{"_id":"614783b28ebc3e3ebf36b966","slug":"mla-river-flud-dm-fortune-hospital-orai-news-knp6531884141","type":"story","status":"publish","title_hn":"आठ करोड रुपए की लागत से होगा रानी किले का जीणोद्वार","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
आठ करोड रुपए की लागत से होगा रानी किले का जीणोद्वार
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
कालपी। किले घाट पर स्थापित रानी लक्ष्मीबाई के किले को संरक्षण प्रदान करने के लिये उत्तर प्रदेश पर्यटन विभाग की ओर से कार्य योजना तैयार की गई है। स्थानीय भाजपा विधायक कुंवर नरेंद्र पाल सिंह जादौन ने बताया कि ऐतिहासिक किले को यमुना नदी के पानी की कटान से बचाने के लिए आठ करोड़ रुपये की लागत से कार्य कराया जाएगा। बजट आवंटित होते ही काम शुरू हो जाएगा।
मालूम हो कि यमुना नदी के किनारे प्राचीन व ऐतिहासिक महत्व का प्राचीन किला बना हुआ है। मराठा शासन काल में इसको कोषागार के रूप में प्रयोग किया जाता था। प्रथम स्वतंत्रता संग्राम के दौरान अंग्रेजी शासन से युद्ध करने के लिए वीरांगना रानी लक्ष्मीबाई, तात्या टोपे, नाना साहब आदि क्रांतिकारियों ने मंत्रणा करके संघर्ष करने का बिगुल फूंका था। वर्तमान में प्राचीन किला वन विभाग के नियंत्रण में है। दरअसल ऊंचाई में बने इस किले से सटकर यमुना नदी की जलधारा बहती है। यमुना नदी की जलधारा बहने तथा हर साल बाढ़ के प्रकोप के कारण दुर्ग के परिसर की भूमि दिन पर दिन कटाव होने से किला क्षतिग्रस्त होने की संभावना है। इसी को ध्यान रख नगर वासियों ने किले को संरक्षित करने की मांग उठती रही है। भाजपा विधायक कुंवर नरेंद्र पाल सिंह जादौन ने चंदेल कालीन दुर्ग को संरक्षित करने तथा यमुना नदी येबचाने की लिए शासन तथा मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को अवगत कराया था। विधायक ने बताया कि उत्तर प्रदेश राज्य के द्वारा कालपी के चंदेल कालीन दुर्ग का सर्वेक्षण कर लिया गया है। उन्होंने बताया कि इसमें करीब 8 करोड़ रुपये खर्च होंगे। विधायक के मुताबिक शासन स्तर से बजट में धन राशि आवंटित कराने के लिए पहल चल रही है उन्होंने बताया जल्द ही बजट पास हो जाएगा जल्द ही चंदेल कालीन दुर्ग के संरक्षण के लिए कार्य भी शुरू हो जाएगा। इस कार्य से प्राचीन स्मारक का सरंक्षण होगा।
विज्ञापन
मालूम हो कि यमुना नदी के किनारे प्राचीन व ऐतिहासिक महत्व का प्राचीन किला बना हुआ है। मराठा शासन काल में इसको कोषागार के रूप में प्रयोग किया जाता था। प्रथम स्वतंत्रता संग्राम के दौरान अंग्रेजी शासन से युद्ध करने के लिए वीरांगना रानी लक्ष्मीबाई, तात्या टोपे, नाना साहब आदि क्रांतिकारियों ने मंत्रणा करके संघर्ष करने का बिगुल फूंका था। वर्तमान में प्राचीन किला वन विभाग के नियंत्रण में है। दरअसल ऊंचाई में बने इस किले से सटकर यमुना नदी की जलधारा बहती है। यमुना नदी की जलधारा बहने तथा हर साल बाढ़ के प्रकोप के कारण दुर्ग के परिसर की भूमि दिन पर दिन कटाव होने से किला क्षतिग्रस्त होने की संभावना है। इसी को ध्यान रख नगर वासियों ने किले को संरक्षित करने की मांग उठती रही है। भाजपा विधायक कुंवर नरेंद्र पाल सिंह जादौन ने चंदेल कालीन दुर्ग को संरक्षित करने तथा यमुना नदी येबचाने की लिए शासन तथा मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को अवगत कराया था। विधायक ने बताया कि उत्तर प्रदेश राज्य के द्वारा कालपी के चंदेल कालीन दुर्ग का सर्वेक्षण कर लिया गया है। उन्होंने बताया कि इसमें करीब 8 करोड़ रुपये खर्च होंगे। विधायक के मुताबिक शासन स्तर से बजट में धन राशि आवंटित कराने के लिए पहल चल रही है उन्होंने बताया जल्द ही बजट पास हो जाएगा जल्द ही चंदेल कालीन दुर्ग के संरक्षण के लिए कार्य भी शुरू हो जाएगा। इस कार्य से प्राचीन स्मारक का सरंक्षण होगा।
विज्ञापन