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जानकी को सिर्फ एक रुपये में मिली बेटी की सौगात

Sun, 21 Feb 2021 12:11 AM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Sun, 21 Feb 2021 12:11 AM IST
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Janaki gets daughter's gift for just one rupee
अस्पताल में मां की गोद में खेलती बच्ची - फोटो : ORAI
कोंच (जालौन)। कोंच सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) में पहली बार सीजेरियन ऑपरेशन से सात दिन पूर्व पैदा हुई बच्ची क्षेत्र में कौतूहल का विषय बनी हुई है। कोई बच्ची को क्षेत्र के लिए भाग्यशाली, तो कोई परिवार के लिए बता रहा है। खैर बच्ची का जन्म क्षेत्र के लिए स्वास्थ्य सेवाओं की मिसाल है। वहीं परिजन भी इसे अपनी खुशनसीबी मान रहे है। पिता का कहना है कि गरीबी में प्राइवेट अस्पताल में ऑपरेशन कराना संभव नहीं था, ऐसे में सीएचसी में सिर्फ एक रुपये से ऑपरेशन हुआ।
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बीती 13 फरवरी को कोंच सीएचसी में सीजेरियन ऑपरेशन से पहला प्रसव कराया गया। हिंगुटा गांव निवासी मुलायम सिंह के घर बेटी का जन्म हुआ। डाक्टरों का मानना है कि सीएचसी में व्यवस्था के शुरू होने से इलाके के गरीबों को काफी राहत मिलेगी। वहीं लोगों का कहना है कि जब से सीएचसी की स्थापना हुई है, तब से कई बार सीएचसी को हाईटेक बनाने के वादे किए गए थे, लेकिन पहला मौका था जब डिलीवरी की सुविधा मिली। जन्म के लगभग सात दिन बाद फिलहाल अभी मां बेटी को सीएचसी से छुट्टी नहीं मिली, लेकिन मां-बेटी दोनों सुरक्षित हैं।
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पिता मुलायम ने बताया कि डाक्टरों ने जैसे ही ऑपरेशन की बात की थी, तो परेशान हो गए थे। लगा था कि खर्च बहुत आएगा। किस-किस से कर्ज लेंगे, लेकिन तब डाक्टर भगवान बनकर आए और कहा कि पैसों की कोई जरूरत नहीं, सीएचसी में ही ऑपरेशन होगा। यह सुनते ही पहले तो उसे विश्वास नहीं हुआ, लेकिन डाक्टरों ने कर दिखाया। बच्ची की मां जानकी का कहना है कि परिवार की माली हालत ऐसी नहीं थी कि सीजेरियन ऑपरेशन से प्रसव कराने की वह सोच भी पाते, लेकिन यहां न सिर्फ उनकी समस्या का सुखद समाधान उन्हें मिला है, बल्कि उन जैसे समाज के कई तबके के लोगों के लिए भी एक नई राह खुल गई है।
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बच्ची की मां जानकी बोली, अस्पताल में सिर्फ एक रुपये का पर्चा बना था। इसके बाद कोई भी खर्च दवा व जांच के नाम पर नहीं हुआ। उन्हें सात दिनों तक अस्पताल में ही खाने-पीने की सामग्री के साथ सरकारी सहायता के रूप में 1400 रुपये भी मिले। बच्ची को पाकर मुलायम की मां उमा देवी तो खुशी से फूली नहीं समा रहीं। कहा, बेटी उसके जिगर का टुकड़ा बन कर आई है। इसका जन्म निश्चित रूप से उसके घर को रोशन करने के लिए हुआ है। बच्ची के पिता मुलायम सिंह बताते हैं कि मजदूरी कर वह परिवार का पेट पाल रहे हैं। ऐसे में ऑपरेशन से प्रसव कराने अगर वह बाहर जाता तो कई हजार का खर्चा आता। उसे किसी साहूकार से कर्ज लेना पड़ता। इसकी वजह से बच्ची के जन्म से पहलेे ही वह कर्जदार बन जाता।
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