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पंचनद बैराज से बढ़ेंगे रोजगार के अवसर
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रामपुरा की पचनद नदी का दृश्य।
- फोटो : ORAI
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रामपुरा। यमुना, चंबल, सिंध, क्वारी और पहूज जैसी पांच नदियों के संगम पचनद बैराज पर बहुप्रतीक्षित बैराज बनने की स्वीकृति से सीमावर्ती इलाके के ग्रामीणों में खुशी है। परियोजना पर 2600 करोड़ रुपये की लागत आएगी। परियोजना पूरी होने पर जालौन, इटावा, औरैया, कानपुर देहात की हजारों हेक्टेयर सिंचित भूमि को सिंचित किए जाने के लिए नहरें निकाली जाएंगी, जिससे यहां कृषि क्रांति के साथ पर्यटन उद्योग विकसित होगा। इससे यहां के युवाओं के लिए रोजगार नए अवसर प्राप्त होंगे। साथ ही सिंचाई के पानी की समस्या का निदान होने से आर्थिक समृद्धि में इजाफा होगा। भूगर्भीय जलस्तर स्तर बढ़ने से पेयजल संकट का स्थायी समाधान भी निकलेगा।
संगम स्थल पंचनद के तट पर अनेक धार्मिक पौराणिक स्थल हैं, जिसका विवरण विभिन्न ग्रंथ-पुराणों में मिलता है। हालांकि यह क्षेत्र दस्यु प्रभावित होने से विकास से अछूता रहा है। आसपास क्षेत्र के युवक दूर शहरों में जाकर मजदूरी करने को विवश रहे हैं। अब योगी सरकार ने पंचनद को पर्यटन क्षेत्र घोषित किया। इससे क्षेत्र में विकास की संभावनाएं बलवती हो गई हैं। पर्यटन क्षेत्र के तौर पर विकसित होने से युवाओं को रोजगार के नए अवसर भी उपलब्ध होंगे। साथ ही सिंचाई के लिए भी किसानों को जूझना नहीं पड़ेगा।
बता दें कि वर्ष 1996 में तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने इटावा की जनसभा में पंचनद पर बांध बनाने की योजना की घोषणा कर ग्रामीण इलाके के लोगों में विकास की आशा का दीपक जलाया था, लेकिन इस दिशा में घोषणाओं के अलावा कुछ नहीं हुआ। एक जनवरी को प्रदेश के प्रमुख सचिव एवं सिंचाई विभाग के प्रमुख अभियंता ने पंचनद बैराज की लगभग 2597 करोड़ रुपये की रिपोर्ट मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के सामने रखी थी। दो जनवरी को मुख्यमंत्री कार्यालय के ट्विटर हैंडल से ट्वीट में बताया गया था कि पंचनद बैराज परियोजना से औरैया, कानपुर देहात व जालौन में सिंचाई क्षमता में वृद्धि होगी।
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माधौगढ़ विधायक मूलचंद्र निरंजन का कहना है कि इस परियोजना को लेकर मुख्यमंत्री गंभीर हैं। उन्होंने बताया कि इस परियोजना से 64950 हेक्टेयर क्षेत्र के लगभग एक लाख किसानों को सिंचाई का लाभ मिलेगा। साथ ही मत्स्य पालन, पर्यटन व परिवहन को बढ़ावा मिलेगा। बुंदेलखंड, कानपुर देहात व औरैया में उपेक्षित पड़े क्षेत्र को सूखे से मुक्ति मिलेगी।
ये बैराज यमुना, क्वारी, पहुंज, सिंधु, चंबल के संगम स्थल पर बनेगा। औरैया जिले की 10501 हेक्टेयर, कानपुर देहात की 39718 हेक्टेयर, जालौन की 14731 हेक्टेयर असिंचित भूमि को लाभ मिलेगा। परियोजना प्रारंभ होने का वर्ष 2021-22 दर्शाया गया है। जालौन में जगम्मनपुर व औरैया के अजीतमल के बीच बैराज पुल के निर्माण से सीधा परिवहन हो सकेगा। बैराज से भोगनीपुर शाखा को जोडने वाली बाईं पंप कैनाल 13 किलोमीटर व जालौन जिले की कुठौंद शाखा को जोड़ने वाली दाईं पंप कैनाल 12 किलोमीटर लंबी होगी।
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संगम स्थल पंचनद के तट पर अनेक धार्मिक पौराणिक स्थल हैं, जिसका विवरण विभिन्न ग्रंथ-पुराणों में मिलता है। हालांकि यह क्षेत्र दस्यु प्रभावित होने से विकास से अछूता रहा है। आसपास क्षेत्र के युवक दूर शहरों में जाकर मजदूरी करने को विवश रहे हैं। अब योगी सरकार ने पंचनद को पर्यटन क्षेत्र घोषित किया। इससे क्षेत्र में विकास की संभावनाएं बलवती हो गई हैं। पर्यटन क्षेत्र के तौर पर विकसित होने से युवाओं को रोजगार के नए अवसर भी उपलब्ध होंगे। साथ ही सिंचाई के लिए भी किसानों को जूझना नहीं पड़ेगा।
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बता दें कि वर्ष 1996 में तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने इटावा की जनसभा में पंचनद पर बांध बनाने की योजना की घोषणा कर ग्रामीण इलाके के लोगों में विकास की आशा का दीपक जलाया था, लेकिन इस दिशा में घोषणाओं के अलावा कुछ नहीं हुआ। एक जनवरी को प्रदेश के प्रमुख सचिव एवं सिंचाई विभाग के प्रमुख अभियंता ने पंचनद बैराज की लगभग 2597 करोड़ रुपये की रिपोर्ट मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के सामने रखी थी। दो जनवरी को मुख्यमंत्री कार्यालय के ट्विटर हैंडल से ट्वीट में बताया गया था कि पंचनद बैराज परियोजना से औरैया, कानपुर देहात व जालौन में सिंचाई क्षमता में वृद्धि होगी।
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माधौगढ़ विधायक मूलचंद्र निरंजन का कहना है कि इस परियोजना को लेकर मुख्यमंत्री गंभीर हैं। उन्होंने बताया कि इस परियोजना से 64950 हेक्टेयर क्षेत्र के लगभग एक लाख किसानों को सिंचाई का लाभ मिलेगा। साथ ही मत्स्य पालन, पर्यटन व परिवहन को बढ़ावा मिलेगा। बुंदेलखंड, कानपुर देहात व औरैया में उपेक्षित पड़े क्षेत्र को सूखे से मुक्ति मिलेगी।
ये बैराज यमुना, क्वारी, पहुंज, सिंधु, चंबल के संगम स्थल पर बनेगा। औरैया जिले की 10501 हेक्टेयर, कानपुर देहात की 39718 हेक्टेयर, जालौन की 14731 हेक्टेयर असिंचित भूमि को लाभ मिलेगा। परियोजना प्रारंभ होने का वर्ष 2021-22 दर्शाया गया है। जालौन में जगम्मनपुर व औरैया के अजीतमल के बीच बैराज पुल के निर्माण से सीधा परिवहन हो सकेगा। बैराज से भोगनीपुर शाखा को जोडने वाली बाईं पंप कैनाल 13 किलोमीटर व जालौन जिले की कुठौंद शाखा को जोड़ने वाली दाईं पंप कैनाल 12 किलोमीटर लंबी होगी।