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Jalaun News: बार-बार लटक रहीं चिकित्सा प्रतिपूर्ति की फाइलें
Sat, 03 May 2025 01:10 AM IST
कानपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, जालौन
संवाद न्यूज एजेंसी, जालौन
Updated Sat, 03 May 2025 01:10 AM IST
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उरई। चिकित्सा प्रतिपूर्ति की फाइलें लटकाने को लेकर पेंशनरों ने आपत्ति जताई है। उन्होंने मामले से डीएम को अवगत कराया है। इस पर डीएम ने जिला अस्पताल के सीएमएस से नाराजगी जाहिर की है। चार-चार महीने से चिकित्सा प्रतिपूर्ति की फाइलें लटकाने के कारण कर्मचारी और पेंशनर चिकित्सक और बाबुओं के चक्कर काट रहे हैं।
चिकित्सा प्रतिपूर्ति के मामले में इलाज कराने पर सरकारी विभाग में सेवारत कर्मचारियों और पेंशनरों को पीजीआई की निर्धारित रेट लिस्ट के आधार पर भुगतान किया जाता है। इसमें पचास हजार तक के मामलों की जांच जिला अस्पताल के चिकित्सक और सीएमएस द्वारा की जाती है और इससे ऊपर के मामले की जांच सीएमओ द्वारा नियुक्त चिकित्सक और सीएमओ या नोडल अधिकारी द्वारा की जाती है।
जिला अस्पताल में जांच के लिए डॉ. अरविंद श्रीवास्तव को लगाया गया है। जबकि सीएमओ स्तर के चिकित्सा प्रतिपूर्ति के मामलों के लिए डॉ. कौशल किशोर को जिम्मेदारी सौंपी गई है। जिला अस्पताल और सीएमओ कार्यालय दोनों की ओर से मामले लटकाए जाते हैं। पेंशनर और कर्मचारी बार बार डीएम स्तर पर भी शिकायत करते हैं। फिर भी सुधार नहीं हो रहा है। चिकित्सा प्रतिपूर्ति के लगातार मामले लटकाए जाने से नाराज डीएम राजेश कुमार पांडेय ने गुरुवार की देर शाम सीएमओ कार्यालय में छापा भी मारा था और चिकित्सा प्रतिपूर्ति के मामले को लेकर संबंधित लिपिक और सीएमओ से नाराजगी जताई थी और हिदायत दी थी कि चिकित्सा प्रतिपूर्ति के मामले बिना वजह लटकाए न जाए।
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सेवानिवृत्त कर्मचारी एवं पेंशनर्स एसोसिएशन के जिलाध्यक्ष हरगोविंद दयाल श्रीवास्तव और जिला मंत्री रामेश्वर दयाल कुशवाहा ने 11 अप्रैल को डीएम से शिकायत की थी कि जिला अस्पताल में सीएमएस स्तर पर चिकित्सा प्रतिपूर्ति के बिल महीनों लंबित रखे जाते हैं। कई बार अनावश्यक आपत्ति लगाकर बिल वापस भेज दिए जाते हैं। पेंशनरों की समस्या पर डीएम ने जिला अस्पताल के सीएमएस से नाराजगी जताते हुए बिलों के तत्काल भुगतान करने को कहा था।
डीएम की पहल पर सीएमएस ने पेंशनरों को अपने कार्यालय बुलाया और संबंधित चिकित्सक डॉ. अरविंद श्रीवास्तव से मिलने को कहा। जब वह अरविंद श्रीवास्तव से मिले तो उन्होंने अपना ठीकरा डाटा मैनेजर पर फोड़ दिया। कहा कि ऑपरेटर की लापरवाही से बिल समय से सत्यापित नहीं हो पाते हैं। इस मामले में डाटा मैनेजर धीरज ने भी पल्ला झाड़ते हुए सीएमएस को पत्र लिखा कि चिकित्सक डॉ. अरविंद खुद बिल लटकाते है और कर्मचारी और पेंशनरों को गुमराह कर उनका नाम लगा देते हैं। लिहाजा उन्हें इस काम से कार्यमुक्त किया जाए।
सख्ती के बावजूद नहीं दिख रहा सुधार
चिकित्सा प्रतिपूर्ति मामले को लेकर डीएम स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों से काफी नाराज हैं। एक अगस्त को डीएम ने सीएमओ कार्यालय में छापा मारा था। तब चिकित्सा प्रतिपूर्ति का मामला देखने वाले लिपिक जफर को फटकार लगाते हुए कार्रवाई की बात कही थी। इसके बावजूद जफर के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की गई। उन्हें डकोर और कालपी सीएचसी का चार्ज दे दिया गया था। लेकिन, जफर अपनी सीएचसी पर जाने की बजाय अभी भी मुख्यालय पर बैठते हैं। डीएम की सख्ती के बावजूद विभाग में सुधार नहीं दिखाई दे रहा है। जिला अस्पताल में ही 45 मामले लंबित है।
केस-1-
जिलाध्यक्ष खुद परेशान, कैसे हो सुधार
पेंशनर संघ के जिलाध्यक्ष हरगोविंद दयाल श्रीवास्तव का कहना है कि उनका खुद का मामला फरवरी माह से लंबित है। जब वह इस मामले में सीएमएस से मिले थे तो उन्होंने कहा था कि प्रतिपूर्ति के बिल में कमियां होने से बिल रोके जाते हैं। जबकि उन्होंने सीएमएस से कहा था कि जो भी वांछित दस्तावेज हो, उनकी सूची संबंधित विभागों को भेज दी जाए ताकि प्रतिपूर्ति के मामले में बिल सही होकर आए। इस तरह बिल लटकाना ठीक नहीं है।
केस-2
दो साल से भुगतान के चक्कर में भटक रहे
कृषि विभाग से सेवानिवृत्त लिपिक राजेंद्र सिंह निरंजन का कहना है कि उनका 29 हजार का बिल दो साल से लंबित है। वह कई बार अनुरोध कर चुके हैं। न्यूरोलॉजी संबंधित बीमारी के बिल है। उनका कानपुर में चल रहा है। वह 76 साल के हो चुके है। बार बार चक्कर लगाने में दिक्कत होती है। शिकायत की बावजूद कोई सुनवाई नहीं हो रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि पैसे न देने के कारण बिल रोका जाता है।
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चिकित्सा प्रतिपूर्ति के मामले में इलाज कराने पर सरकारी विभाग में सेवारत कर्मचारियों और पेंशनरों को पीजीआई की निर्धारित रेट लिस्ट के आधार पर भुगतान किया जाता है। इसमें पचास हजार तक के मामलों की जांच जिला अस्पताल के चिकित्सक और सीएमएस द्वारा की जाती है और इससे ऊपर के मामले की जांच सीएमओ द्वारा नियुक्त चिकित्सक और सीएमओ या नोडल अधिकारी द्वारा की जाती है।
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जिला अस्पताल में जांच के लिए डॉ. अरविंद श्रीवास्तव को लगाया गया है। जबकि सीएमओ स्तर के चिकित्सा प्रतिपूर्ति के मामलों के लिए डॉ. कौशल किशोर को जिम्मेदारी सौंपी गई है। जिला अस्पताल और सीएमओ कार्यालय दोनों की ओर से मामले लटकाए जाते हैं। पेंशनर और कर्मचारी बार बार डीएम स्तर पर भी शिकायत करते हैं। फिर भी सुधार नहीं हो रहा है। चिकित्सा प्रतिपूर्ति के लगातार मामले लटकाए जाने से नाराज डीएम राजेश कुमार पांडेय ने गुरुवार की देर शाम सीएमओ कार्यालय में छापा भी मारा था और चिकित्सा प्रतिपूर्ति के मामले को लेकर संबंधित लिपिक और सीएमओ से नाराजगी जताई थी और हिदायत दी थी कि चिकित्सा प्रतिपूर्ति के मामले बिना वजह लटकाए न जाए।
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सेवानिवृत्त कर्मचारी एवं पेंशनर्स एसोसिएशन के जिलाध्यक्ष हरगोविंद दयाल श्रीवास्तव और जिला मंत्री रामेश्वर दयाल कुशवाहा ने 11 अप्रैल को डीएम से शिकायत की थी कि जिला अस्पताल में सीएमएस स्तर पर चिकित्सा प्रतिपूर्ति के बिल महीनों लंबित रखे जाते हैं। कई बार अनावश्यक आपत्ति लगाकर बिल वापस भेज दिए जाते हैं। पेंशनरों की समस्या पर डीएम ने जिला अस्पताल के सीएमएस से नाराजगी जताते हुए बिलों के तत्काल भुगतान करने को कहा था।
डीएम की पहल पर सीएमएस ने पेंशनरों को अपने कार्यालय बुलाया और संबंधित चिकित्सक डॉ. अरविंद श्रीवास्तव से मिलने को कहा। जब वह अरविंद श्रीवास्तव से मिले तो उन्होंने अपना ठीकरा डाटा मैनेजर पर फोड़ दिया। कहा कि ऑपरेटर की लापरवाही से बिल समय से सत्यापित नहीं हो पाते हैं। इस मामले में डाटा मैनेजर धीरज ने भी पल्ला झाड़ते हुए सीएमएस को पत्र लिखा कि चिकित्सक डॉ. अरविंद खुद बिल लटकाते है और कर्मचारी और पेंशनरों को गुमराह कर उनका नाम लगा देते हैं। लिहाजा उन्हें इस काम से कार्यमुक्त किया जाए।
सख्ती के बावजूद नहीं दिख रहा सुधार
चिकित्सा प्रतिपूर्ति मामले को लेकर डीएम स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों से काफी नाराज हैं। एक अगस्त को डीएम ने सीएमओ कार्यालय में छापा मारा था। तब चिकित्सा प्रतिपूर्ति का मामला देखने वाले लिपिक जफर को फटकार लगाते हुए कार्रवाई की बात कही थी। इसके बावजूद जफर के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की गई। उन्हें डकोर और कालपी सीएचसी का चार्ज दे दिया गया था। लेकिन, जफर अपनी सीएचसी पर जाने की बजाय अभी भी मुख्यालय पर बैठते हैं। डीएम की सख्ती के बावजूद विभाग में सुधार नहीं दिखाई दे रहा है। जिला अस्पताल में ही 45 मामले लंबित है।
केस-1-
जिलाध्यक्ष खुद परेशान, कैसे हो सुधार
पेंशनर संघ के जिलाध्यक्ष हरगोविंद दयाल श्रीवास्तव का कहना है कि उनका खुद का मामला फरवरी माह से लंबित है। जब वह इस मामले में सीएमएस से मिले थे तो उन्होंने कहा था कि प्रतिपूर्ति के बिल में कमियां होने से बिल रोके जाते हैं। जबकि उन्होंने सीएमएस से कहा था कि जो भी वांछित दस्तावेज हो, उनकी सूची संबंधित विभागों को भेज दी जाए ताकि प्रतिपूर्ति के मामले में बिल सही होकर आए। इस तरह बिल लटकाना ठीक नहीं है।
केस-2
दो साल से भुगतान के चक्कर में भटक रहे
कृषि विभाग से सेवानिवृत्त लिपिक राजेंद्र सिंह निरंजन का कहना है कि उनका 29 हजार का बिल दो साल से लंबित है। वह कई बार अनुरोध कर चुके हैं। न्यूरोलॉजी संबंधित बीमारी के बिल है। उनका कानपुर में चल रहा है। वह 76 साल के हो चुके है। बार बार चक्कर लगाने में दिक्कत होती है। शिकायत की बावजूद कोई सुनवाई नहीं हो रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि पैसे न देने के कारण बिल रोका जाता है।