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मनुष्य को अपना धर्म व संस्कार नहीं छोडना चाहिए

Sun, 06 Mar 2022 11:38 PM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Sun, 06 Mar 2022 11:38 PM IST
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ग्राम गोरा करनपुर में भागवत कथा कहते पं. सागरकृष्ण शास्त्री - फोटो : ORAI
जालौन। नगर के बड़ी माता मंदिर परिसर पर चल रही श्रीमद्भागवत के अंतिम दिन रविवार को कथा व्यास देवांसजी महाराज ने कहा कि मनुष्य को धर्म व संस्कार नहीं छोड़ना चाहिए।
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उन्होंने बताया कि कथा सुनने से मानव जीवन में संस्कार का उदय होता है। जीवन में कितनी भी विकट परिस्थिति आए। मुनष्य को अपना धर्म व संस्कार नहीं छोड़ना चाहिए। ऐसे ही मनुष्य जीवन के रहस्य को समझ सकते हैं। कहा कि जिसकी भगवान के चरणों में प्रगाढ़ प्रीति है। वहीं जीवन धन्य है। ईश्वर ने विभिन्न लीलाओं के माध्यम से जो आदर्श प्रस्तुत किया, उसे हर मनुष्य को ग्रहण करना चाहिए। ऐसा करने से जीवन मूल्यों के बारे में जानकारी मिलने के साथ-साथ अपने कर्तव्य को भी समझा जा सकता है।
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उन्होंने सुदामा चरित्र की कथा का वर्णन करते हुए कहा कि मित्रता कैसे निभाई जाए। यह भगवान श्रीकृष्ण व सुदामा से सीखिए। सुदामा पत्नी के आग्रह पर मित्र श्रीकृष्ण से मिलने द्वारिका पहुंचे। महल में पहुंचने पर श्रीकृष्ण ने दरवाजे पर ही उनका स्वागत किया। कृष्ण ने सुदामा को अपने राज सिंहासन पर बैठाया उनके चरण धोए और बिन मांगे ही उन्हें सब कुछ दे दिया। इस मौके पर पारीक्षित भरत सक्सेना, सौरभ, रामजी, अनिल कुमार, कल्लू, दिव्याशु महाराज, दीपक, शंकर महंत आदि मौजूद रहें।
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