीं दिख रहा है तो जांच कराई जाएगी। -चंद्रशेखर यादव, अग्निशमन अधिकारी
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करमेर निवासी दुकानदार वीरसिंह ने बताया कि वह रात को दुकान बंद कर घर चले गए थे। अस्पताल की बिल्डिंग में दो दुकानें हैं। एक दुकान में फाइबर क्राकरी और गिफ्ट का सामान तो दूसरी में फोटो स्टूडियो और शादी समारोह में काम आने वाला सामान रखते हैं। रात ढाई बजे दुकान के सामने रहने वाले एक व्यक्ति ने दुकान से धुआं निकलता देखाकर सूचना दी।
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बताया कि जब वह पहुंचे तो दोनों दुकानों की शटर के नीचे से आग की लपटें निकल रही थी। उन्होंने दमकल को सूचना दी तो दो दमकलों ने आग पर काबू पाया। आग बुझने के बाद देखा कि दुकान से ही सटे नगरीय पीएचसी के प्रसव कक्ष में भी आग पहुंच गई थी। इस पर उन्होंने तत्काल अस्पताल के स्टाफ को सूचना दी। आगजनी में दुकानदार ने दस लाख से अधिक का नुकसान बताया है।
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वहीं, अस्पताल के प्रसव कक्ष में लगी आग से लकड़ी का दरवाजा, दो मेज, डिलीवरी टेबल, वजन मशीन, प्रसव रजिस्टर, बैनर के अलावा कई उपकरण, प्रचार प्रसार संंबंधी कागजात, बिजली के उपकरण, वायरिंग आदि जलकर राख हो गए। गनीमत यह रही कि जिस वक्त आगजनी की घटना हुई, उस वक्त कोई प्रसूता भर्ती नहीं थी। प्रभारी चिकित्साधिकारी डॉ. विष्णु ने बताया कि पूरी रिपोर्ट बनाकर सीएमओ कार्यालय भेजी गई है। उधर, शहरी स्वास्थ्य समन्वयक संजीव चंदेरिया भी मौके पर पहुंचे और उन्हें नुकसान का जायजा लिया। अस्पताल स्टाफ ने लाखों के नुकसान की बात कही है।
नहीं दिखे आग से बचाव के इंतजाम
उरई। नगरीय पीएचसी में आग से बचाव के पुख्ता इंतजाम नहीं दिखे। फायर सिलिंडर एक्सपायरी डेट का मिला। इस पर शहरी स्वास्थ्य समन्वयक संजीव चंदेरिया ने नाराजगी जताते हुए रोगी कल्याण समिति के फायर सिलिंडर की रिफलिंग कराने के निर्देश दिए। (संवाद)
आग से बचाव के लिए यह होने चाहिए इंतजाम
1-अस्पताल में स्प्रिंकलर, फायर अलार्म, पानी की पाइप लाइन जरूरी।
2-पांच हजार लीटर क्षमता की पानी की टंकी छत पर होना जरूरी।
3-आकस्मिक स्थिति में बाहर निकलने के लिए गेट होना जरूरी।
4-रैंप और सीढि़यों की चौड़ाई 1.2 मीटर होनी चाहिए।
5-आने और जाने के लिए अलग द्वार होना चाहिए
नई दिल्ली में हादसे के बाद भी नहीं चेत रहे अस्पताल संचालक
उरई। नई दिल्ली में शिशु केयर अस्पताल में आगजनी से सात नवजात की मौत के बाद भी अस्पताल संचालक चेत नहीं रहे हैं। सरकारी और निजी अस्पतालों में आगजनी से बचाव के इंतजाम में लापरवाही बरती जा रही है। जिले के सरकारी और निजी अस्पतालों में अग्निकांड होने पर बचाव के पर्याप्त इंतजाम नहीं है। कई अस्पताल और होटलों में अग्निशमन विभाग की एनओसी नही है। एनओसी लेने में सबसे बड़ी दिक्कत यह है कि वहां सेटबैक एरिया छोड़ना पड़ता है। इसमें बिल्डिंग के चारों ओर दमकल की गाड़ियों के आने जाने की जगह छोड़नी पड़ती है लेकिन जगह ऐसा नहीं किया गया है। कई अस्पतालों का नक्शा भी मानक के अनुसार नहीं है।
इस वक्त 25 नर्सिंग होम पंजीकरण है। पंजीकरण ऑनलाइन होते है, जिसमें अग्निशमन विभाग की एनओसी भी लगाई जाती है। जिसमें अग्निशमन विभाग की एनओसी है, उनका नवीनीकरण भी कर दिया जाता है। पांच आवेदनों की जांच चल रही है।
डॉ. एनडी शर्मा, सीएमओ, जालौन
आग से बचाव के मानक अधूरे, निजी अस्पतालों के कागजात पूरे
हादसों की राह देख रहा अग्निशमन विभाग, मानकों को ताक पर रखकर जारी कर दिए गए अनापत्ति प्रमाणपत्र
कई अस्पताल फायर एनओसी बिना संचालित, जहां एनओसी वहां पर भी मानक के अनुरूप नहीं मिले उपकरण
संवाद न्यूज एजेंसी
उरई। शहर में आग से बचाव के लिए निजी अस्पतालों को अग्निशमन विभाग से एनओसी लेना आवश्यक है। इसके बावजूद शहर के कई निजी अस्पताल बिना फायर विभाग की एनओसी के संचालित हैं। जिन निजी अस्पतालों में फायर एनओसी जारी की गई है ,वहां भी आग से बचाव के मजबूत इंतजाम देखने को नहीं मिले। विभाग की गाइडलाइन को दरकिनार कर कई निजी अस्पतालों की फायर एनओसी आंख बंद करके जारी कर दी गई। अधिकतर अस्पतालों की छत पर पानी के पर्याप्त इंतजाम नहीं है। वहीं, फायर सेफ्टी उपकरणों की जांच न होने से वह भी धूल खा रहे हैं।
अग्निशमन विभाग के जरिए जनपद में 25 निजी अस्पतालों को एनओसी जारी की गई है। वहीं, इससे कहीं ज्यादा छोटे-बड़े निजी अस्पताल बिना एनओसी के संचालित हैं। कई अस्पताल जिनमें फायर एनओसी दी गई वहां पर भी आग से बचाव के पुख्ता इंतजाम नहीं दिखाई दिए। शहर के इंदिरानगर में संचालित गौरी अस्पताल में निकास का एक ही द्वार दिखाई दिया। पानी का पर्याप्त इंतजाम नहीं दिखाई दिया। साथ ही फायर सेफ्टी के उपकरण भी नहीं दिखाई दिए। मानकों की बात करें तो किसी भी अस्पताल की छत पर वाटर टैंक की क्षमता 20 हजार लीटर होनी चाहिए। यदि इमारत दो मंजिला है तो उसमें 5 हजार लीटर क्षमता का पानी अलग से भंडारित रहना चाहिए। चार मंजिल की इमारत में 20 हजार लीटर पानी रिजर्व होना चाहिए। लेकिन पड़ताल के दौरान मौके पर कहीं भी इतना पानी स्टोर नहीं मिला।
शहर के शिव हॉस्पिटल बगैर फायर एनओसी के संचालित मिला। संवाद न्यूज एजेंसी की टीम के पूछे जाने पर वहां के संचालक डॉ शिवकुमार ने बताया कि फायर एनओसी के लिए आवेदन किया है लेकिन अभी मिल नहीं पाई है। हॉस्पिटल क्यों खुला है इसका जवाब नहीं दे पाए। शहर के रामा हॉस्पिटल में फायर सेफ्टी के लिए लगाए गए पाइप नजर आए ,छत के ऊपर पानी के लिए 500 लीटर क्षमता की छह पानी की टंकिया दिखाई दीं। जो मानक के अनुरूप नहीं पाई गईं।
वर्जन-
जनपद में 25 निजी अस्पतालों के फायर एनओसी जारी की गई है। जिनकी समय समय पर पड़ताल भी की जाती है। चार मंजिला अस्पतालों को 20 हजार लीटर पानी रखने के नियम बने हैं। वहीं, दो मंजिला इमारत के लिए 5 हजार लीटर पानी रखना अनिवार्य है। जिन्हें एनओसी दी गई है उनके यहां यदि नियमों का पालन नहीं दिख रहा है तो जांच कराई जाएगी। -चंद्रशेखर यादव, अग्निशमन अधिकारी