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Jalaun News: नमाज, रोजे की तरह जकात करना भी फर्ज
Sat, 08 Apr 2023 11:52 PM IST
कानपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, जालौन
संवाद न्यूज एजेंसी, जालौन
Updated Sat, 08 Apr 2023 11:52 PM IST
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फोटो संख्या- पेश इमाम रईस खान।
संवाद न्यूज एजेंसी।
कदौरा। रमजान माह में अल्लाह की रजामंदी के लिए लोग रोजा रखने के साथ पांच वक्त की नमाज भी अदा कर रहे हैं। मुबारक महीने में नमाज अदा करने के लिए लोगों की भीड़ मस्जिदों में उमड़ रही है।
जोहर की नमाज के दौरान पेश इमाम ने रोजेदारों से आमदनी का ढाई फीसदी हिस्सा गरीबों की मदद के लिए जकात में देने को सभी का फर्ज बताया। कहा कि नमाज और रोजे की तरह जकात करना भी फर्ज है।
कस्बे की शाही जामा मस्जिद के पेश इमाम रईस खान ने बताया कि साढ़े बावन तोला चांदी या फिर साढ़े सात तोला सोना अथवा इनके बराबर की रकम जिस मुसलमान के पास है। उस पर जकात देना फर्ज हो जाता है। एक साल का समय बीत जाने के बाद जकात दी जाती है।
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जकात को पूरे साल भर में कभी भी दिया जा सकता है। मगर अधिकतर जकात को रमजान माह में दिया जाता है। इस माह में जकात देने से ज्यादा लाभ मिलता है। जकात का सबसे पहला फर्ज रिश्तेदारों और पड़ोसियों पर है। रिश्तेदारों में कोई गरीब है तो उसको जकात दिया जा सकता है। पड़ोस में रहने वाले गरीब, यतीम, विधवा महिलाओं को जकात दी जा सकती है। इसके अलावा मदरसों में जहां पर यतीम बच्चे पढ़ते हों, वहां पर भी जकात दिया जाना चाहिए। उन्होंने मुल्क में अमन चैन की दुआ की।
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संवाद न्यूज एजेंसी।
कदौरा। रमजान माह में अल्लाह की रजामंदी के लिए लोग रोजा रखने के साथ पांच वक्त की नमाज भी अदा कर रहे हैं। मुबारक महीने में नमाज अदा करने के लिए लोगों की भीड़ मस्जिदों में उमड़ रही है।
जोहर की नमाज के दौरान पेश इमाम ने रोजेदारों से आमदनी का ढाई फीसदी हिस्सा गरीबों की मदद के लिए जकात में देने को सभी का फर्ज बताया। कहा कि नमाज और रोजे की तरह जकात करना भी फर्ज है।
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कस्बे की शाही जामा मस्जिद के पेश इमाम रईस खान ने बताया कि साढ़े बावन तोला चांदी या फिर साढ़े सात तोला सोना अथवा इनके बराबर की रकम जिस मुसलमान के पास है। उस पर जकात देना फर्ज हो जाता है। एक साल का समय बीत जाने के बाद जकात दी जाती है।
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जकात को पूरे साल भर में कभी भी दिया जा सकता है। मगर अधिकतर जकात को रमजान माह में दिया जाता है। इस माह में जकात देने से ज्यादा लाभ मिलता है। जकात का सबसे पहला फर्ज रिश्तेदारों और पड़ोसियों पर है। रिश्तेदारों में कोई गरीब है तो उसको जकात दिया जा सकता है। पड़ोस में रहने वाले गरीब, यतीम, विधवा महिलाओं को जकात दी जा सकती है। इसके अलावा मदरसों में जहां पर यतीम बच्चे पढ़ते हों, वहां पर भी जकात दिया जाना चाहिए। उन्होंने मुल्क में अमन चैन की दुआ की।