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लघु सिंचाई विभाग के अभिलेख खंगाले
ब्यूरो/ अमर उजाला, उरई
Updated Fri, 18 Dec 2015 11:09 PM IST
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लघु सिंचाई विभाग में गहरी व मध्यम बोरिंग के कार्य में गड़बड़ी व 80 लाख
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के अनियमित भुगतान की शिकायत का मामला सुर्खियों में है। गुरुवार को लखनऊ
की टीम को जरूरत के दस्तावेज नहीं मिले। इसलिए शुक्रवार को अधीक्षण अभियंता
कार्यालय पहुंचे और जरूरी दस्तावेजों को लेकर चर्चा की। उनका कहना है कि
इस प्रकरण की जांच कई स्तरों से
की जा रही है। शिकायतों के साक्ष्य मिले तो इसमें जो भी दोषी होगा उस पर कार्रवाई तय है। लघु सिंचाई विभाग में कथित तौर पर हुए लाखों के हेरफेर के मामले में गुरुवार को लखनऊ से एक टीम जांच करने के लिए आई थी। इसके बाद शुक्रवार को अधीक्षण अभियंता देवेंद्र नाथ शुक्ला गोदाम स्थित कार्यालय पहुंचे। सूचना पाकर अवर अभियंता मूंगाराम भाष्कर भी
पहुंच गए। इसके बाद टीम को अभिलेख उपलब्ध कराने के मामले पर चर्चा हुई। इसके बाद उन्होंने भी शिकायतों के संदर्भ में कुछेक अभिलेखों को चेक किया। बता दें कि विभाग में बीते वर्ष कराई गई गहरी व मध्यम बोरिंग में नियमों को
नजरअंदाज किया गया। इसमें 80 लाख रुपये का भुगतान भी कर दिया गया। इसकी शिकायत कमिश्नर से लेकर शासन और विभाग के आला अधिकारियों से की गई। कई शिकायतें हुईं तो मामले को शासन ने भी संज्ञान में लिया। मामले की सत्यता जांचने के लिए टीम भेजी गई है। फिलहाल अधिकारी इस प्रकरण पर पर्दा डालने के लिए पुर जोर प्रयास करते देखे जा रहे है।
कहां गई पत्रावलियां ?
गहरी व मध्यम बोरिंग में बड़े घालमेल की शिकायत है। बीते वर्ष राष्ट्रीय कृषि विकास योजना के तहत किसानों को सिंचाई के संसाधन मुहैया कराने के उद्देश्य से 131 बोरिंग का लक्ष्य दिया गया था। विभागीय अधिकारियों ने लक्ष्य को पूरा करने में नियमों की अनदेखी की। विभाग के कुछेक अधिकारी एवं विभाग से जुड़े बाहरी लोगों ने ऐसी मनमर्जी चलाई कि आज
मामला जांच तक आ पहुंचा। जनपद में 20 तो ऐसे किसान है जिनकी पत्रावलियां ही विभाग के पास नहीं हैं। बीते वर्ष में ही जिला योजना से 10 बोरिंग का लक्ष्य दिया गया जिसमें भी घालमेल की शिकायत है।
पहले बोरिंग, फिर जमा कराया पैसा
मामले में कई पेच ऐसे हैं जो विभाग के लिए परेशानी का विषय बने हुए हैं। 50 ऐसी बोरिंग हैं जिनको मनमर्जी से किया गया। गहरी बोरिंग में 1.25 से 1.50 लाख रुपये तक किसान से जमा कराने और एक लाख रुपये अनुदान दिए जाने के
शासनादेश था। इसमें किसान को पहले पैसा जमा करना होता है और बाद में बोरिंग की जाती। यहां अधिकारियों की मिलीभगत से बगैर पैसा जमा कराए बोरिंग कर दी गई और बाद में पैसा किसान से जमा कराया गया। इस प्रकरण पर पर्दा डालने की कोशिश हो रही है। यह भी प्रकरण शिकायत में शामिल है।
किसी ने गड़बड़ की है तो कार्रवाई होगी
लघु सिंचाई विभाग के अधीक्षण अभियंता देवेंद्र नाथ शुक्ला ने शुक्रवार को गोदाम स्थित अधिशासी अभियंता कार्यालय में निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने अमर उजाला से खास बातचीत की और कहा कि शिकायतें जो हुई है वह सभी मिथ्या
तो नहीं हो सकती। कुछ तो है जिसको आधार बनाकर लोगों ने शिकायत की है। एक दो नहीं कई शिकायतें है। कई स्तर से जांच भी की जा रही है। जांच में सत्यापित जो बिंदु होंगे उसी आधार पर कार्रवाई तय होगी। कुल मिलाकर गड़बड़ी अगर किसी ने की है तो उस पर कार्रवाई होगी।
की जा रही है। शिकायतों के साक्ष्य मिले तो इसमें जो भी दोषी होगा उस पर कार्रवाई तय है। लघु सिंचाई विभाग में कथित तौर पर हुए लाखों के हेरफेर के मामले में गुरुवार को लखनऊ से एक टीम जांच करने के लिए आई थी। इसके बाद शुक्रवार को अधीक्षण अभियंता देवेंद्र नाथ शुक्ला गोदाम स्थित कार्यालय पहुंचे। सूचना पाकर अवर अभियंता मूंगाराम भाष्कर भी
पहुंच गए। इसके बाद टीम को अभिलेख उपलब्ध कराने के मामले पर चर्चा हुई। इसके बाद उन्होंने भी शिकायतों के संदर्भ में कुछेक अभिलेखों को चेक किया। बता दें कि विभाग में बीते वर्ष कराई गई गहरी व मध्यम बोरिंग में नियमों को
नजरअंदाज किया गया। इसमें 80 लाख रुपये का भुगतान भी कर दिया गया। इसकी शिकायत कमिश्नर से लेकर शासन और विभाग के आला अधिकारियों से की गई। कई शिकायतें हुईं तो मामले को शासन ने भी संज्ञान में लिया। मामले की सत्यता जांचने के लिए टीम भेजी गई है। फिलहाल अधिकारी इस प्रकरण पर पर्दा डालने के लिए पुर जोर प्रयास करते देखे जा रहे है।
कहां गई पत्रावलियां ?
गहरी व मध्यम बोरिंग में बड़े घालमेल की शिकायत है। बीते वर्ष राष्ट्रीय कृषि विकास योजना के तहत किसानों को सिंचाई के संसाधन मुहैया कराने के उद्देश्य से 131 बोरिंग का लक्ष्य दिया गया था। विभागीय अधिकारियों ने लक्ष्य को पूरा करने में नियमों की अनदेखी की। विभाग के कुछेक अधिकारी एवं विभाग से जुड़े बाहरी लोगों ने ऐसी मनमर्जी चलाई कि आज
मामला जांच तक आ पहुंचा। जनपद में 20 तो ऐसे किसान है जिनकी पत्रावलियां ही विभाग के पास नहीं हैं। बीते वर्ष में ही जिला योजना से 10 बोरिंग का लक्ष्य दिया गया जिसमें भी घालमेल की शिकायत है।
पहले बोरिंग, फिर जमा कराया पैसा
मामले में कई पेच ऐसे हैं जो विभाग के लिए परेशानी का विषय बने हुए हैं। 50 ऐसी बोरिंग हैं जिनको मनमर्जी से किया गया। गहरी बोरिंग में 1.25 से 1.50 लाख रुपये तक किसान से जमा कराने और एक लाख रुपये अनुदान दिए जाने के
शासनादेश था। इसमें किसान को पहले पैसा जमा करना होता है और बाद में बोरिंग की जाती। यहां अधिकारियों की मिलीभगत से बगैर पैसा जमा कराए बोरिंग कर दी गई और बाद में पैसा किसान से जमा कराया गया। इस प्रकरण पर पर्दा डालने की कोशिश हो रही है। यह भी प्रकरण शिकायत में शामिल है।
किसी ने गड़बड़ की है तो कार्रवाई होगी
लघु सिंचाई विभाग के अधीक्षण अभियंता देवेंद्र नाथ शुक्ला ने शुक्रवार को गोदाम स्थित अधिशासी अभियंता कार्यालय में निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने अमर उजाला से खास बातचीत की और कहा कि शिकायतें जो हुई है वह सभी मिथ्या
तो नहीं हो सकती। कुछ तो है जिसको आधार बनाकर लोगों ने शिकायत की है। एक दो नहीं कई शिकायतें है। कई स्तर से जांच भी की जा रही है। जांच में सत्यापित जो बिंदु होंगे उसी आधार पर कार्रवाई तय होगी। कुल मिलाकर गड़बड़ी अगर किसी ने की है तो उस पर कार्रवाई होगी।