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जालौन : मुसीबतों के बीच उजड़े घरों को बसाने की चुनौती

Tue, 30 Aug 2022 12:12 AM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Tue, 30 Aug 2022 12:12 AM IST
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Jalaun: The challenge of settling the ruined houses in the midst of troubles
बाढ़ के बाद सफाई करते प्रधान व अन्य - फोटो : ORAI
रामपुरा। गांवों से बाढ़ का पानी तो उतर गया है, लेकिन बेशुमार परेशानियां छोड़कर गया है। बीहड़ के गांवों में तबाही का मंजर साफ देखा जा सकता है। लोगों के घरौंदे उजड़ गए हैं। बिजली की लाइनें ध्वस्त होने से अंधेरा छाया हुआ है। मोबाइल बंद पड़े हैं, टॉर्च तक चार्ज नहीं हो पा रहीं। जहरीले कीड़ों का डर सता रहा है। पानी उतरने के बाद बीमारियां फैलने, मवेशियों के बीमार पड़ने का डर लोगों के चेहरे पर साफ दिख रहा है।
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बाढ़ प्रभावित बिल्हौड़, जखेता, हुकुमपुरा, सुलतानपुरा में जलस्तर कम होने के बाद लोगों को पीने का साफ पानी नहीं मिल पा रहा है। हैंडपंपों में गंदा पानी आ रहा है। लोग बीमार पड़ने लगे हैं। गांव के रूपसिंह, हनु, मुन्ना सिंह ने बताया कि पानी और बिजली की सबसे अधिक समस्या है।
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फसल चौपट हो गई है। मवेशी भूखे मरने की कगार पर हैं। निनावली के प्रधान विकास ने बताया कि चारे की परेशानी है। क्षेत्र के राठौरानपुरा तथा हनुमंतपुरा गांव में एक सप्ताह से बिजली नहीं है। लोगों के सामने सबसे बड़ी चुनौती उजड़े घरों को फिर से बसाने की है।
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कुसेपुरा के ग्रामीणों ने बताया कि यहां प्रशासन द्वारा कोई सहायता उपलब्ध नहीं कराई गई है। राशन सामग्री के नाम पर एक भी पैकेट गांव के किसी ग्रामीण को नहीं भेजा गया। कुसेपुरा के लोगों ने बताया कि लेखपाल कल्लू सिंह ने पांच किलो चना और फूला बांटने आए थे। ग्रामीणों के विरोध करने पर लेखपाल नाराज होकर चले गए।
कुठौंद। हर साल बाढ़ से क्षेत्र के लगभग एक दर्जन गांवों में बाढ़ का पानी भर जाता है। पिछले चार साल में तीन बार तबाही मचा चुकी है। सीएम दौरे के बाद तत्कालीन डीएम प्रियंका निरंजन ने पिछली बाढ़ में पीड़ितों को गांव के बाहर पट्टा स्वीकृत करने का आश्वासन दिया था, जो आज तक नहीं हो सका।
जब इस संबंध में पूर्व विधायक कालपी नरेंद्र सिंह जादौन से बात की गई तो उन्होंने बताया कि यह मामला मेरे सामने का है। मैं जिला अधिकारी चांदनी सिंह से अपनी बात रखकर योजना को पूरा कराने का प्रयास करूंगा।

तीन दिन से नहीं जला चूल्हा, नहीं मिली मदद
भदेख गांव निवासी दिनेश कुमार ने बताया कि उसके घर के छत तक पानी आ गया था, बहुत नुकसान हुआ है। टिकरी निवासी ड्राइवर रज्जन सिंह ने बताया उनकी तीन लड़कियां और एक लड़का है। बच्चों के पालन पोषण तक की समस्या है। भदेख की अनीता ने बताया घर में 3 दिन से चूल्हा नहीं जला है। भदेख के मुस्तकीम ने बताया चार साल में तीसरी बार उनका घर टूटा है। उन्हें कॉलोनी या दूसरी जगह पर पट्टा नहीं दिया गया है।

बाढ़ प्रभावित गांवों में मरीज देखते सीएमओ।

बाढ़ प्रभावित गांवों में मरीज देखते सीएमओ।- फोटो : ORAI

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