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Jalaun News: जर्जर हो रहा कालपी का पुराना यमुना पुल, टूटती रेलिंग से हादसे का खतरा
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कालपी। राष्ट्रीय राजमार्ग-27 पर स्थित कालपी का पुराना यमुना पुल इन दिनों बदहाली का शिकार होता जा रहा है। मरम्मत और नियमित रखरखाव के अभाव में पुल की रेलिंग जगह-जगह टूटकर गिरने लगी है, जिससे कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है। स्थानीय लोगों ने पुल की हालत पर चिंता जताते हुए शीघ्र मरम्मत की मांग उठाई है।
बताया गया कि 1970 के दशक में यमुना नदी पर बने इस पुल की आधारशिला तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने रखी थी। वर्ष 1980 में तत्कालीन ऊर्जा मंत्री राजा रणजीत सिंह जूदेव ने इसका उद्घाटन किया था। यह पुल लंबे समय तक उत्तर और दक्षिण भारत को जोड़ने वाला प्रमुख मार्ग रहा। बाद में राष्ट्रीय राजमार्ग-25 को राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण के अधीन कर फोरलेन परियोजना में शामिल किया गया और वर्तमान में इसका संचालन राष्ट्रीय राजमार्ग-27 के रूप में किया जा रहा है।
पुराने पुल के रखरखाव की जिम्मेदारी अब एनएचएआई के पास है लेकिन विभाग इस ओर गंभीर नजर नहीं आ रहा। पुल के रखरखाव का कार्य एनएचआईटी नामक कंपनी को सौंपा गया है, बावजूद इसके पुल की स्थिति लगातार खराब होती जा रही है। पुल की रेलिंग कई स्थानों पर क्षतिग्रस्त हो चुकी है और कुछ हिस्सों में टूटकर नीचे गिरने लगी है। भारी वाहन गुजरने पर रेलिंगें तेज आवाज के साथ हिलती हैं, जिससे पैदल गुजरने वाले लोग भयभीत हो जाते हैं। लोगों का कहना है कि समय रहते मरम्मत नहीं कराई गई तो भविष्य में बड़ा हादसा हो सकता है। नगर निवासी दिव्यगोपाल श्रीवास्तव, आशीष यादव, शिवम पाठक और विवेक तिवारी समेत कई लोगों ने कहा कि यह पुल क्षेत्र की पहचान और ऐतिहासिक धरोहर जैसा है। पुराने समय में यहां आवागमन रेलवे पुल की वनवे व्यवस्था से होता था, ऐसे में इस पुल के निर्माण ने क्षेत्र को बड़ी राहत दी थी। अब इसकी दुर्दशा लोगों को परेशान कर रही है।
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बताया गया कि 1970 के दशक में यमुना नदी पर बने इस पुल की आधारशिला तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने रखी थी। वर्ष 1980 में तत्कालीन ऊर्जा मंत्री राजा रणजीत सिंह जूदेव ने इसका उद्घाटन किया था। यह पुल लंबे समय तक उत्तर और दक्षिण भारत को जोड़ने वाला प्रमुख मार्ग रहा। बाद में राष्ट्रीय राजमार्ग-25 को राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण के अधीन कर फोरलेन परियोजना में शामिल किया गया और वर्तमान में इसका संचालन राष्ट्रीय राजमार्ग-27 के रूप में किया जा रहा है।
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पुराने पुल के रखरखाव की जिम्मेदारी अब एनएचएआई के पास है लेकिन विभाग इस ओर गंभीर नजर नहीं आ रहा। पुल के रखरखाव का कार्य एनएचआईटी नामक कंपनी को सौंपा गया है, बावजूद इसके पुल की स्थिति लगातार खराब होती जा रही है। पुल की रेलिंग कई स्थानों पर क्षतिग्रस्त हो चुकी है और कुछ हिस्सों में टूटकर नीचे गिरने लगी है। भारी वाहन गुजरने पर रेलिंगें तेज आवाज के साथ हिलती हैं, जिससे पैदल गुजरने वाले लोग भयभीत हो जाते हैं। लोगों का कहना है कि समय रहते मरम्मत नहीं कराई गई तो भविष्य में बड़ा हादसा हो सकता है। नगर निवासी दिव्यगोपाल श्रीवास्तव, आशीष यादव, शिवम पाठक और विवेक तिवारी समेत कई लोगों ने कहा कि यह पुल क्षेत्र की पहचान और ऐतिहासिक धरोहर जैसा है। पुराने समय में यहां आवागमन रेलवे पुल की वनवे व्यवस्था से होता था, ऐसे में इस पुल के निर्माण ने क्षेत्र को बड़ी राहत दी थी। अब इसकी दुर्दशा लोगों को परेशान कर रही है।
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