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कांच ही बांस के बहंगिया, बहंगी लचकत जाए...
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ठ पूजा के लिए बाजारों में खरीदरी करती महिलाए
- फोटो : ORAI
उरई। छठ पूजा का पर्व नहाय खाय के साथ बुधवार से विधिवत शुरू हो गया। चार दिवसीय इस पूजा के पहले दिन महिलाओं ने अपने-अपने घरों में साफ-सफाई की। पहनने और ओढ़ने वाले कपड़ों को भी धोकर सुखाया। इसके बाद व्रत शुरू हो गया। पूजा के पहले व्रत रखने वाले महिला पुरुषों ने सात्विक भोजन ग्रहण किया और अगले चौबीस घंटे के लिए व्रत शुरू कर दिया।
पूजा के लिए महिलाओं ने आज बाजार में डाला और सूप की खरीदारी की। इसके अलावा व्रत के फल भी खरीदे। शाम के समय महिलाओं ने घरों में गीत आदि गाए। कांच ही बांस के बहंगिया, बहंगी लचकत जाए, होय न बलमजी कहरिया (गीत के माध्यम से महिलाएं कह रहे है कि बलमजी (पति) थोड़ी देर के लिए कहार बनकर यह बांस की टोकरी लेकर चलो)।
छठ पूजा समिति के अध्यक्ष संजय साहनी बताते है कि यह व्रत चौबीस घंटे तक चलेगा। गुरुवार को खरना का व्रत होगा। जिसमें पहले दिन का व्रत टूटेगा और गन्ने के रस की खीर बनाकर अगले 36 घंटे के लिए फिर से व्रत शुरू कर दिया जाता है। यह व्रत उगते हुए सूर्य को अध्र्य देने के बाद ही समाप्त होगा।
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व्रत रखने वाली श्वेता साहनी का कहना है कि पहले दिन से ही इस व्रत में स्वच्छता पर ध्यान दिया जाता है। यह व्रत परिवार की खुशहाली के लिए इस कठिन व्रत को महिलाएं पूरे मनोयोग से करती है। छठ पूजा ऐसा लोकोत्सव है जो मन, वचन, कर्म की पवित्रता की प्रेरणा देता है।
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पूजा के लिए महिलाओं ने आज बाजार में डाला और सूप की खरीदारी की। इसके अलावा व्रत के फल भी खरीदे। शाम के समय महिलाओं ने घरों में गीत आदि गाए। कांच ही बांस के बहंगिया, बहंगी लचकत जाए, होय न बलमजी कहरिया (गीत के माध्यम से महिलाएं कह रहे है कि बलमजी (पति) थोड़ी देर के लिए कहार बनकर यह बांस की टोकरी लेकर चलो)।
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छठ पूजा समिति के अध्यक्ष संजय साहनी बताते है कि यह व्रत चौबीस घंटे तक चलेगा। गुरुवार को खरना का व्रत होगा। जिसमें पहले दिन का व्रत टूटेगा और गन्ने के रस की खीर बनाकर अगले 36 घंटे के लिए फिर से व्रत शुरू कर दिया जाता है। यह व्रत उगते हुए सूर्य को अध्र्य देने के बाद ही समाप्त होगा।
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व्रत रखने वाली श्वेता साहनी का कहना है कि पहले दिन से ही इस व्रत में स्वच्छता पर ध्यान दिया जाता है। यह व्रत परिवार की खुशहाली के लिए इस कठिन व्रत को महिलाएं पूरे मनोयोग से करती है। छठ पूजा ऐसा लोकोत्सव है जो मन, वचन, कर्म की पवित्रता की प्रेरणा देता है।